अध्यात्म की ऊंचाइयों से संपन्न थे महाप्रज्ञ: साध्वी सम्यक प्रभा
आचार्य श्री महाश्रमण की शिष्या साध्वी सम्यक प्रभा के सान्निध्य में सिंधीकेला के जैन तेरापंथ भवन में आचार्य महाप्रज्ञ का नौवां महाप्रयाण दिवस मनाया गया। सिंधीकेला प्रवास के दौरान साध्वी सम्यक प्रभा ने कहा आचार्य अध्यात्म की ऊंचाइयों से संपन्न थे। वे गुणों के भंडार थे, योगी ही नहीं महायोगी थे। वे जनकल्याण हेतु व्यायाम, ध्यान, जीवन विज्ञान, अणुव्रत आदि से विश्वविख्यात हो गए। उनके उपदेश था-रहो भीतर, जियो बाहर। ये उद्गार हर व्यक्ति को जीने का बोध देता है।
साध्वी श्री ने महाप्रज्ञ के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके अवदानों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। साध्वीश्री मलय प्रभा ने बताया की आचार्य महाप्रज्ञ के बाह्य और अभ्यांतर व्यक्तित्व की पहचान दुबला-पतला शरीर, दिव्य ललाट सौम्य मुद्रा अादि हाथों का आशीर्वाद परम आनंद देने वाला था। साथ ही वे विनम्र, समय के पाबंद,, समता, खाद्य संयम, अनासक्ति, गुरुनिष्ठा, आज्ञानिष्ठा आदि गुणों के भंडार थे। इस अवसर पर साध्वी वर्धमान यशाजी ने गीत प्रस्तुत कर महाप्रज्ञ को श्रद्धांजलि अर्पित की। साध्वी श्री जिओ का मंगल भावना समारोह भी मनाया गया। इस अवसर पर साध्वी श्री सम्यक प्रभा जी ने कहा कि साधु-संत एक ही जगह में नहीं रहते क्यों कि जिस तरह पानी एक जगह पर जमा हो जाता है तो उसमें बदबू आती है। बहता हुआ पानी शुद्ध होती है। इसी तरह साधु-संत भी एक जगह से दूसरी जगह विहार करते हैं। स्थानीय सभा अध्यक्ष सुनील जैन, बोर्डा युवक परिषद के अरिहंत जैन, सिंधीकेला और बंगोमुंडा के महिला मंडल व कन्या मंडल आदि ने गीत व विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन ओडिशा प्रांतीय सभा के कार्यवाहक अध्यक्ष छत्रपाल जैन ने किया। अगले दिन साध्वियों का सिंधीकेला से बंगोमुंडा के लिए विहार हुआ, इस दौरान काफी संख्या में श्रावक मौजूद थे।
कांटाबांजी. सिंधीकेला से बंगोमुंडा के लिए निकलीं साध्वियां और साथ में चलते भक्त।