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सबसे पहले कपूरथला में तैयार होता है खरबूजा, कच्चा ही खरीद लेते हैं व्यापारी

3 वर्ष पहले
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पंजाब, खासकर दोआबा जोन का कपूरथला एरिया खरबूजा उत्पादन में अग्रणी जिले में शुमार है। यहां का खरबूजा क्वालिटी में बेहतर होने के चलते ज्यादा मीठा रहता है। वहीं जिले में इसकी खेती के लिए उपयुक्त जमीन है। यहां की खरबूजा मंडी भी एशिया में अहम मानी जाती है। यह एक ऐसी मंडी है जहां से जम्मू, दिल्ली, कोलकात्ता, चैन्नई और देश के दूसरे राज्यों से व्यापारी कच्ची फसल खरीदने आते हैं। इन दिनों खेतों में खरबूजे की फसल यौबन पर है। मई में खरबूजे की आमद मंडियों में आनी शुरू हो जाएगी। कपूरथला में इस साल 1600 हेक्टेयर जमीन में खरबूजे की काश्त है जोकि दूसरे जिलों के मुकाबले रिकार्ड है। खरबूजा एक ऐसी फसल है जिस पर कीटनाशक दवाईयों का छिड़काव करने की जरूरत नहीं पड़ती। पानी और खाद भी कम देना होता है। अधिकतर खर्च बीज और खुदाई का होता है। तीसरा इसका मंडीकरण आसान है। मंडी में रेट सही मिला तो किसान 30 से 35 हजार रुपए के खर्च में एकड से लाखों कमा लेता है।

जम्मू, दिल्ली, चेन्नई सहित देश के दूसरे हिस्सों के व्यापारी एडवांस में कर लेते हैं बुकिंग सही रेट मिलने पर किसान को एक एकड़ में 35 हजार खर्च कर लाखों का मुनाफा

आलू की फसल के बाद होती है खरबूजे की बिजाई

कपूरथला आैर जालंधर जिलों में आम तौर पर आलू की खेती अधिक होती है। अक्टूबर-नवंबर में आलू की फसल की बिजाई की जाती है। आलू की फसल की खुदाई फरवरी में हो जाती है। किसान आलू की फसल की खुदाई के बाद खाली हुए खेतों में खरबूजे की बिजाई करते हैं। किसान अवतार सिंह सैदोवाल ने बताया कि खरबूजा की हाइब्रिड किस्मों में मधु 149, केसर, फार्म ग्लोरी की बिजाई इस बार अधिक की गई है।

मंड क्षेत्र ज्यादा उपयुक्त...जिले में आलू और खरबूजा दोनां क्षेत्र में होता है। लेकिन मंड क्षेत्र की जमीन भी इसके लिए उपयुक्त है जिसके चलते यहां के किसान भी खरबूजे की बिजाई करने लगे हैं। खरबूजा की फसल पर 25 से 30 हजार रुपए तक का खर्च आता है। कच्ची फसल में किसान को अधिक लाभ है।

मई से खरबूजों से महकने लगेगी मंडी, व्यापारियों का लगेगा मेला

पंजाब में कपूरथला क्षेत्र में सबसे अधिक क्षेत्रफल में खरबुज़ा की बिजाई की जाती है। जिस कारण इस क्षेत्र में से ही फ़सल का सबसे अधिक उत्पादन होता है। मई से कपूरथला की खरबुज़ा मंडी की रौणक शुरू हो जाती है। जुलाई तक ऐसा ही हाल रहता है। मंडी में जम्मू, दिल्ली, कोलकत्ता, चेनई और देश के दूसरे राज्यों से व्यापारी कच्ची फ़सल खरीद कर ले जाते हैं। फ़सल खरीदने वाले व्यापारी फ़सल का उत्पादन शुरू होने से 15 दिनों पहले ही जहां आ जाते है। किसानों को अडवांस दे कर फ़सल बुक कर लेते हैं। किसान पक्की फ़सल को लोकल मंडी मे बेचते है।

यह है यूनिवर्सिटी की सिफारिश...पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना की तरफ से किसानों के लिए खरबूजे की पंजाब हाइब्रिड, पंजाब सुनहरी, हरा मधु किस्मों की बिजाई की सलाह है।

विशेषज्ञ की सलाह

बिजाई के फौरन बाद लगाएं पानी: डॉ. शर्मा

कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग निर्देशक डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि खरबूजा की बिजाई के लिए हलकी जमीन अच्छी मानीं जाती है। एक एकड़ के लिए खरबूजे का 400 ग्राम बीज काफी होता है। बीज को खालें बनाकर लाइनों में लगाना चाहिए। खरबूजे की फसल को 110 किलो यूरिया, 25 किलो फासफोरस, 25 किलो पोटाश खादों का प्रयोग करना चाहिए। फसल को बिजाई से फौरन बाद पानी लगाना जरूरी है। फसल बिजाई से 60 से 80 दिन बाद तैयार हो जाती है।

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