दहेज के लिए महिला की हत्या के आरोप में कोर्ट ने मृतका के सास-ससुर व पति को उम्रकैद की सजा दी। फैसला अपर सत्र न्यायाधीश नीता गुप्ता ने दिया।
अधिवक्ता दिनेशचंद्र तिवारी ने बताया आशाबाई की शादी हरीश शंकरलाल से फरवरी 2012 में हुई थी। शादी के 2-3 महीने तक आशा को ससुराल वाले ने अच्छे से रखा लेकिन बाद में पति हरीश, सास तेजुबाई, ससुर शंकरलाल आदि ने दहेज में चार लाख रु, दो तोले सोने की चेन, मोटर साइकिल की मांग की। प्रताड़ित करते रहे। आशा ने उसके मायके वालो को बताई तो उसके पिता ने 50 हजार रु. व 20 हजार रु. दो बार दामाद को दिए। 6 फरवरी 2013 को आशा ने दिन में फोन कर उसकी मां को बताया कि ससुराल वाले दहेज के पैसे, चेन, मोटर साइकिल को लेकर मेरे साथ मारपीट कर प्रताड़ित कर रहे हैं। मां ने फोन पर कांटाफोड़ आने का कहा था। उसके बाद उसी दिन शाम को आशा के ससुर शंकरलाल ने आशा के पिता कचरूलाल को फोन कर बताया आशा को हार्टअटैक आया है, तुम जल्दी आ जाओ। आशा के परिवार वाले रात करीब 2 बजे उसके ससुराल कांटाफोड़ पहुंचे। आशा की लाश कमरे में रखकर उस पर चादर ओढ़ा रखी थी। सुबह अंतिम संस्कार के पूर्व आशा के मायके की महिलाओं द्वारा नहलाते समय आशा के गले पर गला घोटने के निशान दिखाई दिए तो उन्होंने परिजन को बताया। परिवार वालों ने कांटाफोड़ जाकर रिपोर्ट की। तत्कालीन एसडीओपी प्रतापसिंह राणावत ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया।
अपर सत्र न्यायाधीश ने सोमवार को आरोपी पति हरीश शंकरलाल, सास तेजुबाई, ससुर शंकरलाल को उम्रकैद एवं 30-30 हजार जुर्माना किया। एक अन्य आरोपी ननद शकुंतला बाई को बरी किया गया।
दहेज हत्या के आरोपी पति व सास-ससुर को उम्रकैद