ट्राइबल ब्लॉक मुख्यालय कराहल कस्बे में 13 हजार आबादी के लोगों को ग्राम पंचायत प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भीषण जल संकट के रूप में भुगतना पड़ रहा है। कस्बे को रोज 40 हजार लीटर पानी की जरूरत है। इसके मुकाबले केवल 5 हजार लीटर पानी ही नलाें में पहुंच रहा है। अभूतपूर्व जल संकट से जूझ रहे कराहल कस्बे में गिरते भूजल स्तर के कारण दो माह में नल जल योजना के दो बाेर फेल होने के बाद प्रशासन द्वारा 700 फीट गहरी बाेरिंग कराई गई है। इस बाेर में पर्याप्त मात्रा में मीठा और साफ पानी उपलब्ध है। लेकिन मात्र 10 हॉसपाॅवर की मोटर इतनी गहराई से पानी नहीं उठा पाती है।
नतीजतन टंकियां क्षमता से आधी भी नहीं भर पा रही हैं । ग्राम पंचायत की जलप्रदाय शाखा द्वारा दो दिन के अंतराल में महज 10 मिनट ही नलाें में पानी दिया जा रहा है। लोगों की मांग पर कलेक्टर सौरभ सुमन ने इस बाेर में 15 हाॅर्सपावर की मोटर डालकर तीन दिन में पानी की सप्लाई बढ़ाने का जिम्मा एसडीएम बीबी श्रीवास्तव को सौंपा था। लेकिन एक माह बीतने के बावजूद प्रशासन दूसरी मोटर की व्यवस्था नहीं कर सका है। इसलिए कस्बे मेंं पेयजल संकट दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। गौर करने वाली बात भी यह है कि पीएएचई विभाग द्वारा कस्बे में 75 लाख रुपए की लागत से स्थापित नल जल योजना वर्ष 2006 मेंं ग्राम पंचायत को हैंडओवर की थी। लेकिन 12 साल गुजरने के बावजूद अभी तक कस्बे में पाइप लाइन नहीं बिछने के कारण 65 फीसदी आबादी तक नल सुविधा नहीं पहुंची है। सिर्फ मेन रोड, किटर्रा माेहल्ला अाैर अचारवाला सहराना में ही 300 घराें में नल कनेक्शन लगे हैं। जबकि 1200 से अधिक परिवार चाहकर भी नल कनेक्शन नहीं लगवा सके हैं। 15 से ज्यादा मोहल्लों में बसे लोगों को दूरदराज खेत पर निजी बोर से पानी लाना पड़ता है। आर्थिक रूप से संपन्न परिवार तो पानी के केंटर मंगा लेते हैं , जबकि गरीबाें काे प्यास बुझाने लायक पानी के लिए भरी गर्मी में लंबी दौड़भाग करनी पड़ रही है। कस्बेवासियों का कहना है कि जलसंकट गहराने का सबसे बड़ा कारण ग्राम पंचायत प्रशासन का सुस्त रवैया है। छह महीने पहले ही कस्बे में जल संकट ने दस्तक दे दी थी। लेकिन जिम्मेदार नहीं चेते । पिछले महीने महज 20 दिन के अंतराल में नल योजना की टंकी भरने वाली दो बोर फेल होने पर अफसरों की नींद खुली। इसके बाद नई गहरी बोरिंग तो करा दी है , लेकिन कम पाॅवर की पुराना मोटर पंप पानी नहीं उठा पा रही है। बाेर मेंं भरपूर पानी हाेने के बावजूद पर्याप्त क्षमता से पानी नहीं खींचा जा रहा है। इससे लोगों तक पानी नहीं पहुंच रहा। पुलिस थाना अाैर मंडी मैदान पर बनी टंकियां क्षमता से आधी भी नहीं भर पा रही है। इससे सप्लाई कम हो रही है और नलों में पानी इतने कम प्रेशर से अाता है कि 10 मिनट सप्लाई के दौरान मुश्किल से दो मटके भरते हैं।
कस्बे में 48 घंटाें के बाद शनिवार को सुबह नलों में पानी आना शुरू हुआ और 10 मिनट बाद ही धार बंद हाे गई। 12 साै परिवाराें काे घर से एक से दाे किमी दूर निजी बाेराें पर पानी भरने जाना पड़ रहा है। उपभाेक्ताअाें का कहना है कि जलकर बकाया हो तो पंचायत के कर्मचारी आ जाते हैं। लेकिन नलों में पानी नहीं आ रहा तो कोई देखने नहीं आ रहा। संदीप शर्मा ने बताया कि महज 10 मिनट नल में पानी टपकता है। सैकडों परिवार पीने के लिए कैन मंगवा रहे हैं और नहाने धोने के इस्तेमाल के लिए टैंकर। कई बार सरपंच सचिव से लेकर एसडीएम और कलेक्टर को बताया लेकिन सप्लाई व्यवस्था नहीं सुधरी है।
कराहल में पेट्रोल पंप के बोर से पानी भरकर ले जाती बालिकाएं।
कई इलाकों में नहीं मिलता पानी
कस्बे के 15 से अधिक माेहल्लाें में नल पाइप लाइन नहीं पहुंची है। तीन माेहल्लाें में भी नलों में जरूरत से अाधा भी पानी नहीं आने से पूरे परिवार को पानी भरने के लिए जुटना पड़ रहा है।
पानी संकट से निपटने पहले से नहीं अफसरों की तैयारी
जलअभाव ग्रस्त जिले में लोगों को पानी की उपलब्धता को लेकर पीएचई एवं पंचायत के जिम्मेदार अफसरों की उदासीनता के कस्बे सहित समूचे ग्रामीण अंचल में जल संकट ने लोगों को झकझौर दिया है। मानसून में सामान्य से 49 फीसदी कम बारिश को देखते हुए कलेक्टर ने सितंबर में ही जिले को जलअभाव ग्रस्त घोषित कर दिया था। लेकिन पीएचई अफसरों ने स्थिति का अनुमान लगाने में चूक कर दी। मौजूदा जल संकट से निपटने के लिए जरूरत के अनुसार संसाधन है न अमला। इसलिए पेयजल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है।
पारम नदी पार 5 गांवों में भी पानी के लिए जद्दोजहद
ढोढर क्षेत्र में पारम नदी के किनारे बसे ग्राम नीमदा, बंध, हासिलपुर, खोजीपुरा और चक गांव मेंं गिरते भूजल स्तर के कारण पेयजल संकट गहरा गया है। इन गांव मेंं एक महीने पहले ही आधे से ज्यादा हैंडपंप सूख गए हैं। वर्तमान में चालू हैंडपंप भी पानी से ज्यादा हवा फेंक रहे हैं। प्यास बुझाने लायक पानी की जुगाड़ के लिए करीब छह हजार आबादी को जद्दोजहद करनी पड़ रही है।