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वार्डबंदी सर्वे में मिले फर्जी हस्ताक्षर, परिवारों के सदस्यों की संख्या आधी, कॉलोनियों के स्थान में भी उलटफेर

3 वर्ष पहले
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नगर निगम की वार्डबंदी के दावे और आपत्तियों की सुनवाई के पहले दिन कोई भी आपत्तिकर्ता विकास भवन से संतुष्ट होकर नहीं लौटा। वार्डबंदी के निपटारे के लिए बनाई गई कमेटी किसी भी आपत्तिकर्ता को संतुष्ट नहीं कर पाई। लेकिन आपत्तिकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं होगा वे कानूनी लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। आपत्तियों के निपटान के लिए पहले डीसी के पास जाएंगे और यदि वहां से भी उनकी आपत्तियों को सही ढंग से निपटान नहीं होता है तो फिर मजबूर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

वार्डबंदी की आपत्तियों का समाधान लेने के लिए पहुंचे वार्ड नंबर-1 के लोगों ने कहा कि वार्डबंदी की अधिकतर आपत्तियां सर्वे से जुड़ी हुई हैं। कैलाश गांव से आए बिरम पोसवाल और एडवोकेट प्रवीन पोसवाल ने कहा कि नगर निगम की ओर से वार्डबंदी के लिए कराया गया सर्वे पूरी तरह से फर्जी, क्योंकि इसमें उनके परिवार के सदस्यों की संख्या आधी दिखा रखी है। सर्वे रिकाॅर्ड में हस्ताक्षर भी फर्जी कर रखे हैं। अमित पोसवाल के परिवार में आठ सदस्य हैं, जबकि सर्वे में चार दिखा रखे हैं। प्रवीन पोसवाल के परिवार में 16 सदस्य हैं और रिकाॅर्ड में आठ मेंबर लिख रखे हैं। घर बैठकर सर्वे किया हुआ है। उनके परिवार के किसी भी व्यक्ति से सर्वे के बारे बात तक नहीं हुई है।

न जनसंख्या से वोटर मैच हो रहे और न कॉलोनियों का एरिया, लोगों ने जताई असंतुष्टि

उनके खुद के फर्जी हस्ताक्षर, अनपढ़ के भी रिकाॅर्ड में मिले सिग्नेचर

आपत्तिकर्ता प्रवीन पोसवाल ने कहा कि सर्वे पूरी तरह से गलत है। सर्वे रिकाॅर्ड में फर्जी साइन करके सर्वे रिपोर्ट तैयार की गई है। हैरानी की बात तो यह निकलती है कि सर्वे रिपोर्ट में उनके खुद के फर्जी हस्ताक्षर किए हुए हैं। इतना ही नहीं उनके गांव का अंग्रेज सिंह अनपढ़ और अंगूठा टेक व्यक्ति है, लेकिन सर्वे रिकाॅर्ड में उनके साइन किए हुए हैं।

किसी भी नाम के आगे पिता का नाम नहीं

प्रवीन पोसवाल ने बताया कि उन्होंने कमेटी के सामने सर्वे रिपोर्ट को चेक किया है, जिसमें किसी के नाम के आगे उनके पिता का नाम नहीं लिखा है। इससे साफ जाहिर होता है कि सर्वे फर्जी है। सर्वे कंपनी ने शहर के लोगों को मूर्ख बनाया है। जबकि कमेटी के अधिकार करते हैं कि उनका सर्वे से ताल्लुक नहीं है। कैलाश गांव की आबादी 2768 है, लेकिन सर्वे में 1751 दिखा रखी है। गांव की आबादी बढ़ने की बजाए घटी दिखाई गई है। बिरम पोसवाल ने कहा कि पूरा गांव बीसी का है, लेकिन अधिकतर जनसंख्या एससी की दिखा रखी है। समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कोर्ट में जाएंगे।

करनाल. विकास सदन में एसडीएम के समक्ष अपनी आपत्ति बताते हुए लोग।

फर्जी बनाया गया है सर्वे रिकाॅर्ड

वार्ड-1 से सुभाष शर्मा, गुलाब पोसवाल, रणबीर, महेंद्र लाठर, सुरेंद्र होलकर, एमएस खान, भूपेंद्र पोसवाल, विजन पोसवाल आदि ने कहा कि वार्डबंदी को सर्वे रिपोर्ट फर्जी तैयार की गई है। बसंत विहार की जनसंख्या वर्तमान में 20 हजार के करीब, लेकिन सर्वे में मात्र 7886 दिखा रखी है। जबकि फूड एंड सप्लाई के रिकाॅर्ड में भी 13227 जनसंख्या बनती है। 7886 की जनसंख्या पर 5673 वोटर कैसे हो सकते हैं। सुनवाई के नाम पर खानापूर्ति हो रही है।

बढ़ी जनसंख्या कोई मायने नहीं रखती

झंझाड़ी गांव के नवीन कुमार व बलवान ने अपनी आपत्ति रखते हुए कहा कि उनके गांव की जनसंख्या 2872 है, लेकिन सर्वे में 4060 दिखा रखी है। उन्होंने बताया कि उन्हें कमेटी से जवाब मिला कि 700 वोटों का अंतर कोई मायने नहीं रखता है। इस तरह से उनकी आपत्तियों काे दूर करने की बजाए खानापूर्ति की जा रही है। जबकि उनके गांव में कोई सर्वे नहीं हुआ है। किसी को फायदा पहुंचाने के लिए सर्व और वार्डबंदी में गड़बड़ी की गई है।

लोधा गामड़ी में सभी बीसी, दिखा रखे एससी

सुभाष शर्मा ने कहा कि लाेधा गामड़ी में सभी बीसी वर्ग के लोग हैं, लेकिन उनको एससी वर्ग का दिखा है। वार्डबंदी में यह बड़ा घपला है। वार्डबंदी के लिए सर्वे किया ही नहीं है। बस वोटर लिस्ट से नाम उठाकर दे रखे हैं। आपत्तियों के निपटारे के नाम पर उनके ब्लॉक वाइज डाटा मांगकर आपत्ति दूर करने की बजाए उनको उलझाकर मेनुकुलेट करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन उनकी आपत्ति दूर नहीं की गई तो डीसी से मिलेंगे और कोर्ट में जाने की जरूरत पड़ी तो जाएंगे।

शहरी एरिया को ग्रामीण में रख दिया

ओमप्रकाश ढलवाल और जयप्रकाश छिक्कारा ने कहा कि निर्मल विहार पहले सात वार्ड में था अब उसे वार्ड तीन में फूसगढ़ के साथ ग्रामीण क्षेत्र में जोड़ दिया गया है, जोकि अनुचित है। उसे वार्ड आठ में किया जाए। लेकिन एसडीएम ने कोई संतुष्टिदायक जवाब नहीं दिया है। उनकी बात को गोलमाल करते हुए सिर्फ उनकी हाजिरी लगवा ली गई है।

दोबारा सर्वे कर 10 मिनट में रिपोर्ट देने को कहा

आपत्तिकर्ता राज वालिया, प्रदीप अरोड़ा, प्रशांत दुआ ने आपत्ति जताई कि गप्पू वाला बाग को कैथल पूल के नीचे दिखाया गया है, जबकि राजीव कॉलोनी को गप्पू वाला बाग की जगह नाला पार वार्ड 16 में दिखाया गया है। इस बात उनकी खासी बहस हुई तो एसडीएम ने डीएमसी व डीटीपी को निर्देश दिए कि अभी 10 मिनट में सर्वे करके उन्हें रिपोर्ट दी जाए।

19 आपत्तियों पर सुनवाई, जांच कर करेंगे रिपोर्ट सब्मिट

आपत्तियां सुनने के पहले दिन 19 आपत्तियों पर सुनवाई ध्यान से की गई है। आपत्तियों की यथार्थता जांच कर रिपोर्ट सब्मिट की जाएगी। जहां तक सर्वे की बात है वह एक कंपनी का डिसिजन है। उसे नगर निगम ही अॉथेंटिकेट करेगा। -नरेंद्र पाल मलिक, एसडीएम करनाल

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