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4 साल से किराए के मकान में चल रही है रोटेदा पुलिस चौकी

3 वर्ष पहले
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स्थानीय पुलिस थाना इलाके में सबसे अधिक संवेदनशील माना जाने वाला क्षेत्र रोटेदा रहा है। यहां लोगों की लंबे समय तक चली मांग के बाद पुलिस चौकी स्वीकृत की गई थी, जो चार साल से किराए के मकान में चल रही है।

इसके चलते स्टाफ परेशान है, वहीं रोटेदा-मंडावरा के बीच चंबल नदी की पुलिया के रास्ते से मादक पदार्थों अौर अवैध गतिविधियों को रोकने में भी पुलिस को चुनौती का सामना करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में पुलिस चौकी के लिए प्रस्ताव भिजवाया गया था। 2014 में चौकी सुचारू रूप से चलने लगी, लेकिन अब तक भवन नहीं बना है। चौकी पर एक हैडकांस्टेबल प्रभारी सहित चार जवान कार्यरत हैं, जो कापरेन मार्ग के किनारे एक किराए के मकान में संचालित है। इन चार जवानों में से भी अक्सर थाने पर बुला लिया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार चौकी का सिर्फ नाम ही है। सामान्य मामलों की शिकायत दर्ज कराने के लिए भी थाने पर जाना पड़ता है। करीब तीन दशक पहले इसे अतिसंवेदनशील क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया है। ग्रामीण बताते हैं कि रोटेदा से मंडावरा होकर मध्यप्रदेश की सीमा नजदीक होने से अवैध गतिविधियों का संचालन और अवैध कार्यों से जुड़े लोगों की इसी रास्ते से आवाजाही रहती है। ऐसे में पुलिस चौकी भवन व पर्याप्त स्टाफ की तैनाती-मुस्तैदी की दरकार है। चौकी पर वायरलेस सेट-वाहन भी नहीं है। चौकी इंचार्ज कैलाशसिंह ने बताया कि भूमि आवंटन के बाद भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भिजवाया गया है।

चौकी के लिए जगह मिली, लेकिन बजट दिया ही नहीं तो भवन भी नहीं बना

रोटेदा से सटा है चंबल अभयारण्य क्षेत्र

चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र भी रोटेदा से सटा हुआ है। अवैध रूप से रेती-बजरी का खनन भी किया जाता है। इस पर रोक व कार्रवाई नहीं हो पाती। अवैध गतिविधियों पर भी प्रतिबंध नहीं लग पाता, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे घड़ियाल अभयारण्य घोषित कर इससे छेड़छाड़ पर पूर्ण प्रतिबंधित किया हुआ है।

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