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सुरक्षा नहीं मिलने से बंद हो गया महिलाओं का शराबबंदी अभियान

3 वर्ष पहले
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शहर व गांवों में महिला कमांडो द्वारा जोर शोर से चलाया जा रहा शराबबंदी अभियान अब ठंडा पड़ता दिखाई दे रहा है। शहर के कई वार्ड व गांव में यह अभियान बंद भी हो गया है। महिला कमांडो का कहना है कि पुलिस द्वारा सुरक्षा मुहैया नहीं कराने के कारण यह अभियान बंद हो गया है। जबकि पुलिस दावा कर रही है कि अभियान से जुड़ी महिला समूहों को पुलिस पूरा सहयोग कर रही है। स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय के कुछ वार्डों में ही यह अभियान सिमट कर रह गया है।

पिछले साल जिला मुख्यालय समेत कई गांव में शराबबंदी को लेकर महिलाओं ने अभियान छेड़ा था। कुछ महीनों तक महिलाएं रात में लाठी-टार्च लेकर गलियों में गश्त करती रही। इसके चलते शराब पीने के अलावा अवैध रूप से शराब बेचने के धंधे पर भी अंकुश लग गया था। लेकिन पिछले कुछ महिनों से यह अभियान बंद कर दिया गया है। अभियान छेड़ने वाली अधिकांश महिला कमांडो अब सड़कों से गायब हो चुकी है। इसका असर भी दिखाई देने लगा है। अब शराब खोरी बढ़ने के साथ साथ अवैध शराब का धंधा भी फलने फूलने लगा है। भास्कर ने इस संबंध में जायजा लिया तो कई जगह अभियान बंद मिला। ग्राम मनकेसरी, कोदाभाठ में शराबबंदी अभियान जनवरी माह से बंद है। इसके साथ ही इन गावों में अब कई घरों में शराब बनना शुरू हो गया है। ग्राम कोदाभाठ की पूर्व सरपंच व शराबबंदी अभियान से जुड़ी आशा उइके ने कहा उन्हें पुलिस का सहयोग नहीं मिल पाया। जब भी वे निरीक्षण के लिए निकलती थी। इस दौरान पुलिस सुरक्षा कर्मी उनके साथ होना जरूरी था। कई बार फोन करने पर पुलिस कर्मी नही पहुंचते थे। इससे शराबबंदी अभियान ही बंद हो गया।

आपसी विवाद के चलते बंद हुआ अभियान : कांकेर थाना प्रभारी डीपी श्रीवास ने कहा शराबबंदी अभियान से जुड़ी महिलाओं को पूरा सहयोग दिया जा रहा था। जब भी महिलाएं गांव में अवैध शराब बनने की सूचना देती थी, पुलिस पहुंचकर कार्रवाई करती थी। गांव व शहर में कई जगह पर आपसी विवाद के कारण भी शराबबंदी अभियान बंद हुआ है।

अभियान बंद होने के बाद महिलाएं आपस में चर्चा करती संगठन की महिलाएं।

सोशल मीडिया में महिलाओं से गाली-गलौज

अन्नपूर्णापारा वार्ड व सुभाष वार्ड में भी शराबबंदी अभियान गत वर्ष सितंबर माह से शुरू किया गया था। इस साल मार्च माह से बंद कर दिया गया है। यहां शराबबंदी अभियान प्रेरणा क्षेत्रीय समिति ने शुरू किया था। इसमें 10 समूह की 120 महिलाएं शामिल थे। अभियान का वार्ड के शराबियों ने विरोध करना शुरू कर दिया और गाली गलौज के साथ मारने की धमकी देने लगे। वाट्सअप में महिलाओं को गाली गलौज और मारने की धमकी मिलने लगी। इसकी शिकायत महिलाओं ने पुलिस से भी की थी। समूह की रंजीता मंडावी ने कहा महिलाओं के संगठन ने काफी अच्छा प्रयास किया था लेकिन हमेशा संगठन की महिलाओ के साथ गाली गलौज व मारपीट की धमकी दी जाती थी। हमारे पास सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी कुछ नहीं था। जिससे यह अभियान बंद करना पड़ा। अभियान बंद होने से अब फिर से कई जगह पर शराब पीना लोगों ने शुरू कर दिया है।

कहीं बच्चों की पढ़ाई की खातिर बंद किया अभियान

राजापारा वार्ड में मार्च माह से शराब बंदी अभियान बंद हो गया। यहां गत वर्ष अगस्त माह से अभियान शुरू किया गया था। नारी शक्ति समूह की अध्यक्ष विभा सिंह ठाकुर ने कहा बच्चों की पढ़ाई व शादी ब्याह के कारण अभियान बंद किया गया है। अभियान बंद होने से फिर से शराबी तत्व सक्रिय हो गए है। अब फिर से मीटिंग कर अभियान शुरू किया जाएगा।

भंडारीपारा में आपस में नहीं बनी सहमति

शहर के भंडारीपारा वार्ड में पिछले साल अक्टूबर माह से दुर्गा महिला समिति संगठन ने शराबबंदी अभियान शुरू किया था। इस साल फरवरी माह से महिलाओं का अभियान को लेकर घूमना बंद है। महिला संगठन की सचिव इंदिरा यादव ने कहा वार्ड में शराबबंदी कराने महिलाओं का सामूहिक प्रयास था लेकिन लोग नहीं सुधरे। कई बार उनसे विवाद हुआ। महिलाओं की भी सहमति नहीं बन पाई कि शराबबंदी अभियान आगे चलना चाहिए। इस कारण अभियान को बंद कर दिया गया।

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