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मितानिनों की हड़ताल से अंदरूनी गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं पर हो रहा असर

3 वर्ष पहले
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मितानिन संघ की हड़ताल में मितानिनों के साथ मितानिन प्रशिक्षक, ब्लाक समन्वयक भी शामिल हैं। हड़ताल की वजह से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है। मितानिन अपने पास दवा किट भी रखती हैं और टीवी व कुष्ठ की दवा भी ग्रामीण मितानिन की देखरेख में खाते हैं। हड़ताल की वजह से ऐसे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। हड़ताल की वजह से घर में मौसमी बीमारी को लेकर पहुंचने वालों को दिक्कत हो रही है। दूरस्थ गांव जहां पर अस्पताल की सुविधा नहीं है। ऐसे गांव में हड़ताल की वजह से बीमार पड़ने पर लोगों को दिक्कत हो रही है। ग्राम मरकाटोला में 2 लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत थी। वे मितानिन के घर पहुंचे लेकिन मितानिन के हड़ताल में होने से दवा नहीं मिल पाई। ग्राम शामतरा में एक कुष्ठ का मरीज है जो मितानिन के भरोसे दवाई खाते हैं। हड़ताल की वजह से नियमित दवा नहीं खा पा रहे हैं।

ग्रामीणों को हो रही तकलीफ: मितानिन संघ जिलाध्यक्ष इंदु कावड़े ने कहा मितानिन घर पहुंच सेवा लोगों को देती है। हड़ताल की वजह से पांच दिन में ही कई केस प्रभावित हुए हैं। घर में लोगों को प्रसव दाई के भरोसे कराना पड़ रहा है। कुष्ठ व टीबी मरीज नियमित दवा नहीं ले पा रहे हैं।

कांकेर. हड़ताल में ब्लॉक के गांवों से पहुंची मितानिने और साथ में प्रशिक्षक, और ब्लॉक समन्वयक भी उपस्थित रहे।

पंडरीपनी में घर में ही करना पड़ा प्रसव

मितानिनों का काम गांव की गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल लेकर आना है। हड़ताल की वजह से मितानिन काम नहीं कर रही हैं जिसके चलते ग्राम पंडरीपानी में गर्भवती को अस्पताल ले जाने मदद नहीं मिल पाई तथा सोमवार सुबह 9 बजे घर में ही प्रसव हो गया।

केस-1

दाई से कराना पड़ा प्रसव

भनसुली नयापारा में भी 13 मई को मितानिन के उपलब्ध नहीं होने से गर्भवती को अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो पाया तथा महिला का प्रसव दाई के माध्यम से घर में ही कराना पड़ा।

केस-2

मजबूरी में घर में हुआ प्रसव

इसी तरह ग्राम खैरवाही में 12 मई को घर में एक महिला का प्रसव हुआ। ग्राम मिचेवाड़ा में भी 12 मई को डिलवरी के दो केस थे। मितानिन के हड़ताल की वजह से दोनों परिवारों ने दाई के माध्यम से प्रसव कराया।

केस-3

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