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को-ऑपरेटिव बैंक में 700 लोगों के आधार कार्ड न आने से जिले के 2177 किसानों की कर्ज माफी में हो रही देरी

3 वर्ष पहले
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जिले में अब तक दो-ढाई एकड़ से कम के 2754 किसानों की को-ऑपरेटिव सोसायटियों का 17 करोड़ 81 लाख रुपए कर्ज माफ हो चुका है। इतना ही और कर्ज माफ करने की तैयारी हो रही है। को-ऑपरेटिव बैंक ने 2177 किसानों की एक और सूची तैयार की है, जिनका 20 करोड़ 40 लाख रुपए माफ होना है। इसके अलावा एक अन्य बैंक भी अपनी सूची तैयार करने में जुटे हुए हैं। ज्यादातर लोगों के आधार कार्ड न पहुंचने से लिस्ट को अंतिम रुप देने में समय लग रहा है। अकेले को-ऑपरेटिव बैंक को ही करीब 700 लोगों के आधार कार्ड आने का इंतजार है। वहीं, कर्ज माफी के चक्कर में बैंकों की रिकवरी भी नहीं हो पा रही है। जिले में अकेली खेतीबाड़ी विकास बैंक के ही 1200 किसानों की 44 करोड़ रुपए की रिकवरी पेंडिंग है। बैंक अधिकारी कर्ज रिकवरी में जुटे हुए हैं।

2754 किसानों का 17 करोड़ का कर्ज हो चुका है माफ, 2177 किसानों का 20 करोड़ रुपए कर्ज माफी करने की तैयारी में बैंक

पहले चरण में को-ऑपरेटिव बैंक ने ढाई एकड़ से कम के 3800 किसानों की पहचान की थी। इनमें से 2754 किसानों का कर्ज माफ हो चुका है जबकि अन्य किसान वो हैं, जिनमें कई विदेश जा चुके है, किसी की मौत हो चुकी है और किसी का कर्ज माफ होने में बाहर हो गया है। कई किसान ऐसे भी हैं, जिनके आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बैंक को नहीं पहुंचे हैं।

पहला चरण : कर्ज माफी के लिए 3800 की पहचान

दूसरा चरण : जिले के 2177 किसानों की हुई पहचान

कोआपरेटिव बैंक के डीएम राजीव शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले से कोआपरेटिव सोसायटियों का ढाई एकड़ तक के 2177 किसानों का कर्ज माफी के लिए चयन किया गया है। इन किसानों का 20 करोड़ 40 लाख रुपए का कर्ज माफ होगा। बैंक के पास अभी भी कई किसानों के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज नहीं पहुंचे हैं। करीब 700 किसानों ने अभी तक अपने आधार कार्ड जमा नहीं करवाए हैं।

1200 किसानों की 44 करोड़ रुपए की रिकवरी पेंडिंग

कर्ज रिकवरी सभी बैंक के लिए मुश्किल बन रही है। अकेली खेतीबाड़ी विकास बैंक के ही 1200 किसानों की 44 करोड़ रुपए की रिकवरी पेंडिंग हैं। खेतीबाड़ी विकास बैंक के मैनेजर गुरप्रेम सिंह ने कहा कि कर्ज वसूली शुरू हो गई है। पूर्व ट्रांसपोर्ट मंत्री रघबीर सिंह ने 90 लाख रुपए से 5 लाख रुपए जमा करवा दिए हैं। कई और भी डिफॉल्टर अपना कर्ज जमा करवा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि रिकवरी का टारगेट पूरा हो जाएगा।

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