जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ अभियान रोकने के एकतरफा एलान के बावजूद सुरक्षा बल आतंकी गतिविधियों पर निगाह रख रहे हैं। हालांकि लश्कर-ए-तैयबा ने पहले ही दिन गुरुवार को हाजिन में 23 साल के एक युवक की हत्या कर अपना इरादा जता दिया है। यह युवक सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों का साफ मानना है कि आतंकी समूहों पर करीब से निगाह रखना होगी। उनका मानना है कि आतंकी ऐसे मौकों का इस्तेमाल अपना संगठन मजबूत करने में करते हैं। वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सरकार के इस फैसले पर कहा था कि आतंकी हमलों से इस्लाम का नाम खराब करने वालों को अलग-थलग करने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम है। केंद्र सरकार ने राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की अपील को देखते हुए रमजान माह में सुरक्षा बलों का अभियान रोकने का एकतरफा एलान एक दिन पहले ही किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राज्य के दौरे पर जाने वाले हैं।
इससे पहले 19 नवंबर 2000 को तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने आतंकियों के खिलाफ एकतरफा अभियान रोकने का एलान किया था और यह 28 नवंबर 2000 से लागू किया गया था। तब केंद्र सरकार की यह योजना फ्लाप रही थी, क्योंकि आतंकियों ने इसका फायदा उठाते हुए कई हमले किए थे। इसमें सुरक्षा बलों के 43 जवानों सहित 129 लोग मारे गए थे।