डाकघर के डाकिया से केंवटी के एक ग्रामीण ने बीमा पालिसी ली थी। जिसमें डाकिया ने किस्त की राशि में हेराफेरी करते हुए गबन कर लिया। मामला जिला उपभोक्ता फोरम में पहुंचा। जांच में पाया गया कि इसके लिए हेड पोस्ट मास्टर व डाकघर के संभागीय अध्यक्ष जिम्मेदार हैं। इन दोनों को ग्राहक की बीमा पालिसी के किस्त व विलंब शुल्क तथा अन्य राशि देने का फैसला सुनाया गया।
भानुप्रतापपुर तहसील के ग्राम केंवटी के ग्रामीण रूपचंद शील 52 वर्ष पिता नारायन ने भानुप्रतापपुर पोस्ट आफिस के शाखा डाकपाल बंशीलाल कोरेटी निवासी लामन्हार पोटगांव अंतागढ़ से बचत योजना के तहत बीमा कराया था। इसमें प्रतिमाह 5 सौ रुपए जमा किया जाना था। ग्रामीण पिछले 47 माह से डाकिया को किश्त की रकम देता रहा। लेकिन डाकिया उसे पोस्ट आफिस में जमा करने के बजाए गबन कर लिया। इसके साथ ही वह ग्रामीण के पासबुक में फर्जी तरीके से मुहर लगा अपने हस्ताक्षर कर राशि को जमा होना दिखाता रहा। इसकी जानकारी होने पर ग्राहक ने इसकी शिकायत पोस्ट आफिस से की। जिस पर पोस्ट आफिस से नियुक्त जांच अधिकारी ने पाया कि 11 माह की राशि की हेराफेरी की गई है। डाकिया को विभाग द्वारा सेवा से अलग कर दिया गया। इसके साथ ही पोस्ट मास्टर व संभागीय अध्यक्ष ने मामले में जांच चलने का हवाला देकर ग्राहक से अगली किश्त भी नहीं ली गई। जिससे ग्राहक परिपक्वता पर प्राप्त होने वाली 30 हजार रुपए व ब्याज की राशि से वंचित हो गया। यह मामला उपभोक्ता फोरम में पेश किया गया। अध्यक्ष जीएस कुंजाम, सदस्य बसंत ठाकुर तथा राधा नाग ने सभी दस्तावेज की जांच व आवेदक अनावेदक का पूरा कथन सुन पाया कि पोस्ट मास्टर व संभागीय अधीक्षक ने ग्राहक को सेवा देने में कमी की है। इस लिए इन दोनों के द्वारा ग्राहक के पालिसी को पुनर्जीवित करेंगे।
जानंे, डाकिया पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई
मामले में फोरम ने डाकिया को अपना व्यय स्वयं वहन करने कहा है। लेकिन डाकिया पर किसी प्रकार से किस्त आदि जमा करने का फैसला नहीं दिया गया है। क्योंकि डाकिया पोस्ट मास्टर व संभागीय अधीक्षक द्वारा ही रखा गया था। इन डाकिया पर कंट्रोल व सुपरविजन की जिम्मेदारी थी। प्रत्येक तीन माह में डाकघर के खाता बही एवं पासबुक की जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाती है। लेकिन यहां नहीं किया गया। यह भी इनकी सेवा में कमी पाई गई।