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सजायाफ्ता सीताराम जेल से छूटते ही की ठगी, दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कर ले गई

3 वर्ष पहले
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आरोपी सीताराम मंडल को ले जाती पुलिस।

साइबर क्राइम में झारखंड का पहला सजायाफ्ता है सीताराम मंडल

सीताराम मंडल साइबर अपराध के माध्यम से मनी ट्रांजेक्शन के मामले में झारखंड में पहला सजायाफ्ता अपराधी है। उसे गत 17 जनवरी को सीजेएम जामताड़ा की अदालत से डेढ वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई थी। उल्लेखनीय है कि न्यायालय से सजा मिलने के बाद भी सीताराम के व्यवहार में सुधार नहीं हुआ और उसने धोखाधड़ी का काम नहीं छोड़ा। दिल्ली पुलिस के अनुसार यह प्राथमिकी 13 मार्च 2018 काे दर्ज किया गया है।

सजायाफ्ता साइबर अपराधी सीताराम मंडल को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार को ट्रांजिट रिमांड पर अपने साथ दिल्ली ले गई है। मंगल कुजूर, थाना प्रभारी, करमाटांड़ थाना।

साइबर गुरु के नाम से है चर्चित, करोड़ों की है संपत्ति

सीताराम क्षेत्र के साईबर ठगों के बीच गुरु के नाम से चर्चित है। मैट्रिक पास के पास करोड़ों रुपए की संपत्ती है। सीताराम ने ठगी के रुपए ने एक ओर जहां भव्य मकान बनाया है। पहली बार सीताराम ड्रोन कैमरा से पकड़ में आया था। पूर्व एसपी के समय जिले में ड्रोन कैमरा से निगरानी की जा रही थी। जिसमें उसे गांव में युवकों को साइबर अपराध के टिप्स दिए जा रहे थे। कैमरा में आने के बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाया और अपनी गिरफ्त में लिया था। सीताराम के खिलाफ विभिन्न राज्यों में साइबर अपराध के मामले दर्ज है। जानकार बताते हैं कि उसके खिलाफ दिल्ली, कानपुर, बंगलौर, मुम्बई, पूने, हजारीबाग, धनबाद, नोयडा थाना में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। बताया जाता है कि अपने गांव के युवाओं को भी प्रशिक्षण देता है। इसके अलावे अपने ससुराल धनबाद के टुंडी में लोगों को साइबर अपराध का ट्रेनिंग दिया करता था। अब तक लगभग 300 से अधिक लोगों को साइबर अपराध का गुण सीखा चुका है।

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