पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • बीमारी में पैर खोया, हौसला नहीं, अब है कुशल कारीगर

बीमारी में पैर खोया, हौसला नहीं, अब है कुशल कारीगर

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बचपन में बीमारी से लड़ते हुए इलाज के दौरान सोमेश्वर का पैर खराब हो गया। पैर से लाचार सोमेश्वर ने किसी तरह दसवीं तक की शिक्षा और मजदूरी साथ-साथ की। अब चायना मोजेक के कारीगर का काम दक्षता से सीख लिया है। उसी के बूते बूढ़े माता-पिता और परिवार का गुजर-बसर कर रहा है।

यह कहानी है, गंधवापाल के रंगोत फला निवासी सोमेश्वर पुत्र मोगजी रंगोत की। बात तब की है जब वह 12 साल का था और खेलने कूदने के दौरान बीमार हो गया। इलाज के दौरान लगे किसी इंजेक्शन के कारण एक पैर सुन्न हो गया और बाद में लाख इलाज के बाद भी वह ठीक नहीं हो सका। इसके बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी। एक ओर दसवीं तक की पढ़ाई की और दूसरी तरफ मजदूरी का काम करने लगा। इसके बाद उसे पता चला कि चायना मोजिक के काम में ज्यादा चलना फिरना नहीं पड़ता और उसके कारीगर कम ही मिलते हैं। यह वह काम होता है जो बारिश में छतों से होने वाले पानी के रिसाव को रोकने के लिए बतौर ट्रीटमेंट कराया जाता है। सोमेश्वर ने यह काम सीख लिया। अब वह अहमदाबाद में इसी काम में महारत हासिल कारीगरों में शुमार है। इससे होने वाले कमाई से वृद्ध माता-पिता, दिव्यांग प|ी सुरता और दो बच्चे सभी की बेहतर गुजर बसर हो रही है। खास बात यह है कि प|ी भी स्नातक तक पढ़ी होने से बच्चों को पढ़ाकर योग्य बनाने में व्यस्त है।

छतों में घरों में रिसने वाले बारिश के पानी को रोकने में महारत है

अमदाबाद में चार से पांच मंजिला भवनों में बैसाखियों से चढ़ता है सोमेश्वर...

हालांकि सोमेश्वर को सरकारी सहायता के रूप में पेंशन मिल रही है। उसने बताया कि गुजरात के अहमदाबाद शहर में चार से पांच मंजिला इमारतों में बैसाखी के सहारे चढ़कर अपने हुनर का प्रयोग कर छतों पर चायना मौजिक कार्य करके अपने परिवार का भरण पोषण करने वाला दिव्यांग सोमेश्वर बताता है कि रोजाना मजदूरी में करीब पांच सौ रुपए कमा लेता हूं। अपने बुलंद हौसले भरे अंदाज में कहा कि जीवन में हार मान लेने से कुछ नहीं होगा। अपने अंदर हुनर होना चाहिए कोई भी काम मुश्किल नहीं है। इन दिनों शादियों की सीजन में घर पर होने से पास के करावाड़ा गांव में काम कर रहा है।

खबरें और भी हैं...