रोडवेज बस व पटवार घर की समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि कनीना से गाहड़ा-सिहोर होकर दादरी के लिए जाने वाली सड़क पर सरकारी बसे न होने के कारण गांव के लोगों को कनीना व दादरी जाने के लिए या तो अपने निजी वाहनों का प्रयोग करना पड़ता है या फिर कई-कई घंटों प्राइवेट वाहनों का इंतजार करना पड़ता है। बस सुविधा न होने के कारण गांव की लड़कियों का उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज जाना मुश्किल बना हुआ है। इस समस्या के कारण काफी लड़कियों ने तो स्कूल व कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया है। 6 हजार आबादी वाले इस गांव में न तो पटवार घर है और न ही यहां कोई पटवारी बैठता है। ग्रामीणों को अपने जमीन-जायदाद के कार्यों के लिए कनीना जाना पड़ता है, जिसके लिए वाहन सुविधा भी नहीं है। काफी बार उन्हें पटवारी नहीं मिलते तो बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसमें ग्रामीणों को मानसिक व आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है।
गांव में नहीं है कोई बैंक शाखा
6 हजार की आबादी वाले गांव सिहोर में बैंक की कोई शाखा न होने के कारण ग्रामीणों को बैंक संबंधित कार्य के लिए गांव से लगभग पांच किलोमीटर दूर कनीना जाना पड़ता है। ग्रामीण राज सिंह, जगदीश कुमार, सत्यनारायण, अजय कुमार, राममेहर, धर्मपाल, जगदीश, सुनीता, उर्मिला देवी, राजबाला, सरोज, पूजा संतोष, बबली, कांता, महेन्द्र, सरोज, धर्मबीर, रामवतार, ब्रह्मप्रकाश, दयानंद, रामनिवास, दिनेश कुमार, सतबीर, लीलाराम, नरेन्द्र, देवेन्द्र, परमानंद व रविन्द्र कुमार आदि ने बताया कि गांव में सैकड़ों लोग सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं। वहीं पांच सौ से अधिक लोग पेंशन उपभोक्ता है, लेकिन इसके बाद भी गांव में बैंक की कोई शाखा नहीं है। ग्रामीणों को बैंक संबंधित कार्य के लिए दूसरे गांव व कस्बों में जाना पड़ता है।