फायनेंस कंपनियां अधिकांश मामले में वाहन को जब्त कर कस्टमर पर दबाव बनाती हैं। कस्टमर से रकम निकालने यही उनका एक खास दांव होता है। लेकिन इस बार यह दांव कंपनी पर उल्टा पड़ गया।
किश्त नहीं पटाने का हवाला देकर वाहन जब्त उसे दोबारा बेचने वाली फायनेंस कंपनी को उपभोक्ता फोरम ने कस्टमर को साढ़े चार लाख रुपए देने का फैसला सुनाया है। अंतागढ़ ब्लॉक के गांव ताड़ोकी निवासी हरदास प्रधान पिता भुखऊराम ने नेशनल गैरेेज के संचालक पंकज कौशिक से अपनी पुरानी टाटा सूमो वाहन देकर नया सुमो वाहन खरीदा था।
नए वाहन की कीमत में पुराने वाहन के 90 हजार रुपए काट कर शेष राशी 7.24 लाख रुपए बताई। इसमें 5.50 लाख रुपए कंपनी ने चोला मंडलम इनवेस्टमेंट एंड फायनेंस कंपनी से फायनेंस कराया था। कस्टमर इसकी 21 किश्त अदा कर चुका था। लेकिन फायनेंस कंपनी उक्त वाहन का आरसी बुक अपने पास रख ली थी। ग्राहक ने कंपनी में जमा किए रकम का हिसाब व आरसी बुक की छाया प्रति की मांग की। लेकिन कंपनी ने नहीं दी। इससे नाराज होकर कस्टमर ने किश्त अदा करना बंद कर दिया। 3 किश्त नहीं पटाने पर कंपनी बगैर कोई सूचना के वाहन को जबरदस्त खींच कर ले गई।
जबकि कस्टमर इसके लिए 2.95 लाख रुपए जमा कर चुका था। इसके बाद कंपनी ने उक्त वाहन दूसरे ग्राहक को बेच दी। इस संबंध में ग्राहक ने रकम वापस दिलाने मामला उपभोक्ता फोरम में प्रस्तुत किया। जिस पर फोरम अध्यक्ष जीएस कुंजाम, सदस्य बसंत ठाकुर व राधा नाग ने दस्तावेज अवलोकन व पक्षकारों के बयान पर पाया कि इसमें फायनेंस कंपनी ने अपनी सेवा देने में कमी की है। अत: फायनेंस कंपनी को जुर्माना के रूप में कस्टमर को जमा की गई रकम 4.30 लाख रुपए के अलवा मानसिक क्षति के लिए दस हजार तथा परिवाद व्यय दो हजार रुपए देने फैसला सुनाया।