करनाल| पुरुषोत्तम कथा को चार दिन हो चुके है। विष्णु मंदिर में आयोजित कथा सुनने के लिए अधिक संख्या में लोग उमड़ रहे है। कथा को मंदिर के पुजारी हरि कृष्ण सुना रहे है। पुरुषोत्तम कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप ने वरदान मांगा था कि उसकी मृत्यु न तो दिन में हो और न ही रात में। न तो कोई इंसान उसे मार सके और न ही कोई जानवर उसकी जान ले सके। इस वरदान के बाद भगवान ने नरसिम्हा अवतार लेकर पुरुषोत्तम मास में हिरण्यकश्यप को मारा था। पुजारी ने भक्तों को बताया कि साल में 12 माह में हिरण्यकश्यप को न मारकर उसे मारने के लिए 13वां महीना बनाया गया था। तब से पुरुषोत्तम मास को 13वां महीना भी कहा जाने लगा।