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सहायिकाओं ने भीख मांगकर Rs.2607 जुटाए

3 वर्ष पहले
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं ने हड़ताल के 29वें दिन शहर में भीख मांगों रैली निकाली। रैली में कार्यकर्ता सहायिकाओं ने नारे लगाए शासन से सिख ली गली गली में भीख ली, आंगनबाड़ी से दूरी भीख मांगना हुई मजबूरी जैसे नारे लगाए। भीख मांगने हाथ में कटोरा लिए दुकानों में पहुंचे। दो घंटे की इस रैली में 2607 रुपए जमा किए। इसके अलावा दुकानदारों ने टमाटर, मिर्च, नींबू, तेंदू, चना, फल्ली आदि भी दान में दिए।

रैली 13 अप्रैल को मिनी स्टेडियम से दोपहर में निकाली गई जो शहर के मुख्यमार्ग से होते ऊपर नीचे रोड से वापस धरनास्थल पहुंची। रैली में शामिल कार्यकर्ता हाथों में कटोरा लेकर तथा कुछ ने अपना आंचल फैला दुकानों में जाकर भीख मांगी। अपनी आपबीती बता कहा अब हमें ऐसे ही गुजारा करना पड़ेगा। अबतक आपस में दस रुपए चंदा कर पंडाल व भोजन का खर्च निकाल रहे थे। अब इस खर्चे के लिए भीख मांगने की नौबत आ गई है। रैली से लौट कार्यकर्ताओं ने भीख में मिले पैसे को जमा कर गिनती करते कहा इससे कुछ दिन गुजारा चल जाएगा। जरूरत पड़ने पर फिर भीख मांगने जाएंगे। कार्यकर्ताओं ने बताया इस राशि को हड़ताल के दौरान कार्यकर्ताओं के लिए बनाए जाने वाले भोजन में खर्च किया जाएगा। रैली में कांकेर, चारामा, नरहरपुर, दुर्गूकोंदल तथा भानुप्रतापपुर की 1500 से अधिक कार्यकर्ता व सहायिकाएं शामिल हुई। रैली के बाद कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करते जिलाध्यक्ष जयश्री राजपूत ने कहा हम अपने घर परिवार को छोड़ दिन रात भूख हड़ताल में बैठे रहेंगे, अंतिम सांस तक लड़ेंगे। महिलाओं में इतनी शक्ति है कि रमन सरकार को झुका कर रहेंगे। अब तक हमें बर्खास्तगी की धमकी देकर हड़ताल से लौटा दिया जाता था लेकिन इस बार सरकार असफल है। हम बर्खास्त होकर भी डटे हुए हैं।

कांकेर। दुकानों में जाकर भीख मांगती आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं।

नई भर्ती पर रोक लगाने की नई मांग उठी
रैली के बाद कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जिसमें अबतक पुरानी 6 सूत्रीय मांगों के अलावा बर्खास्तगी बंद करने तथा नई भर्ती की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है। इसमें पुर्नविचार करने भी कहा गया है। इसके पूर्व तक शासकीय कर्मचारी घोषित कर मानदेय बढ़ाने, सेवानिवृत्ति के बाद तीन लाख व दो लाख रुपए देने, ड्रेस कोड की बाध्यता हटाने की मांग थी।

बंटवारे में हम ठगे गए
कार्यकर्ताओं ने बताया मध्यप्रदेश के बंटवारे में हम ठगे गए हैं। पड़ोसी राज्य में पूर्व से कार्यकर्ताओं को पांच हजार मानदेय देना शुरू कर दिया गया है लेकिन छग में नहीं बढ़ाया गया। हमनें कुछ नहीं कहा। अब मध्यप्रदेश में मानदेय बढ़ाया गया है लेकिन हमें इसके लिए छग सरकार के सामने गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। फिर भी सरकार नहीं सुन रही है।

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