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26 लाख खर्च कर हुई वार्डबंदी पर 52 आपत्तियां सर्वेयरों ने दफ्तर में अंदाजे से की, घरों तक नहीं पहुचें

3 वर्ष पहले
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शहर की नई वार्डबंदी पर आपत्तियों की सुनवाई महज तीन दिनों में सिर्फ पांच घंटे में निपटा दी गई। 52 आपत्तियों से जुड़े सैकड़ों लोगों में से किसी ने भी सुनवाई पर संतुष्टि नहीं जताई। लोगों को सुनवाई के दौरान अपनी समस्या का हल होता दिखाई नहीं दिया। बहुत से लोग वार्डबंदी के सर्वे को निशाना बना रहे हैं। आपत्तिकर्ता ताल ठोक कर बोले, उनके घर कोई भी सर्वे करने गया ही नहीं है, तो फिर सर्वे कैसे हो गया। सर्वे के नाम पर 26 लाख रुपए खर्च कर दिए, लेकिन बंद कमरे में बैठकर शहरवासियों को नई वार्डबंदी परोस दी गई। वार्डबंदी में शहर के क्षेत्र को अनुचित ढंग से उलट-पटल कर दिया गया है। शहरी क्षेत्र को ग्रामीण में पहुंचा दिया तो अपनी मनमर्जी से वार्डबंदी करने के लिए वोटिंग की सहूलियत का भी ख्याल नहीं रखा गया है। आपत्तिकर्ताओं ने चेताया कि अगर वार्डबंदी की खामियों का निपटारा निष्पक्ष ढंग से नहीं किया गया तो उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

आपत्तिकर्ता बोले- खामियों का निपटारा निष्पक्ष ढंग से नहीं किया तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे

राजनीतिक दबाव में की वार्डबंदी, लोग होंगे परेशान

वार्ड-14 के पार्षद विनोद तितोरियों ने कहा कि अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव में नई वार्डबंदी की है, जो त्रुटियों से भरी पड़ी है। मुख्यमंत्री के ओएसडी की इसमें बड़ी भूमिका है। उनके वार्ड की इंद्रा कॉलोनी, गोविंद कॉलोनी, भाट कॉलोनी को वार्ड 14 से काटकर वार्ड 16 में जोड़ दिया है, जबकि आज तक कभी शहर का हिस्सा तोड़कर ग्रामीण ने नहीं जोड़ गया है। अनाज मंडी को वार्ड 14 से काटकर बिरम नगर में जोड़ दिया है जो कि गलत है। चांद सराए को 14 से काटकर छह में डाल दिया, जबकि जीटी रोड पार कंबोपुर को जोड़ दिया है। नगर निगम का वार्डबंदी का नक्शा गलत है। क्योंकि वकीपुरा को विपरीत दिशा में दर्शाया गया है।

पांच किलोमीटर दूर जोड़ दी सीएसएसआरअाई: आपत्तिकर्ता नरेश राणा, रामकुमार, प्रदीप पालनगर, विजय सीएसएसआरआई, विजय पाल, महेंद्र पाल व विजय कुमार ने कहा कि सीएसएसआरआई को वार्ड 20 से हटाकर वार्ड 11 में पांच किलोमीटर दूर कर दिया गया है, जो पूरी तरह से गलत है। जबकि शहरी कॉलोनी शांति नगर को वार्ड 20 में कर दिया है। अधिकारियों ने वार्डबंदी को मनमर्जी से बंद कमरे में बैठकर अंजाम दे दिया। कोई भी सर्वेयर उनके किसी के भी घर सर्वे करने नहीं गया है।

करनाल. विकास सदन में एसडीएम के समक्ष अपनी आपत्ति बताते वार्ड के लोग।

मनमर्जी से वार्ड बनाने के लिए उलट-पुलट

आपत्तिकर्ता पूर्व पार्षद विजय सिंगला ने कहा कि वार्डों को गठन मनमर्जी से करने के लिए वार्डों में मनमर्जी से उलट-पुलट कर दिया गया है। दयालपुरा को वार्ड 13 से हटाकर वार्ड 14 में डाल दिया, जबकि दयालपुरा में सभी निवासी जनरल कैटेगरी से हैं। जबकि दराबी लाइन व तोपखान को एससी वार्ड में रखा जाएगा। अधिकारियों ने उनकी बात सुनकर इतना ही बोला कि देखते हैं, लेकिन कोई संतुष्टिजनक जवाब नहीं दिया है।

दिव्यांगों का भी नहीं रखा ख्याल, कैसे जाएंगे वोट डालने

आपत्तिकर्ता ऋषिपाल, ईश्वरदास, राकेश गडरिया, रिंकू, राजेश पाल, संजीव कुमार व सविनय कुमार सिन्हा ने कहा कि ढिंगा खेड़ा व इंद्रा चक्रवती ग्राम को वार्ड 16 में डाल दिया गया है, जबकि इन्हें साथ लगते वार्ड 17 में रखा जाएगा। क्योंकि इंद्रा चक्रवती ग्राम में अधिकतर दिव्यांग जन रहते हैं। इन लोगों को वोट डालने के लिए दूर जाने की बड़ी दिक्कत है। इन दोनों कॉलोनियों को वार्ड 17 में रखा जाए।

एक आदमी को खुश करने के लिए किया वार्ड को विखंडित

आपत्तिकर्ता वार्ड नंबर-17 की पार्षद शीला रानी के पति बलबीर सिंह ने कहा कि केवल एक व्यक्ति गजेसिंह को खुश करने के लिए उनके वार्ड को विखंडित किया गया है। वार्ड की फ्रैंड्स कॉलोनी, भाट बस्ती, ढेहा बस्ती का क्षेत्र काटकर वार्ड 18 में जोड़ दिया है।

ओएसडी को कुछ पता नहीं

आपत्तिकर्ता पूर्व एमसी जोगिंद्र ने कहा कि वार्डबंदी में ओएसडी ने अपनी मर्जी से उलटफेर कराई है, जबकि उन्हें शहर के बारे में कोई जानकारी नहीं है। कौन सा एरिया कहां पर पड़ा है, इस बारे में उन्हें कैसे पता हो सकता है, यह तो स्थानीय लोग ही जानते हैं।

वार्डबंदी पर सुझाव आए हैं

नई वार्डबंदी पर अधिकतर लोगों ने सुझाव दिए हैं। लोगों के सुझाव ले लिए गए हैं। अब कमेटी इनके बारे में निर्णय लेगी। इस कार्य में कई दिनों का वक्त लगेगा। तीसरे दिन 16 आपत्तियां सुनी गई हैं। -नरेंद्रपाल मलिक, एसडीएम, करनाल।

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