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विकास यात्रा में पानी के दो लाख पाउच मंगाए रिसाइकिल नहीं हो पाने से शहर में भरा कचरा
भारत सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन वेबसाइट http://mohua.gov.in/ पर जहां स्वच्छता सर्वेक्षण में अंबिकापुर को पहला स्थान मिला है। वहीं दूसरी ओर कांकेर में प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन व डिस्पोजलों का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। पानी पाउच, पॉलीथिन व डिस्पोजल डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने वालों के लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं क्योंकि इसकाे रिसाइकिल नहीं किया जा सकता है।
दुकानदार तो पॉलीथिन व डिस्पोजल का उपयोग करते ही हैं सरकारी आयोजनों में भी इनका उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। मुख्यमंत्री की विकास यात्रा के दौरान आमसभा में पहुंचने वालों के लिए दो लाख पानी के पाउच मंगाए गए थे। पानी पाउच पाॅलीथिनों में आए थे व बड़े पैमाने पर पहुंचे इन पाउचों ने शहर में पॉलीथिन प्रदूषण को बढ़ाया ही। छग में सरकार ने पिछले चार सालों से पॉलीथिन व डिस्पोजल पर प्रतिबंध लगा रखा है। कभी कभार पालिका पॉलीथिन व डिस्पोजल बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती है।
पॉलीथिन व डिस्पोजल का उपयोग किराना दुकान, सब्जी बाजार, जनरल र्स्टोस के साथ सभी जगह खुलेआम हो रहा है। डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने वाले तीनों सेंटरो में सिविल लाइन, शीतलापारा व एमजी वार्ड में कचरा संग्रहण करते हैं। कचरे में से प्लास्टिक, लोहा तथा कांच की बोतलों को अलग कर कबाड़ी में बेच दिया जाता है। गीला कचरा को खाद्य बनाने उपयोग किया जाता है। कचरे में सबसे ज्यादा मात्रा में पॉलीथिन व डिस्पोजल मिलते हैं। सिविल लाइन व एमजी वार्ड परिसर में पॉलीथिन को खुले में फेंका जा रहा है।
हर साल शहर में 30 हजार किलो तक जमा हो रहा पॉलीथिन कचरा
सरकारी आयोजनों में हो रहा पानी पाउच का उपयोग
जिले में होने वाली सभी मुख्यमंत्री की सभाओं तथा कार्यक्रमों में पहुंचने वालों को पिलाने पाउच मंगाए जाते हैं। जनवरी 2018 में भानुप्रतापपुर में मुख्यमंत्री के बोनस वितरण कार्यक्रम के लिए 25 हजार, कांकेर नरहरदेव मैदान में अप्रैल 2018 में आयोजित मुख्यमंत्री की सभा के लिए 50 हजार तथा 14 मई को विकास यात्रा के दौरान गोविंदपुर मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री की सभा के लिए तो 2 लाख पानी के पाउच मंगाए गए थे।
कभी-कभार कार्रवाई करती है पालिका
कोई जागरूकता अभियान भी नहीं चलाया जा रहा। नगरपालिका ने इस वर्ष 2018 में 31 जनवरी को 1.78 क्विंटल पॉलिथीन 11 दुकानों से जब्त की थी इसके बाद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
लोगों में जागरूकता की कमी: सूखा व गीला कचरा संग्रहण करने नगर पालिका ने प्रत्येक घर में दो बाल्टी अलग-अलग रंग की प्रदान की है। प्राय: लोग जानकारी के अभाव में एक ही बाल्टी का उपयोग कर उसी में सूखा-गीला कचरा एक साथ डाल देते हैं।
सिविल लाइन का एसएलआरएम सेंटर जहां नजर आता है पॉलीथिन का ढेर।
पॉलीथिन का कोई उपयोग नहीं हो रहा
सिविल लाइन वार्ड एसएलआरएम सेंटर सुपरवाइजर संगीता साहू ने कहा खाद्य बनाने प्रकिया के लिए गीला कचरा गड्ढे में डाल दिया जाता है। एमजी वार्ड की सुपरवाइजर रीता धुरव ने कहा रोजाना बड़ी मात्रा में पॉलीथिन आ रही है।
कार्रवाई की जाती है: नगरपालिका सीएमओ लाल अजय बहादुर सिंह ने कहा शासन के आदेश पर पॉलीथिन पर रोक लगाने कार्रवाई की जाती है। लोगों में भी जागरूकता आनी जरूरी है। एसएलआरएम सेंटर में जमा पॉलीथिन की समस्या का निराकरण करने प्रयास किया जा रहा है।
रोज निकलता है 1 क्विंटल पॉलीथिन का कचरा
रोजाना 2 टन कचरा जमा होता है जिसमे तीनों जगह मिलाकर 70 किलो से एक क्विंटल पॉलीथिन रोजाना जमा होता है। इतना कचरा नष्ट नहीं होता। महीने में औसतन 2500 तथा साल में 30 हजार किलो कचरा शहर से पॉलीथिन के रूप में निकलता है जो नष्ट नहीं होता तथा ये शहर का प्रदूषण बढ़ा रहा है। शहर भर में घरों की संख्या 6500 व दुकानों की संख्या 1200 है।