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प्रवेश पत्र में प्रिंट नहीं था पर्यावरण विषय, 160 छात्रों को नहीं देने दी परीक्षा

3 वर्ष पहले
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चारामा काॅलेज में परीक्षार्थियों के पास से बड़ी संख्या में मोबाइल जब्त होने का मामला ठंडा नहीं हो पाया था कि फिर से एक मामले ने काॅलेज को चर्चा में ला दिया है। इस बार काॅलेज की मनमानी के चलते 160 छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। प्रबंधन ने विश्वविद्यालय के नियमों को ताक में रख छात्रों को लौटा दिया जिससे छात्र परेशान हैं। जबकि जिले के अन्य कालेजों में छात्रों के साथ एेसी स्थिति में विश्वविद्यालय के नियमों को देख उन्हें परीक्षा में बैठने दिया गया। यह जिले का अबतक का सबसे बड़ा आंकड़ा है जिसमें छात्र परीक्षा में शामिल नहीं सके।

11 अप्रैल को बीए प्रथम वर्ष पर्यावरण विषय की परीक्षा थी। इसमें प्राईवेट व रेग्युलर कुल 800 से अधिक छात्रों को शामिल होना था। निर्धारित समय सारणी के अनुसार छात्र परीक्षा देने पहुंचे। इस दिन छात्रों की उपस्थिति 620 दर्ज की गई। इसके अलावा 160 छात्र ऐसे थे जिनके प्रवेश कार्ड में पर्यावरण विषय प्रिंट नहीं हो पाया था। छात्रों के अनुसार उन्होंने संबंधित प्राध्यापकों से संपर्क किया लेकिन छात्रों के विषय की जानकारी लेकर परीक्षा में बैठाने के बजाए वापस लौटा दिया। छात्रा बिमलेश्वरी वट्टी ने बताया उसके प्रवेश कार्ड में पर्यावरण दर्ज नहीं था। सर को इसकी जानकारी दी। लेकिन परीक्षा में बैठने नहीं दिए। इसी तरह कुल 160 छात्रों को वापस लौटाने की बात सामने आई है।

फाइल जमा करने वसूला गया अधिक शुल्क

चारामा कालेज में पर्यावरण फाइल जमा करने के नाम पर अधिक शुल्क लेने की बात सामने आई है। छात्रों ने बताया फाइल जमा करने का शुल्क 30 रुपए है लेकिन संबंधित प्राध्यापक द्वारा इसके लिए अलग अलग छात्रों से 50 से 100 रुपए तक वसूल किया गया है।

साथ ही एमए अंतिम वर्ष के राजनीति विषय में भी त्रुटि

बीए प्रथम वर्ष के पर्यावरण विषय के अलावा इस सत्र में जारी एमए अंतिम वर्ष के राजनीति के छात्रों को जारी प्रवेश पत्र में भी त्रुटि होने की बात सामने आई है। इसमें अंतिम वर्ष की जगह एमए पूर्व के विषयों को प्रिंट कर दिया गया है। इसे काॅलेज स्तर पर ही सुधार कर लिया गया है।

मैं नहीं था प्रभारी: चंद्रवंशी

वर्तमान में चारामा काॅलेज के प्रभारी एमएल नेताम ने कहा मैं 3 से 6 बजे का केंद्रवीक्षक हूं। और ना ही उस दौरान मैं कालेज का प्रभारी था। उस समय जो विक्षक व प्रभारी थे वे इसके बारे में जानेंगे। मैं नहीं। ऐसे में जब प्रभारी सरिता उयके जो कि कॉलेज की प्राचार्या हैं उनसे वजह जाननी चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

ये है विश्वविद्यालय का नियम

विश्वविद्यालय का नियम है कि यदि किसी छात्र के प्रवेश पत्र में त्रुटिवश उसके विषय का नाम प्रिंट नहीं हो पाया है या फिर दूसरे विषय का नाम प्रिंट हो गया तब भी छात्र को वापस नहीं लौटाया जाए। इसे महाविद्यालय स्तर पर ही सुधार कर छात्र के बताए अनुसार उसके प्रवेश पत्र में उक्त विषय का नाम दर्ज करना है। सुधार की हुई प्रवेश पत्र को फोटो कापी विश्वविद्यालय को भेजी जानी है और छात्र को परीक्षा में शामिल करना है। किसी भी स्थिति में छात्र को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।

मामले की जांच के साथ होगी कार्रवाई

बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति डा शैलेंद्र ने बताया इसकी जानकारी नहीं है। किसी छात्र को परीक्षा से वंचित नहीं करना है। यदि चारामा कालेज में ऐसा हुआ है तो इसकी जांच कराई जाएगी। यह विश्वविद्यालय स्तर की त्रुटि नहीं है। इसमें कालेज या जिसकी भी गलती होगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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