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बिना ढक्कन की टंकी की सफाई करने पहुंचे तो मिले 12 बंदरों के कंकाल

3 वर्ष पहले
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भीषण गर्मी में पेयजल संकट से जूझ रहे कई गांवों में इन दिनों त्राहि-त्राहि मची हुई है। वहीं जंगलों में भी बिना पानी के बेजुबान वन्य जीव व पक्षी भी अकाल मौत के मुंह में समां रहे हैं। कस्बा शहर के किले की तलहटी में निर्मित एक पुरानी व सूखी टंकी में प्यास से व्याकुल कई बंदर पीने के पानी की चाह में एक-एक कर गिर गए। इससे बिना पानी के एवं दम घुटने से करीब दर्जनभर बंदरों की मौत हो गई। टंकी में फिलहाल दर्जनभर बंदरों के शव व कंकाल पड़े हुए हैं, इससे यह साफ है कि यह सिलसिला महीनेभर पूर्व से चला आ रहा है। हालांकि सूखी टंकी में बंदरों की मौत का यह मामला भास्कर के पेयजलस्रोतों की साफ-सफाई व पानी की व्यवस्था की धरातलीय जांच पड़ताल करने पर सामने आया है। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से बंदरों के मृतावस्था में कंकाल मिलने के मामले में शीघ्र जांच कर अग्रिम कार्यवाही करने तथा जलदाय विभाग के अधिकारियों से पानी की टंकी की सफाई करवाने तथा पाइप लाइन से जोड़कर पेयजलापूर्ति व्यवस्था सुचारू कराने की मांग की है। बंदरों की मौत के मामले में ग्रामीणों ने मौका स्थल पर पहुंचकर अलग-अलग कयास लगाए और रोष जाहिर किया। साथ ही जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

दो माह पहले किया अवलोकन

ग्रामीण राजेन्द्र सिंह चौहान, कजय मीना, नंदू मीना, किंग राजावत, नवीन सिंह, महेन्द्र सिंह सिसोदिया, उपसरपंच रशीद खान, रामलाल बाबा आदि ने बताया कि ग्रामीणों ने टोडाभीम विधायक घनश्याम मेहर को ज्ञापन दिया था। इस पर दो-तीन माह पहले विधायक मेहर ने यहां इस जर्जर टंकी का अवलोकन किया और समीप के पंप हाऊस से टंकी को जोड़ने के लिए नये सिरे से लोहे की पाइप लाइन डलवाने की बात कही, मगर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे यह टंकी बिना उपयोग के पूरी तरह से जर्जर होने के कगार पर है।







जांच कराएंगे

टंकी शहर-सोप-नादौती पार्ट-बी के तहत बनी थी। बंदर मरने का मामला है तो इसकी जांच कराएंगे और शीघ्र ही सफाई कराकर पेयजलापूर्ति के काम में लेंगे। -ईशू नारंग, एईएन,पीएचईडी,नादौती।

शीघ्र पानी डालेंगे

टंकी में यदि बंदर मृतावस्था मिले हैं तो इसकी सूचना पीएचईडी विभाग के एईएन को द जाएगी। टंकी को पाइप लाइन से जुड़वाकर शीघ्र ही पेयजलापूर्ति सुचारू करने का प्रयास करेंगे। -सरपंच, दीपिका दीक्षित, कस्बाशहर।

पानी की टंकी में मृत पड़े बंदर

देखभाल के अभाव में हुई जीर्णशीर्ण

1989 में बनी टंकी निर्माण के कुछ साल बाद ग्रामीणों को पीने का पानी भी मिला, मगर बीते कई वर्षों से नलकूप से इस टंकी को पाइप लाइन से नहीं जोड़ने के कारण यह सूखी होने के कारण अनुपयोगी पड़ी है। पानी भराव नहीं होने एवं देखभाल के अभाव में यह टंकी जर्जरावस्था में है। टंकी का ढक्कन टूटा होने से कई बंदर पीने के पानी के लिए तो कई उछल-कूद करते हुए टंकी में गिर गए और बिना पानी व दम घुटने से अकाल मौत के मुंह में समां गए। नलकूप से नहीं जुड़ने के कारण यह टंकी कई वर्षों से रीति है। हालांकि पाइप लाइन से यह टंकी से जुड़ी हुई तो है,मगर पाइप लाइन जगह-जगह से लीकेज होने से क्षतिग्रस्त हो गई है। टंकी के आसपास बड़े समूह में बंदर रहते हैं। यहां अठखेलियां करते एवं प्यास से परेशान होकर पीने के पानी की मंशा से कई बंदर खुले व टूटे हुए ढक्कन की तरफ से घुस तो गए मगर बाहर नहीं निकल पाए। इससे प्यास व दम घुटने से उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

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