सत्संग के दौरान शामिल संगत। -भास्कर
कपूरथला| दिव्या ज्योति जागृति संस्थान शेखूपुरा आश्रम में सत्संग करवाया गया, जिसमें सर्वश्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी भरत ने अपने प्रवचनों में कहा कि मानव तन परमात्मा की भक्ति के लिए मिला है। चौरासी के चक्कर से मुक्त होने लिए मिला है। दुर्लभता से मिले इस मानव तन का वास्तविक उपयोग है आत्मकल्याण, अशक्ति, माया आदि के बंधनों से इसे मुक्त कर इसमें स्थित आत्मा को परमात्मा से मिलाना। लेकिन जब इंसान भवजाल में फंसकर इसकी सार्थकता को सिद्ध किए बिना ही इस संसार से चला जाता है तो नि:संदेह उसका जीवन व्यर्थ हो जाता है। अंत अविनाशी को पाने का तो एक ही शास्त्र सम्मत मार्ग है। जिस मार्ग को अनुसरण सभी महापुरुषों ने किया। मार्ग एक ही है, अनेक नहीं, क्योंकि यदि अंधकार को पार करना है तो प्रकाश ही एक मात्र साधन है। अज्ञान का नाश ज्ञान के द्वारा ही संभव है। साध्वी अपाला भारती ने मधुर भजनों से संगतों को मंत्रमुग्ध किया।