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रोजगार की तलाश में राेज निकल रहे आदिवासी

3 वर्ष पहले
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जंगल से सटे बड़ौदा एवं कराहल तहसील के ग्राम नगर में रोजगार न मिलने से लोग रोजगार की तलाश में सैंकड़ों आदिवासी पलायन कर रहे हैं। गांव के आदिवासी गर्मी के मौसम में छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पलायन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का गांवों में सरकारी सूखा राहत एवं मनरेगा के काम नहीं चलने से हम लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। सैंकड़ों आदिवासी रोजी रोटी कमाने की तलाश में महानगर की ओर पलायन कर गए है। आदिवासियों का कहना है कि पहले तो जंगल में आंवला और वन तुलसी संग्रह करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर लेते थे, लेकिन अब आंवला का सीजन खत्म होने के बाद कमाई का कोई जरिया नहीं है। जिससे परिवार पालना मुश्किल हो रहा है। इस बार सरकार ने अप्रैल महीने में ही स्कूलों को खोलने के निर्देश दिए है। ऐसे में आदिवासी परिवार के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। परिजनों का कहना है कि बच्चों को पालना पहली प्राथमिकता है। इसलिए नगर से महानगरों में रोजगार की तलाश के लिए पलायन करना पड़ता है।

परिवार का पालन करें या बच्चों को पढ़ाएं
कटीला गांव से जयपुर के लिए रवाना हुए रामचरण आदिवासी ने बताया मजदूरी के अलावा परिवार पालने का कोई जरिया नहीं है। इसलिए परिवार पालने के लिए घर छोडऩा पड़ रहा है। हालात ऐसे है कि अब बच्चों का पेट भरे या उन्हें पढ़ाएं। उन्होंने बताया कि रोजगार की तलाश में हर साल तीन से चार महीने बाहर काम करना पड़ता है। ऐसे में हमारे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

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