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वन तुलसी के बीज भिगाेकर खाने से मिटता है कुपाेषण

3 वर्ष पहले
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कुपोषण नियंत्रण के लिए साबड़ी गांव में समूह चर्चा करती महिलाएं।

खाद्य सुरक्षा एवं पोषण विविधता कार्यक्रम के तहत ग्राम साबड़ी में हुई बैठक

भास्कर संवाददाता | कराहल

महात्मा गांधी सेवा आश्रम द्वारा चलाए जा रहे खाद्य एवं पोषण विविधता अभियान के तहत ग्राम साबड़ी में बैठक हुई। जिसमेंं 15 से 49 साल उम्र की लक्षित महिलाअाें ने भाग लेकर कुपाेषण काे जड़ से मिटाने के लिए समूह चर्चा की। इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर नीरज श्रीवास्तव ने परिवार काे पाेषित करने के टिप्स दिए। उन्हाेंने बताया कि कराहल के जंगल में पाई जाने वाली वन तुलसी अाैषधीय गुणाें का खजाना है। वन तुलसी के बीज रातभर भिगाेकर सुबह सेवन करना सेहत के लिए लाभकारी होता है। उन्होंने बताया वन तुलसी के बीज में आमेगो -3 नामक केमिकल होता है। यह केमिकल कुपोषण मिटाने में कारगर है। उन्हाेंने महिलाअाें काे वन तुलसी काे बेचने के बजाए घर में इस्तेमाल करने की समझाइश देते हुए बताया कि ज्यादातर अादिवासी जंगल से वन तुलसी संग्रह करके दुकानाें पर महज 100 से 120 रुपए प्रति किलो के भाव बेच देते हैं । बाद में दुकानदार इसे 900 से 1000 रुपए प्रति किलो के भाव बेचकर भारी मुनाफा कमाते है।

करीब दाे घंटे चली इस बैठक मेंं पाेषण सलाहकाराें ने गर्भवती और धात्री महिलाओं को बच्चों की बेहतर परवरिश के तरीके बताए । पोषण सलाहकार विनाेद अादिवासी ने बताया कि जन्म से छह माह तक शिशु के लिए मां का दूध संपूर्ण आहार है। छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को दिन में तीन-चार बार ठोस आहार देना चाहिए। 18 महीने उम्र होने तक बच्चों को स्तनपान के साथ पौष्टिक आहार देना शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए आवश्यक है।

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