भास्कर न्यूज | करणपुर (करौली)
अाजादी के 70 साल बाद भी डांग क्षेत्र के लोगों को अपनी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की जब मांग करते हैं तो वन विभाग का अडंगा बताकर सुविधाएं बंद कर दी जाती हैं। डांग क्षेत्र के लोगों ने एकजुटता की ताकत दिखाकर रविवार को निभैरा बस स्टैंड पर संत गणेशानंद महाराज (महन्त श्यामपुर) के नेतृत्व में करीब 70 गांवों के पंच-पटेलों की बैठक हुई। जिसमें कई वक्ताओं ने जोशीले अंदाज में भाषण देकर जब तक बिजली, पानी और सडक जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी,तब तक आमजन के हित में संघर्ष की लडाई लड़ने का आह्वान किया।
बैठक मे निर्णय हुआ कि सोमवार को एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देगा। ज्ञापन में सुविधाओं काे लेकर मांगें शीघ्र पूरी नहीं होने पर मजबूरन आंदोलन करने की चेतावनी भी दी जाएगी। इस मौके पर रूपसिह गुर्जर खिजूरा, मरमदा के सुमेर गुर्जर, मुरारी सरपंच करणपुर,दौलतपुरा के रामलखन गुर्जर,निभैरा के भरत लाल शर्मा,सुरेश तिवाडी,नारायण सिह,बालमुकंद गुप्ता,मानव अधिकार कार्यकर्ता जीतेन्द्र भूषण करौली, रामसिह, केदार, रमेश मीना, रिषी शर्मा आदि मौजूद रहे। वहीं करणपुर पुलिस ने भी बैठक पर निगरानी रखी।
दैनिक भास्कर ने उठाया था मामला
दैनिक भास्कर ने करणपुर डांग क्षेत्र की निभैरा, राहिर, दौलतपुरा, वहादुरपुर ग्राम पंचायतों के बारे में कई बार मामला उठाया था कि डांग क्षेत्र के करीब 70 गांव एेसे हैं, जहां बिजली, पानी, चिकित्सा, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। यहां बच्चों के हाथ पीले नहीं हो रहे हैं। यह खबर दैनिक भास्कर ने 29 जनवरी 2018 को प्रमुखता से प्रकाशित की थी। उसके बाद लोगों ने एकजुटता दिखाना शुरू कर दिया है।
एकजुटता दिखाने का आह्वान
मानव अधिकार कार्यकर्ता जीतेन्द्र भूषण करौली ने कहा कि लोक कल्याणकारी राज में पहली प्राथमिकता रोटी, कपडा, मकान, अस्पताल, सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधा नहीं है। विस्थापन एेसा कानून है कि आप जहां चाहे वहां रह सकते हो, तुम अपनी मर्जी के मालिक हो। कोई बिना स्वेच्छा के नहीं हटा सकता है, जनता की ताकत सरकार को दिखाएंगे खिजूरा के रूपसिह गुर्जर ने कहा कि डांग में कोई बदमाश आ जाए तो सूचना देने को मोबाइल टाबर नहीं हैं। सड़क नहीं होने के कारण महिलाओं को चारपाई पर रखकर उपचार के लिए अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। चिमनी की रोशनी में ही बच्चे पढई करते हैं। वहीं रामलखन दौलतपुरा ने कहा कि विस्थापित गांव हो या न हो उनको सरकार पहले सुविधाएं उपलब्ध कराए।
इन गांवों के लोग सुविधाओं से महरूम
करणपुर डांग क्षेत्र के निभैरा, वीरमकी, मरमदा, पाटौर, भोपारा, आशाकी, मोरोची, मूलापुरा, रायबेली, खिजूरा, लडेकी डगरिया, झीलकापुरा, बंधनकापुरा, भट्टीपुरा, दौलतपुरा, वहरदा, चौडियाखाता, रावतपुरा, रसीलपुर, डंगरा, चौडक्याकलां, रतनूपुरा, चौडक्याखुर्द, धोधाकी, पातीपुरा, पहाडपुरा, मातोरियाकी, कल्याणपुरा, नैनियाकी, हरीकी, पुलनकीढाणी, गसीनपुरा, आमरेकी, कूरतकी, सोनपुरा, रायवेली, सैमरी, चोवेकी, अलबतकी, ठेकला झोपडी, माडीभाट, पुलनकी, राहिर, बनीजरा, दयारामपुरा, बामूदा, मानिकपुरा, पाटौरन, बहादुरपुर, चूरियाकी, धांधूरेत, रायबेलीमथुरेकी, चरीकाहार, आरामपुरा, कलारीपुरा, चैनापुरा, विसूरी, माणिकपुरा, बिजोदेकी गुआडी, बीचकापुरा, घेरकापुरा, गोदरघूरा, लखरूकी, खातेकी, नरेकी, दौलतिया, बरकी, हटियाकी, बंगलाकी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
करणपुर. निभैरा बस स्टैंड पर हुई 70 गांवों की बैठक में रणनीति बनाते पंच पटेल।
क्याें नहीं दे रहे गांवों में सुविधाएं
बिजली व सड़क से लिए जब भी गांवों में किसी ने प्रयास किया तो उन्हें वन विभाग का अडंगा बताकर कार्य शुरु नहीं हो पाता है। रामसिह गुर्जर ने कहा कि वन विभाग खुद कैलादेवी अभयारण्य में सरकारी कार्यालयों व चारदीवारी बनाता है। तब बजरी व पत्थर लगाने में वन विभाग का अडंगा क्यों नहीं लगता है, उनको नियम कानून क्यों नहीं बनते है। गौरतलब है किकैलादेवी वन अभ्यारण्य क्षेत्र में आ रहे हैं करीब 70 गांव-ढाणियो में वन विभाग जंगल में बसे हुए गांवों में बिजली के तार गुजरने की अनुमति नहीं दे रहा है। हांलाकि एक बार कैलादेवी से करणपुर के बीच वर्षों पहले विद्युत लाइन आने की तैयारी हुई,,लेकिन वन विभाग की वजह वह आस भी अधूरी रह गई, यही हाल सड़क का है।
भास्कर न्यूज | करणपुर (करौली)
अाजादी के 70 साल बाद भी डांग क्षेत्र के लोगों को अपनी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की जब मांग करते हैं तो वन विभाग का अडंगा बताकर सुविधाएं बंद कर दी जाती हैं। डांग क्षेत्र के लोगों ने एकजुटता की ताकत दिखाकर रविवार को निभैरा बस स्टैंड पर संत गणेशानंद महाराज (महन्त श्यामपुर) के नेतृत्व में करीब 70 गांवों के पंच-पटेलों की बैठक हुई। जिसमें कई वक्ताओं ने जोशीले अंदाज में भाषण देकर जब तक बिजली, पानी और सडक जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी,तब तक आमजन के हित में संघर्ष की लडाई लड़ने का आह्वान किया।
बैठक मे निर्णय हुआ कि सोमवार को एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देगा। ज्ञापन में सुविधाओं काे लेकर मांगें शीघ्र पूरी नहीं होने पर मजबूरन आंदोलन करने की चेतावनी भी दी जाएगी। इस मौके पर रूपसिह गुर्जर खिजूरा, मरमदा के सुमेर गुर्जर, मुरारी सरपंच करणपुर,दौलतपुरा के रामलखन गुर्जर,निभैरा के भरत लाल शर्मा,सुरेश तिवाडी,नारायण सिह,बालमुकंद गुप्ता,मानव अधिकार कार्यकर्ता जीतेन्द्र भूषण करौली, रामसिह, केदार, रमेश मीना, रिषी शर्मा आदि मौजूद रहे। वहीं करणपुर पुलिस ने भी बैठक पर निगरानी रखी।
दैनिक भास्कर ने उठाया था मामला
दैनिक भास्कर ने करणपुर डांग क्षेत्र की निभैरा, राहिर, दौलतपुरा, वहादुरपुर ग्राम पंचायतों के बारे में कई बार मामला उठाया था कि डांग क्षेत्र के करीब 70 गांव एेसे हैं, जहां बिजली, पानी, चिकित्सा, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। यहां बच्चों के हाथ पीले नहीं हो रहे हैं। यह खबर दैनिक भास्कर ने 29 जनवरी 2018 को प्रमुखता से प्रकाशित की थी। उसके बाद लोगों ने एकजुटता दिखाना शुरू कर दिया है।
एकजुटता दिखाने का आह्वान
मानव अधिकार कार्यकर्ता जीतेन्द्र भूषण करौली ने कहा कि लोक कल्याणकारी राज में पहली प्राथमिकता रोटी, कपडा, मकान, अस्पताल, सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधा नहीं है। विस्थापन एेसा कानून है कि आप जहां चाहे वहां रह सकते हो, तुम अपनी मर्जी के मालिक हो। कोई बिना स्वेच्छा के नहीं हटा सकता है, जनता की ताकत सरकार को दिखाएंगे खिजूरा के रूपसिह गुर्जर ने कहा कि डांग में कोई बदमाश आ जाए तो सूचना देने को मोबाइल टाबर नहीं हैं। सड़क नहीं होने के कारण महिलाओं को चारपाई पर रखकर उपचार के लिए अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। चिमनी की रोशनी में ही बच्चे पढई करते हैं। वहीं रामलखन दौलतपुरा ने कहा कि विस्थापित गांव हो या न हो उनको सरकार पहले सुविधाएं उपलब्ध कराए।
इन गांवों के लोग सुविधाओं से महरूम
करणपुर डांग क्षेत्र के निभैरा, वीरमकी, मरमदा, पाटौर, भोपारा, आशाकी, मोरोची, मूलापुरा, रायबेली, खिजूरा, लडेकी डगरिया, झीलकापुरा, बंधनकापुरा, भट्टीपुरा, दौलतपुरा, वहरदा, चौडियाखाता, रावतपुरा, रसीलपुर, डंगरा, चौडक्याकलां, रतनूपुरा, चौडक्याखुर्द, धोधाकी, पातीपुरा, पहाडपुरा, मातोरियाकी, कल्याणपुरा, नैनियाकी, हरीकी, पुलनकीढाणी, गसीनपुरा, आमरेकी, कूरतकी, सोनपुरा, रायवेली, सैमरी, चोवेकी, अलबतकी, ठेकला झोपडी, माडीभाट, पुलनकी, राहिर, बनीजरा, दयारामपुरा, बामूदा, मानिकपुरा, पाटौरन, बहादुरपुर, चूरियाकी, धांधूरेत, रायबेलीमथुरेकी, चरीकाहार, आरामपुरा, कलारीपुरा, चैनापुरा, विसूरी, माणिकपुरा, बिजोदेकी गुआडी, बीचकापुरा, घेरकापुरा, गोदरघूरा, लखरूकी, खातेकी, नरेकी, दौलतिया, बरकी, हटियाकी, बंगलाकी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
भास्कर न्यूज | करणपुर (करौली)
अाजादी के 70 साल बाद भी डांग क्षेत्र के लोगों को अपनी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की जब मांग करते हैं तो वन विभाग का अडंगा बताकर सुविधाएं बंद कर दी जाती हैं। डांग क्षेत्र के लोगों ने एकजुटता की ताकत दिखाकर रविवार को निभैरा बस स्टैंड पर संत गणेशानंद महाराज (महन्त श्यामपुर) के नेतृत्व में करीब 70 गांवों के पंच-पटेलों की बैठक हुई। जिसमें कई वक्ताओं ने जोशीले अंदाज में भाषण देकर जब तक बिजली, पानी और सडक जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी,तब तक आमजन के हित में संघर्ष की लडाई लड़ने का आह्वान किया।
बैठक मे निर्णय हुआ कि सोमवार को एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देगा। ज्ञापन में सुविधाओं काे लेकर मांगें शीघ्र पूरी नहीं होने पर मजबूरन आंदोलन करने की चेतावनी भी दी जाएगी। इस मौके पर रूपसिह गुर्जर खिजूरा, मरमदा के सुमेर गुर्जर, मुरारी सरपंच करणपुर,दौलतपुरा के रामलखन गुर्जर,निभैरा के भरत लाल शर्मा,सुरेश तिवाडी,नारायण सिह,बालमुकंद गुप्ता,मानव अधिकार कार्यकर्ता जीतेन्द्र भूषण करौली, रामसिह, केदार, रमेश मीना, रिषी शर्मा आदि मौजूद रहे। वहीं करणपुर पुलिस ने भी बैठक पर निगरानी रखी।
दैनिक भास्कर ने उठाया था मामला
दैनिक भास्कर ने करणपुर डांग क्षेत्र की निभैरा, राहिर, दौलतपुरा, वहादुरपुर ग्राम पंचायतों के बारे में कई बार मामला उठाया था कि डांग क्षेत्र के करीब 70 गांव एेसे हैं, जहां बिजली, पानी, चिकित्सा, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। यहां बच्चों के हाथ पीले नहीं हो रहे हैं। यह खबर दैनिक भास्कर ने 29 जनवरी 2018 को प्रमुखता से प्रकाशित की थी। उसके बाद लोगों ने एकजुटता दिखाना शुरू कर दिया है।
एकजुटता दिखाने का आह्वान
मानव अधिकार कार्यकर्ता जीतेन्द्र भूषण करौली ने कहा कि लोक कल्याणकारी राज में पहली प्राथमिकता रोटी, कपडा, मकान, अस्पताल, सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधा नहीं है। विस्थापन एेसा कानून है कि आप जहां चाहे वहां रह सकते हो, तुम अपनी मर्जी के मालिक हो। कोई बिना स्वेच्छा के नहीं हटा सकता है, जनता की ताकत सरकार को दिखाएंगे खिजूरा के रूपसिह गुर्जर ने कहा कि डांग में कोई बदमाश आ जाए तो सूचना देने को मोबाइल टाबर नहीं हैं। सड़क नहीं होने के कारण महिलाओं को चारपाई पर रखकर उपचार के लिए अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। चिमनी की रोशनी में ही बच्चे पढई करते हैं। वहीं रामलखन दौलतपुरा ने कहा कि विस्थापित गांव हो या न हो उनको सरकार पहले सुविधाएं उपलब्ध कराए।
इन गांवों के लोग सुविधाओं से महरूम
करणपुर डांग क्षेत्र के निभैरा, वीरमकी, मरमदा, पाटौर, भोपारा, आशाकी, मोरोची, मूलापुरा, रायबेली, खिजूरा, लडेकी डगरिया, झीलकापुरा, बंधनकापुरा, भट्टीपुरा, दौलतपुरा, वहरदा, चौडियाखाता, रावतपुरा, रसीलपुर, डंगरा, चौडक्याकलां, रतनूपुरा, चौडक्याखुर्द, धोधाकी, पातीपुरा, पहाडपुरा, मातोरियाकी, कल्याणपुरा, नैनियाकी, हरीकी, पुलनकीढाणी, गसीनपुरा, आमरेकी, कूरतकी, सोनपुरा, रायवेली, सैमरी, चोवेकी, अलबतकी, ठेकला झोपडी, माडीभाट, पुलनकी, राहिर, बनीजरा, दयारामपुरा, बामूदा, मानिकपुरा, पाटौरन, बहादुरपुर, चूरियाकी, धांधूरेत, रायबेलीमथुरेकी, चरीकाहार, आरामपुरा, कलारीपुरा, चैनापुरा, विसूरी, माणिकपुरा, बिजोदेकी गुआडी, बीचकापुरा, घेरकापुरा, गोदरघूरा, लखरूकी, खातेकी, नरेकी, दौलतिया, बरकी, हटियाकी, बंगलाकी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
भास्कर न्यूज | करणपुर (करौली)
अाजादी के 70 साल बाद भी डांग क्षेत्र के लोगों को अपनी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की जब मांग करते हैं तो वन विभाग का अडंगा बताकर सुविधाएं बंद कर दी जाती हैं। डांग क्षेत्र के लोगों ने एकजुटता की ताकत दिखाकर रविवार को निभैरा बस स्टैंड पर संत गणेशानंद महाराज (महन्त श्यामपुर) के नेतृत्व में करीब 70 गांवों के पंच-पटेलों की बैठक हुई। जिसमें कई वक्ताओं ने जोशीले अंदाज में भाषण देकर जब तक बिजली, पानी और सडक जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी,तब तक आमजन के हित में संघर्ष की लडाई लड़ने का आह्वान किया।
बैठक मे निर्णय हुआ कि सोमवार को एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देगा। ज्ञापन में सुविधाओं काे लेकर मांगें शीघ्र पूरी नहीं होने पर मजबूरन आंदोलन करने की चेतावनी भी दी जाएगी। इस मौके पर रूपसिह गुर्जर खिजूरा, मरमदा के सुमेर गुर्जर, मुरारी सरपंच करणपुर,दौलतपुरा के रामलखन गुर्जर,निभैरा के भरत लाल शर्मा,सुरेश तिवाडी,नारायण सिह,बालमुकंद गुप्ता,मानव अधिकार कार्यकर्ता जीतेन्द्र भूषण करौली, रामसिह, केदार, रमेश मीना, रिषी शर्मा आदि मौजूद रहे। वहीं करणपुर पुलिस ने भी बैठक पर निगरानी रखी।
दैनिक भास्कर ने उठाया था मामला
दैनिक भास्कर ने करणपुर डांग क्षेत्र की निभैरा, राहिर, दौलतपुरा, वहादुरपुर ग्राम पंचायतों के बारे में कई बार मामला उठाया था कि डांग क्षेत्र के करीब 70 गांव एेसे हैं, जहां बिजली, पानी, चिकित्सा, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। यहां बच्चों के हाथ पीले नहीं हो रहे हैं। यह खबर दैनिक भास्कर ने 29 जनवरी 2018 को प्रमुखता से प्रकाशित की थी। उसके बाद लोगों ने एकजुटता दिखाना शुरू कर दिया है।
एकजुटता दिखाने का आह्वान
मानव अधिकार कार्यकर्ता जीतेन्द्र भूषण करौली ने कहा कि लोक कल्याणकारी राज में पहली प्राथमिकता रोटी, कपडा, मकान, अस्पताल, सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधा नहीं है। विस्थापन एेसा कानून है कि आप जहां चाहे वहां रह सकते हो, तुम अपनी मर्जी के मालिक हो। कोई बिना स्वेच्छा के नहीं हटा सकता है, जनता की ताकत सरकार को दिखाएंगे खिजूरा के रूपसिह गुर्जर ने कहा कि डांग में कोई बदमाश आ जाए तो सूचना देने को मोबाइल टाबर नहीं हैं। सड़क नहीं होने के कारण महिलाओं को चारपाई पर रखकर उपचार के लिए अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। चिमनी की रोशनी में ही बच्चे पढई करते हैं। वहीं रामलखन दौलतपुरा ने कहा कि विस्थापित गांव हो या न हो उनको सरकार पहले सुविधाएं उपलब्ध कराए।
इन गांवों के लोग सुविधाओं से महरूम
करणपुर डांग क्षेत्र के निभैरा, वीरमकी, मरमदा, पाटौर, भोपारा, आशाकी, मोरोची, मूलापुरा, रायबेली, खिजूरा, लडेकी डगरिया, झीलकापुरा, बंधनकापुरा, भट्टीपुरा, दौलतपुरा, वहरदा, चौडियाखाता, रावतपुरा, रसीलपुर, डंगरा, चौडक्याकलां, रतनूपुरा, चौडक्याखुर्द, धोधाकी, पातीपुरा, पहाडपुरा, मातोरियाकी, कल्याणपुरा, नैनियाकी, हरीकी, पुलनकीढाणी, गसीनपुरा, आमरेकी, कूरतकी, सोनपुरा, रायवेली, सैमरी, चोवेकी, अलबतकी, ठेकला झोपडी, माडीभाट, पुलनकी, राहिर, बनीजरा, दयारामपुरा, बामूदा, मानिकपुरा, पाटौरन, बहादुरपुर, चूरियाकी, धांधूरेत, रायबेलीमथुरेकी, चरीकाहार, आरामपुरा, कलारीपुरा, चैनापुरा, विसूरी, माणिकपुरा, बिजोदेकी गुआडी, बीचकापुरा, घेरकापुरा, गोदरघूरा, लखरूकी, खातेकी, नरेकी, दौलतिया, बरकी, हटियाकी, बंगलाकी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।