युवाओं को नौकरी नहीं मिली तो खेती की अब सालाना Rs.8 लाख तक कमा रहे हैं
जहां एक ओर युवाओं की पहली पसंद सरकारी नौकरी होती जा रही है तथा यह वर्ग खेती किसानी तथा स्वरोजगार से विमुख होता जा रहा है। इसी बीच बहुत से एसे भी युवा हैं जिन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद सरकारी नौकरी नहीं मिलने पर भटकने के बजाए खेती तथा स्वरोजगार को अपनाया।
ग्राम पुसवाड़ा निवासी ईशुन साहू ने 2004 में बीएससी किया। कुछ वर्षों तक शिक्षाकर्मी बनने प्रयास किया, सफलता नहीं मिली तो भटकने के बजाए गांव में खेती शुरू कर दी। शिक्षित होने का फायदा मिला तथा उन्नत कृषि को अपनाते सब्जी व फल की फसल भी लेने लगे। अपने 10 एकड़ खेत को इतना उन्नत कर लिया की सालाना 8 लाख से अधिक की आमदनी हो जाती है। केला भिलाई तक सप्लाई कर रहे हैं। गर्मी में कलिंदर की फसल से फायदा हो रहा है। ईशुन ने कहा शुरू में कुछ परेशानी हुई लेकिन बाद में जब अच्छी आमदनी होने लगी तो लगा सही निर्णय लिया। युवाओं को संदेश देते कहा सभी नौकरी करना शुरू कर देंगे तो अन्नदाता कौन बनेगा।
जागेश्वर देवांगन ने 1998 में भाषा विज्ञान में एमफिल किया। पीएससी प्रारंभिक में सफलता मिली लेकिन आगे सफलता से चूक गए। कॉलेज में दो वर्ष संविदा में पढ़ाया। फिर स्वरोजगार से जुड़ने का फैसला लिया और पान मसाले की दुकान संभाली। व्यवसाय को बढ़ा जनरल स्टोर भी शुरू किया।
संविदा नौकरी छोड़ शुरू किया फोटो स्टूडियो
ग्राम कोड़ेजुंगा निवासी सुखनंदन जैन 10 वर्ष पहले संविदा में उद्यानिकी विभाग में संविदा में नौकरी कर रहा था। कम वेतन में जीविका यापन में दिक्कत हो रही थी। 2010 में शादी के बाद संविदा नौकरी छोड़ फोटो स्टूडियो खोला।