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कोर्ट ने साफ किया-सोमा पर नहीं, एनएच पर लगाई थी लाडोवाल टोल प्लाजा पर टैक्स वसूलने की रोक

3 वर्ष पहले
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ह्यूमन राइट्स प्रेस क्लब की ओर से स्थाई लोक अदालत में कुछ महीने पहले दायर पिटीशन के हाई प्रोफाइल हुए मामले में शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद केस तकनीकी रोचकता की तरफ जाता दिखा। केस में 14 पार्टियों में से पेश हुई 12 पार्टियों में एक तरफ लाडोवाल टोल प्लाजा की फर्म सोमा आइसोलक्स केस में पार्टी बनने के लिए कोशिश करता रहा लेकिन पिटीशनर के वकील मानित मल्होत्रा ने अपनी दलीलों से दाखिल नहीं होने दिया। अदालत ने शुक्रवार के जिमनी आर्डर में स्पष्ट किया कि उन्होंने 17 अप्रैल को दिए जिमनी ऑर्डरों में एनएच की ओर से टैक्स वसूली पर रोक लगाई थी, सोमा आइसोलक्स पर नहीं। आदेशों के बाद कानूनी माहिरों का मानना है कि इसका सीधा असर सोमा की ओर से हाईकोर्ट में दायर अपील पर भी पड़ सकता है। केस में अभी तक एनएच और सोमा अपना तकनीकी रिलेशन ही स्पष्ट नहीं कर सका है। केस की अगली सुनवाई 4 जून को होगी।

बता दें कि स्थाई लोक अदालत में दायर पिटीशन के मामले में पटिशनकर्ता की ओर से कब्जों में कई विभागों को जिम्मेदार ठहराते हुए जिला प्रशासन से हाईवे के साथ लगते 72 गांवों के छजरा प्लान मंगवाने की अपील की थी। 4 मई को हुई केस की सुनवाई में रेवेन्यू विभाग के संबंधित पटवारी ने अदालत की सख्ती के बाद शाम 4 बजे चहेड़ू और महेड़ू गांवों का छजरा दाखिल कर दिया। सूत्रों का मानना है कि छजरे की जांच में रेवेन्यू रास्ते और कई सरकारी जमीनों जैसे छप्पड़, शामलाट और श्मशानघाट की जमीनों की वास्तविक स्थिति जाहिर हो जाएगी।स्थाई लोक अदालत में हाई प्रोफाइल केस की सुनवाई में लाडोवाल टोल प्लाजा की फर्म सोमा ने पार्टी बनने के लिए कोशिश की। पिटीशनर के वकील की दलील थी कि केस में एनएच पार्टी है और सोमा और एनएच का तकनीकी संबंध अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। दोनों पार्टियों के बीच हुआ एग्रीमेंट अभी तक अदालत में पेश नहीं हुआ है। इसलिए इनका पार्टी बनना उचित नहीं है।

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