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पिता के इंतजार में दरवाजे, तो कभी मां को चुप कराने दौड़ लगाती रही नन्हीं वंशिका

3 वर्ष पहले
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झुनियापारा के यादव भवन के बाहर लगी पुलिस व मोहल्ले वालों की भीड़। सभी के चेहरों में पर मातम छाया हुआ है। लेकिन इनके बीच 7 साल की वंशिका अपने शहीद पिता के आने के इंतजार में पुलिस वाहनों की आहट सुनते ही दरवाजे तक तो कभी अपनी मां को चुप कराने कमरे तक दौड़ लगा रही है। शहीद की खबर आने के बाद से मोहल्ले में मातम छा गया है। ऐसा ही हाल लखनपुरी इलाके के गांव चिनौरी का है। यहां शाम पांच बजे शहादत की खबर पहुंची।

रविवार सुबह दंतेवाड़ा के चोलनार मार्ग में हुए नक्सली विस्फोट में जिले के दो राम कुमार यादव तथा सालिक राम सिन्हा शहीद हो गए। शहीद रामकुमार अपनी प|ी व दो बच्चों के साथ किरंदुल में रह रहा था। बच्चों की परीक्षा खत्म होने के बाद उसने भी अपने घर कांकेर आने छुट्टी के लिए आवेदन दिया था। लेकिन विकास यात्रा के चलते जवान की छुट्टी मंजूर नहीं की गई। इसके चलते 15 दिन पहले ही प|ी व दोनों बच्चे अपने कांकेर अपने दादा दादी के घर आ गए। जवान को बचेली में होने वाले कार्यक्रम के बाद छुट्टी मिली थी। जिससे उसने बच्चों को कहा था तुम जाओ वह आएगा। पिता के इसी शब्दों को याद कर वंशिका उसके आने के इंतजार में बार बार दरवाजे तक दौड़ लगा रही है।

रविवार को जैसे ही यह खबर परिवार को मिली जवान की प|ी बेहोश हो गई। जवान की मां भी बेसुध हो गई। जिसमें पुत्री वंशिका बार बार होश में लाने की कोशिश करती रही। पिता शिवलाल एक कोने में बैठ पुत्र को याद कर आंसू बहाने लगा। सुबह से विश्रामपुरी के लिए निकले छोटे भाई रामस्वरूप खबर तक नहीं है कि उसका भाई शहीद हो चुका है। सूचना मिलते ही घर में मोहल्ले की महिलाएं व रिश्तेदार जमा होकर परिवार को ढांढस बंधाते रहे।

घर के उद्घाटन में आया था जवान, अब आएगा तिरंगा में लपटा शव : पिछले साल ही शहीद जवान के पिता ने यादव भवन बनाया है। जिसके उद्घाटन में 6 अक्टूबर को पुत्र रामकुमार यादव कांकेर आया था। इसके बाद वह छुट्टियों में आऊंगा कह कर गया था। लेकिन छुट्टी नहीं मिली।

शहीद जवान रामकुमार

जन्मदिन के दिन ही अपनों से बिछड़े सालिक

लखनपुरी| दंतेवाडा जिले में हुए नक्सली विस्फोट में लखनपुरी के ग्राम चिनौरी का जवान सालिक राम सिन्हा शहीद हो गया। जवान का 20 मई को जन्म दिन था। जवान ने सुबह 9.24 को अपने पुत्र को जन्म दिन का मैसेज भेजते हुए लिखा कि आज मैं 41 साल पूरा कर लिया, आज मेरा जन्म दिन हैं। मैं अपने परिवार को बहुत याद कर रहा हूं। इसके साथ ही उन्होंने अपने मित्रों को भी अपने जन्म दिन होने का मैसेज किया। इसके कुछ घंटे बाद ही सुबह 11 बजे वे नक्सली विस्फोट में शहीद हो गए।

रविवार को उनके ही रिश्तेदार के यहां छठ्ठी का कार्यक्रम भी चल रहा था। इसमें जवान का परिवार भी शामिल था। इसी दौरान शाम 4 बजे जवान के शहीद होने की जानकारी मिली। खबर लगते ही पूरा कार्यक्रम मातम में बदल गया। गांव के लोगों को जानकारी लगते ही सभी शहीद जवान के घर पहुंचकर परिजनों को ढांढ़स बंधाते रहे। सालिक राम तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनके बड़े भाई रविलाल सिन्हा, दूसरा बाई रघुबीर सिन्हा कांकेर लाइन में नगर सैनिक में पदस्थ हैं। पुलिस में भर्ती होने से पहले सालिक स्वयं की टैक्सी चलाते थे। इसके बाद उन्होंने संजीवनी एक्सप्रेस की गाड़ी चलाई। इसी दौरान पुलिस भर्ती की परीक्षा दी और 31 मई 2014 को दंतेवाड़ा जिले में आरक्षक के पद पर पदस्थ हुए। तब से वहीं पदस्थ थे। उनके दो पुत्र हैं। बड़ा बेटा बलराम सिन्हा बीए प्रथम वर्ष में है, वहीं दूसरा तामेश्वर 12 वीं परीक्षा पास की है।

कांकेर. पति के शहादत की खबर पाकर बेसुध हुई मां को होश में लाती पुत्री वंशिका।

सालिक राम

शहीद होने की खबर लगते ही छाया मातम।

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