प्लास्टिक लो टनल और मल्च विधि से किसानों को मिल सकेगा दोगुना लाभ
राज्य में खरबूज उत्पादन को बढ़ावा देने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में चल रहे अनुसंधान का उत्साहजनक परिणाम सामने आया है। एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग विभाग के अंतर्गत बागवानी में प्लास्टिक के उपयोग पर राष्ट्रीय समिति सुनियोजित कृषि पद्धति विकास योजना के तहत प्लास्टिक लो टनल व मल्च विधि से खरबूज की खेती पर शोध किया जा रहा है। इस तकनीक से प्रति एकड़ 50 हजार रुपए की लागत आती है। वहीं, इसमें छह से आठ टन प्रति एकड़ की पैदावार हासिल हो सकता है। इससे किसान प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख का लाभ हासिल कर सकते हैं। योजना प्रभारी डाॅ. मिंटू जाॅब ने कहा कि सामान्य तकनीक से खेती करने पर तीन से चार टन की ही उपज मिलती है। इस तरह किसानों को इस तकनीक से दोगुना लाभ मिलता है। कहा कि प्लास्टिक लो टनल के उपयोग से ग्रीन हाउस जैसा प्रभाव दिखता है। जाड़े में बाहरी तापक्रम की अपेक्षा 5 डिग्री अधिक तापक्रम मिलने से नर्सरी तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती। सीधी बुआई दिसंबर के दूसरे पखवाड़े से की जा सकती है। वहीं, मल्च से खेतों में बिल्कुल घास नहीं होती है।