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अस्पताल में 10 दिन से एक ही डॉक्टर, मरीज परेशान हुए तो फार्मासिस्ट ने किया इलाज

3 वर्ष पहले
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आदिवासी अंचल के 56 गांव में मौसमी बीमारियों का दौर शुरू हो गया है। ब्लॉक के सबसे बड़े सामुदायिक अस्पताल में मरीजों की संख्या एक सप्ताह में 20 प्रतिशत बढ़ गई है। इस अस्पताल में सिर्फ दो डॉक्टर पदस्थ है। स्टाफ बढ़ाने के बजाय स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक डॉक्टर को एक माह के लिए इंडक्शन ट्रेनिंग पर भेज दिया गया है। 10 दिन से सामुदायिक अस्पताल बीएमओ डॉ. बीएस रावत के ही हवाले है। यह एक मात्र डॉक्टर भी समय पर ओपीडी में नहीं बैठते हैं। अस्पताल में शुक्रवार को 180 मरीज इलाज कराने पहुंचे। लेकिन ओपीडी में डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी रही।

सुबह 8 बजे अस्पताल निर्धारित समय पर खुला, लेकिन पर्ची कटवाने के बाद मरीज खाली ओपीडी के बाहर बैठकर इलाज के लिए तरसते रहे। दो घंटे इंतजार के बाद भी जब डॉक्टर ओपीडी में नहीं आए तो बुखार से तपते मरीजों की परेशानी और बढ़ गई। आम मरीजों की दशा को देखकर फार्मासिस्ट अरुण गुप्ता ने मरीजों का चेकअप कर दवाई दी। मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर सुबह- शाम ओपीडी में बैठने के बजाय ड्यूटी समय में भी घर पर मरीजों को देखते हैं। घर पर दिखाने के लिए 100 रुपए फीस देने में असमर्थ मरीजों को घंटों इंतजार के बाद भी समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। पिछले तीन दिन से स्थिति यह है कि सुबह और शाम की पाली में ओपीडी कक्ष सूना रहता है। मरीजों को फार्मासिस्ट से इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। उधर बीएमओ का तर्क है उन्हें अकेले रोज 150 से ज्यादा मरीजों को संभालने के अलावा विभागीय काम भी करने पड़ते हैं।

वहीं सामुदायिक अस्पताल में कस्बे सहित आसपास गांव से आने वाले मरीज और प्रसव पूर्व जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि बीएमओ की मनमानी कार्यप्रणाली के चलते अधीनस्थ स्टाफ भी समय पर ड्यूटी नहीं देते हैं। प्रसूति वार्ड में एक नर्स को छोड़कर अन्य चिकित्साकर्मी सुबह 9 बजे के बाद ही पहुंचते हैं। ओपीडी काउंटर पर पर्ची कटवाने के बाद मरीज अस्पताल के अहाते में बैठकर इंतजार करते दिखे। सर्दी, खांसी एवं बुखार से पीडि़त कई मरीजों ने बताया कि पिछले तीन दिन से सुबह- शाम ओपीडी में डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। गुरुवार को सुबह की पारी में 9.40 बजे आए थे और 11 बजे घर के लिए रवाना हो गए।

कराहल सीएचसी पर खाली पड़ा रहा अाेपीडी कक्ष।

अभी 20 दिन और चलेगी ट्रेनिंग, मरीजों को कैसे मिले राहत
स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराहल सामुदायिक अस्पताल में कार्यरत डॉ. बीएस गिल को एक माह की ट्रेनिंग पर भेजे 10 दिन बीत चुके हैं। अगले 20 दिन और सामुदायिक अस्पताल में बीएमओ डॉ. बीएस रावत अकेले रहेंगे। लोगों की शिकायत है कि बीएमओ ओपीडी में मरीजों को देखने के बजाय घर पर निजी प्रेक्टिस करते हैं। जिससे सबसे ज्यादा परेशानी गरीब तबके के मरीजों को उठानी पड़ रही है।

अकेला ही संभाल रहा अस्पताल
इलाके में मौसमी बीमारी का दौर शुरू होने से ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़कर अब रोजाना 180 तक पहुंच रही है। विभाग द्वारा डॉ. गिल को एक माह के लिए ट्रेनिंग पर भेजने के कारण इनदिनों अकेला ही ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों को देखता हूं। बीएमओ का प्रभार भी होने से मुझे विभाग के दूसरे काम भी करने पड़ते हैं। ऐसे में कई बार ओपीडी में समय पर बैठना संभव नहीं हो पाता है। डाॅ. बीएस रावत, ब्लॉक मेडिकल आॅफिसर कराहल

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