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अनट्रेंड 15 प्रतिशत ड्राइवरों के हाथ में स्कूली वाहन न फर्स्ट एड बॉक्स, कैमरे तो लगे पर रिकॉर्डिंग नहीं

3 वर्ष पहले
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अधिकतर स्कूल वाहनों में बच्चों की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। जिले में 15 प्रतिशत ड्राइवर अनट्रेंड हैं, जो दूसरे राज्य से लाइसेंस बनवाकर हैवी स्कूल वाहनों को दौड़ा रहे हैं। प्रशासन ने संदेह जताया है कि उनके लाइसेंस की असली होने की कोई गारंटी नहीं है, जबकि परिवहन विभाग की तरफ से जारी किए गए लाइसेंस को ही मान्यता है। बावजूद इसके स्कूल संचालक सस्ते के लालच में अनट्रेंड ड्राइवरों को रख रहे हैं।

जो रोजाना दुर्घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इसके अलावा जो स्कूली वाहनों में कैमरे लगाए गए हैं, उनकी रिकॉर्डिंग ही नहीं है। ऐसे में उन्हें लगाने का फायदा नहीं है। इस कारण ड्राइवर और हेल्पर बस में अलर्ट नहीं रहते। कैमरे लगाए जाने का मकसद था कि बसों में बरती जा रही लापरवाही को परखा जाए। यह खुलासा आरटीए की तरफ से एक सप्ताह में की गई 9 स्कूलों के 62 वाहनों की चेकिंग में सामने अाया। इनमें 22 वाहनों में खामियां मिली हैं। इन पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। जिले में 1100 स्कूली वाहन हैं। दूसरे राज्य में हैवी लाइसेंस बनवाने के लिए एक महीने की ट्रेनिंग नहीं लेनी पड़ती। घर बैठे ही दो से तीन हजार रुपए में लाइसेंस दलाल के माध्यम से उपलब्ध हो जाता है। जबकि रोडवेज की तरफ से बनाए जा रहे हैवी लाइसेंस में एक महीने की ट्रेनिंग जरूरी है। इस ट्रेनिंग में नंबर आने की एक साल की वेटिंग लिस्ट चल रही है।

करनाल | लापरवाही….सेक्टर -7 में जान जोखिम में डालकर स्कूली बच्चों को कुछ इस तरह लटका कर ले जाता ई-रिक्शा चालक। फोटो | चमनलाल

ये 5 स्कूलों के वाहनों के हादसे खोल रहे हैं पोल

मंगलवार को ही कुंजपुरा एरिया के बाबा रामदास विद्यापीठ स्कूल के यूकेजी कक्षा का छात्र बोमन उसी बस के नीचे आ गया, जिसमें वह बैठकर आया था। कारण रहा है कि ड्राइवर-हेल्पर की बातों में लग गया और बच्चा बस के आगे से गुजरने लगा। चालक ने अचानक बस चला दी और बच्चा कुचला गया। इस तरह के हादसे होने का कारण है कि चालक और हेल्पर लापरवाही बरतते हैं। इससे पहले दिल्ली पब्लिक स्कूल की बस जीटी रोड पर ट्रक से टकरा गई। जेम्स इंटरनेशनल स्कूल की बस से दुर्घटना, सन राइजिंग स्कूल बस से हादसा, सेक्टर-14 गवर्नमेंट काॅलेज के नजदीक बच्चों से भरा आॅटो पलटा सहित अनेक हादसे लापरवाही की पोल खोल रहे हैं।

इन नियमों को करते हैं अनदेखा

मोटर व्हीकल टैक्स के मुताबिक ड्राइविंग के दौरान चालक मोबाइल को स्विच ऑफ रखेगा या हेल्पर को मोबाइल देगा। गाड़ी को टेंशन मुक्त होकर चलाएं। हेल्पर बच्चे को उतारकर माता-पिता को सौंपे। अभिभावक न हो तो बच्चों को सड़क क्रॉस करवाएं। सड़क क्रॉस भी वाहन के पीछे की तरफ से जाएंगे।

आॅटो में कोई भी बच्चा सुरक्षित नहीं

अभिभावक भी बच्चों के प्रति सजग नहीं हैं। आॅटो व रिक्शा में बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं, जो सबसे ज्यादा रिस्की है। एक सप्ताह में 22 ऐसे आॅटो पकड़े हैं, जो क्षमता से अधिक बच्चों को बैठा रहे थे। स्कूल वाहनों में जो खामियां मिली हैं, उनमें मुख्य रूप से सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग न होना, महिला अटेंडेंट, फर्स्ट एड बॉक्स, शिकायत पेट्टी नहीं है।

नकेल कसने के लिए नंबर किए सार्वजनिक

पुलिस कंट्रोल नंबर 100 है।

आरटीए आॅफिस नंबर 0184-2251600 को सार्वजनिक किया गया है। इन नंबरों पर आमजन शिकायत कर सकते हैं।

एक सप्ताह पहले ही सभी स्कूल वाहनों को उनके ही स्कूल में जाकर चेक किया गया था और चेकिंग लगातार जारी है। स्कूल प्रबंधक को हिदायत दी गई है कि वाहनों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। काेई हादसा होता है कानूनी कार्रवाई स्कूल प्रबंधक के खिलाफ भी करवाई जाएगी। -निशांत कुमार यादव, एडीसी कम आरटीए करनाल।

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