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कुपोषित बच्चों को घी- दूध के लिए माताओं को 15 दिन में पैसे नहीं मिले तो करेंगे भूख हड़ताल

3 वर्ष पहले
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प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कराहल में आयोजित कुपोषण के विरुद्घ जंग कार्यक्रम में सरकार की तरफ से कुपोषित बच्चों की मां को हर महीने एक हजार रुपए देने की घोषणा की थी। लेकिन पांच महीने बीतने के बावजूद आदिवासी महिलाओं को बच्चों के पोषण के लिए राशि नहीं मिली है। यदि चयनित महिला हितग्राहियों को जल्द राशि का भुगतान नहीं किया तो तहसील दफ्तर के आगे भूख हड़ताल करेंगे। यह बात सोमवार को तहसील दफ्तर पर आदिवासी महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के साथ उपभोक्ता कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अंशु शुक्ला ने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन आरआई को देते हुए कही। इस ज्ञापन के जरिए कांग्रेसियों ने जिला प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है।

गौरतलब है कि गत 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर कराहल में कुपोषण के विरुद्ध जंग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुपोषित बच्चों की माताओं को हर माह एक हजार रुपए देने की घोषणा की है। जिससे कुपोषित बच्चे के लिए घी, दूध, फल आदि पौष्टिक खाद्य पदार्थ खरीद सके। राज्य शासन की योजना के मुताबिक कुपोषित बच्चों की माताओं ने बैंक खाते की डिटेल सहित जरूरी दस्तावेज के आवेदन फार्म ग्राम पंचायत में जमा करवा दिए हैं। लेकिन अभी तक महिला हितग्राहियों को एक हजार रुपए महीने मिलने की शुरुआत नहीं हुई है। पांच महीने से कभी ग्राम पंचायत तो कभी एकीकृत बाल विकास विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रही आदिवासी महिलाओं का सब्र टूटने लगा है। इस समस्या को लेकर ग्राम रतोदन से बड़ौदा पहुंची आधा सैकड़ा महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उपभोक्ता कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अंशु शुक्ला के नेतृत्व में तहसील कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान तहसीलदार की अनुपस्थिति में कांग्रेसियों ने कलेक्टर को संबोधित ज्ञापन आरआई दिव्यराज धाकड़ को सौंपा। उपभोक्ता कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्री शुक्ला ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की लैतलाली के चलते सीएम की घोषणा के पांच महीने बाद भी वंचित समुदाय की महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलने से कुपोषण खात्मा होने के बजाय बच्चों का आंकड़ा चिंताजनक ढंग से बढ़ रहा है। कुपोषण के लिए देशभर में बदनाम जिले में आज भी 18 हजार 400 से ज्यादा बच्चों को कुपोषण ने जकड़ रखा है। मुख्यमंत्री की घोषणा कागजी साबित हो रही है। कुपोषण के खिलाफ जंग अधूरी है। कुपोषण की जद से अपने बच्चों को उबारने की जद्दोजहद में उनकी माताएं खुद को बेबस महसूस कर रही है। दफ्तरों के चक्कर लगा रही महिलाओं को एक हजार रुपए खाते में जमा करवाने की बात अधिकारी कहते हैं, लेकिन योजना शुरू होने के 5महीने बाद भी एक पैसा नहीं मिला है। कांग्रेस नेता अंशु शुक्ला ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जिला प्रशासन ने 15 दिन के भीतर महिला को पोषण राशि मुहैया नहीं कराई तो तहसील कार्यालय के सामने भूख हड़ताल पर बैठ जाऊंगा।

वहीं बड़ौदा तहसील के 98 गांव में कुपोषण के खिलाफ जंग में शासन-प्रशासन के ढीले रवैए के चलते वंचित महिलाओं को हक दिलाने के लिए बत्तीसा क्षेत्र विकास संगठन भी मैदान में उतर गया है। रतोदन गांव से आई आदिवासी महिलाओं के साथ तहसील कार्यालय पर कांग्रेसियों के विरोध प्रदर्शन में बत्तीसा क्षेत्र संगठन के अध्यक्ष मनीष शुक्ला सहित डॉ. ओपी गुप्ता, बंटी सोनी, योगेश शर्मा, बनवारी दुबे, इस्माइल खान, रजाक खान आदि कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

बड़ौदा तहसील कार्यालय पर प्रदर्शन एवं ज्ञापन कलेक्टर के नाम देते कांग्रेसी नेता।

महिलाएं बोली -घर में रोटी-सब्जी भी मुश्किल से मिलती है,बच्चों को घी-दूध कहां से खिलाएं

एक हजार रुपए मिलने की आस में पांच महीने से भटक रही कुपोषित बच्चों की माताओं का दर्द सोमवार को तहसील कार्यालय पर ज्ञापन देने के मौके पर आरआई दिव्यराज धाकड़ के सामने छलक पड़ा। रतोदन गांव की कौशला बाई , कलावती , साबो आदिवासी का कहना था कि इस बार सूखे के कारण खेती नहीं हुई, गांव में मजदूरी भी नहीं मिलती है। घर में सब्जी -रोटी का इंतजाम बड़ी मुश्किल से होता है। आमदनी नहीं होने से हरी सब्जी और दाल खरीदने के लिए भी जेब में पैसे नहीं है। ऐसे में बच्चों को दूध, घी कैसे खिलाए । कमजोर बच्चों को देखकर दिनरात चिंता और मन में डर रहता है। हमारे बच्चों का जीवन भगवान के सहारे है। रतोदन पंचायत में कागजात जमा कराने के बाद पांच महीने से खाते में एक पैसा नहीं आया है। अफसर गरीबों की सुनते ही नहीं है।

हर साल 7.20 करोड़ खर्च , नहीं मिटा कुपोषण

18400 पर टिका है जिले में कुपोषित बच्चाें का अांकड़ा।

7 करोड़ 20 लाख रुपए हर साल कुपोषण मिटाने पर खर्च करती है सरकार।

41 हजार कुपोषण ग्रस्त परिवारों को पोषित करने महिला मुखिया को मिलेंगे एक हजार रुपए महीने ।

1236 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के साथ महिलाओं को स्वास्थ्य एवं पोषण

3 पोषण पुनर्वास केंद्रों पर कुपोषित बच्चे को उपचार व पूरक पोषण आहार के लिए14 दिन भर्ती रहने के दौरान उनकी माता को दैनिक भत्ता भी देती है सरकार।

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