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बाढ़ से बचाव के लिए बनेंगे दो नए स्टड, 9 की मरम्मत, वायरलेस स्टेशन किए स्थापित

3 वर्ष पहले
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मानसून में संभावित बाढ़ से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां कर ली हैं। यमुना के साथ लगते क्षेत्र में 2 नए स्टोन स्टड (पत्थर की ठोकरें) बनाने, 9 की मरम्मत तथा 627 फुट स्टोन रिवेटमेंट यानि पत्थरों से सहारे की दीवार तैयार करवाने के कार्य प्रगति पर चल रहे हैं, जो आगामी 30 जून तक मुकम्मल होंगे। इन कार्यों पर करीब 4 करोड़ रुपए की राशि खर्च होगी। जिला उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने सोमवार को इस संबंध में बताया कि भौगोलिक स्थिति के अनुसार यमुना नदी करनाल के पूर्व में स्थित है, जो उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है तथा इसका बहाव क्षेत्र करीब 11 किलोमीटर तक फैला है।

सतर्कता

ये हैं जिले के बाढ़ संभावित क्षेत्र

यमुना नदी के साथ लगते नबियाबाद, सैयदछपरा, जपतीछपरा, गढपुर टापू, खिराजपुर, कुंडाकलां, जम्मूखाला, बलेड़ा , चंद्रो तथा शेरगढ़ टापू ऐसे गांव हैं जो यमुना की चपेट में आ जाते हैं, बचाव के लिए इन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। दूसरी ओर यमुना की बाढ़ से चोगावां, नग्गल, हंसूमाजरा, डबकौली कलां, हलवाना, कमालपुर गडरियान, सदरपुर, मुंंडीगढी, बड़सत, फरीदपुर, लालूपुरा, गढ़ीबरल, बराना, बहलोलपुर, डेरा खोकीपुर, खुखनी, डबरकीपार, जडोली, देवीपुर, नबीपुर, नसीरपुर, मुस्तफाबाद, पीर बड़ौली, डबकौली खुर्द, नगली, तातारपुर तथा कलसोरा गांव भी बाढ़ से प्रभावित हो जाते हैं।

मानसून में संभावित बाढ़ से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने की तैयारियां

इन स्थानों पर रहेंगे मोबाइल वायरलेस स्टेशन

उपायुक्त ने बताया कि फ्लड कंट्रोल रूम व चेतावनी सिस्टम के सुचारू रूप से कार्य के लिए, इंद्री के गढ़पुर टापू, कुंजपुरा के जम्मूखाला तथा घरौंडा के मुंडीगढ़ी कॉम्पलैक्स में वायरलेस स्टेशन रहेंगे। जिला में बाढ़ राहत मशीनरी/यंत्रों की उपलब्धता तथा प्रशिक्षित कर्मचारी भी हैं। इनमें 15 किश्तियां, 6 ओबीएम यानि बोट इंजन, 65 चप्पू, 54 कुंडे, 92 लाइफ जैकेट, 3 ट्रेलर, 1 टूल किट तथा 8 आयल टैंकर भी वर्किंग कंडीशन में उपलब्ध हैं।

पानी की निकासी के लिए यह हैं जिले का ड्रेनेज सिस्टम

उपायुक्त ने बताया कि बाढ़ की स्थिति में अतिरिक्त पानी की निकासी क्लियर करने के लिए जिला में 44 ड्रेनों का नेटवर्क है, जो 306 किलोमीटर लंबाई तक फैली हैं तथा असंध, नीलोखेड़ी, करनाल, निसंग व इन्द्री ब्लॉक को कवर करती हैं। बीते वर्षों में जिले में फ्लड का इतिहास देखें तो 1978 में यमुना में 7.14 लाख क्यूसिक पानी आया। वर्ष 2010 में यह 7.45 लाख क्यूसिक रिकॉर्ड किया गया, जिसने 48 साल का रिकॉर्ड तोड़ा। इसी प्रकार वर्ष 2013 में ताजे वाला हैड से यमुना में 8 लाख 6 हजार 464 क्यूसिक पानी छोड़ा गया, जिससे करनाल के कुछ हिस्से प्रभावित हुए। वर्ष 2014 में 1 लाख 28 हजार 339 क्यूसिक तथा वर्ष 2015 में 1 लाख 1 हजार 360 क्यूसिक पानी छोड़ा गया। वर्ष 2017 में 1 लाख 47 हजार क्यूसिक पानी यमुना में आया।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना

उपायुक्त ने बताया कि सेक्टर-12 में लघु सचिवालय के प्रथम तल के कमरा नंबर-10 में जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है, जो जिला राजस्व अधिकारी की देखरेख में रहेगा। इसका संपर्क नंबर 0184-2267271 है। इसी प्रकार तहसील करनाल, असंध, इन्द्री, नीलोखेड़ी, घरौंडा, नायब तहसीलदार निसंग, निगदू व नायब तहसीलदार बल्ला के कार्यालयों में भी फ्लड कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है, जो 24 घंटे कार्यरत रहेंगे।

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