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शहर में पार्षद रखेंगे बाल विवाह पर नजर, दी जाएगी स्पेशल ट्रेनिंग

3 वर्ष पहले
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अप्रैल के 18 तारीख को पड़ रहे अक्षय तृतीया को देखते महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल विवाह रुकवाने कमर कस ली है। पूर्व में इसके लिए विभाग ने अलग अलग गांव स्तर पर 427 टीमें बनाई है। गठित समिति में गांव के पंच से लेकर शिक्षक तक शामिल हैं। इस साल इस मुहिम में नगरीय निकाय के पार्षदों को भी शामिल किया गया है जो अक्षय तृतीया व आने वाले शादी मुहूर्त में बाल विवाह जैसे आयोजनों पर अपनी पैनी नजर रखेंगे।

अंदरूनी इलाकों से बाल विवाह की खबरें आने के कारण विभाग ने जिले में 427 ग्राम पंचायतों में टीम का गठन किया है। इन्हें पिछले साल ही स्पेशल ट्रेनिंग दी गई थी। इस साल मार्च में कांकेर के ही एक वार्ड में नाबालिग की शादी कराने की सूचना मिली थी। जिसे टीम ने समय पर जाकर रोक दिया था। इसके बाद शहर में एसी खबरे आने के चलते अब नगरीय निकाय में भी नाबालिग की शादी रुकवाने टीम तैयार की जा रही है। इसका जिम्मा वार्ड पार्षदों को दिया गया है।

इसके लिए विभाग के साथ पार्षदों की बैठक भी हो चुकी है। जल्द ही उन्हें स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद इस साल से वे भी बाल विवाह को सामने लाएंगे। ये टीम देखरेख दायरे में आने वाले बच्चों पर हो रहे अत्याचार आदि की भी जानकारी जुटा उसे दूर करने अपने ऊपर बैठी टीमों को जानकारी देगी। बाल विवाह की पुष्टि करने व उसे रुकवाने के लिए जो ट्रेनिंग दी जा रही है उसमें तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचना देने के साथ कार्यक्रम के दौरान सामने आने वाले हालातों से शांतिपूर्ण तरीके से निपटने के गुर सिखाए जाएंगे। ट्रेनिंग में वर वधू की उम्र ज्ञात करने तरह तरह के सवाल पूछने तथा संबंधित दस्तावेज जांच करने की जानकारी दी जाएगी। नाबालिग की पुष्टि होने पर दोनों परिवार को शादी रोकने राजी करते इसकी सूचना अपने उच्चाधिकारियों को देने कहा गया है।

मुहिम में पार्षदों को भी जोड़ा गया: जिला बाल संरक्षण अधिकारी रीना लारीया ने बताया बाल विवाह सामाजिक बुराई ही नहीं कानूनी अपराध भी है। इसमें शामिल होने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस साल नगरीय निकाय में समिति बना इसकी जिम्मेदारी पार्षदों को दी गई है। जल्द ही उन्हें इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी।

कांकेर। शहर में समिति की सूचना पर पिछले माह रुकवाया गया बाल विवाह।

जिले में पखांजूर व शहर में कई वार्ड हैं संवेदनशील

जिले में पखांजूर का इलाका बाल विवाह के मामले में काफी संवेदनशील है। यहां से हर साल बाल विवाह के कई मामले सामने आते हैं। इसे रुकवाने में टीम को सफलता भी मिली है। जिला मुख्यालय में विभाग ने बाल विवाह के मामले में अघन नगर वार्ड, एमजी वार्ड, शिव नगर, उदय नगर वार्ड के पिछले हिस्से का क्षेत्र तथा ईमली पारा को चिह्नांकित किया है।

3 सालों में रोकी शादी

साल शादी

2015 3

2016 4

2017 7

2018 अब तक 4

कुल 18

लड़का 21 से कम तो नहीं हो सकती शादी

शादी के लिए लड़के की उम्र 21 वर्ष तथा लड़की की 18 वर्ष है। यदि लड़का 21 साल से कम है तो उसे भी नाबालिग माना जाएगा। स्कूल के दस्तावेज से उम्र की जांच होगी। आशंका होगी तो आयु जांच रेडियोलाजिस्ट से कराई जाएगी। तब तक शादी स्थगित कर दी जाएगी।

बाराती, पंडित व टेंट वालों के खिलाफ होगी एफआईआर

नाबालिग की शादी कराने पर सिर्फ माता पिता या रिश्तेदार ही नहीं बल्कि इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। बाल विवाह प्रतिरोध अधिनियम 2006 के तहत यदि कहीं बाल विवाह की शिकायत जांच में वह सही पाई जाती है तो परिवार के अलावा शादी में शामिल बाराती, शादी संपन्न करने वाला धर्म गुरू, दर्जी, रसोई के अलावा टेंट वाला भी इसका दोषी माना जाएगा।

बाल विवाह रुकवाने ऐसे काम करेगी समिति

गांव स्तर पर गठित समिति में सरपंच, पंच, सचिव, कोटवार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व गांव के शिक्षक को तथा नगरीय निकाय में पार्षदों को शामिल किया गया है। यह समिति बाल विवाह की जानकारी होते ही तत्काल बाल विकास परियोजना अधिकारी, सुपर वाइजर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी बीएमओ, थान प्रभारी, तहसीलदार या सीधे कलेक्टर व एसपी से संपर्क कर इसकी सूचना देगी। विवाह स्थल पर प्रशासन के पहुंचने तक टीम वहीं मौजूद रहेगी।

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