सीट पाने के लिए बस आते ही दौड़ पड़े यात्री, रुमाल-थैली रख सुरक्षित की सीट
भीकनगांव में मंगलवार को हुए मुख्यमंत्री के कार्यक्रम व बाराताें में बसों के जाने से यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। अलग-अलग रूटों पर जाने के लिए यात्री दिनभर बसों का इंतजार करते रहे। इंदौर, धामनोद, मानपुर, खलघाट, धार, मंडलेश्वर, मुलठान, खामखेड़ा, खरगोन आदि रूट पर चलने वाली 110 में से मात्र 30 बसें ही चली। तपती धूप व उमस के बीच विवाह समारोह में जाने वाले यात्रियों की फजीहत हुई।
नए बस स्टैंड पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ जमा रही। स्टैंड पर बस के पहुंचते ही यात्रियों ने दौड़कर खिड़की से रुमाल व थैली रखकर अपनी सीट सुरक्षित की। मजबूरी में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठकर सफर करना पड़ा। मानपुर जा रही सेवंतीबाई ने बताया भतीजे की शादी में सुबह से ही जाना था। सुबह बस स्टैंड पहुंचने पर पता चला कि बसें कम चल रही है। घंटों परेशान होने के बाद बस मिल सकी। उसे भी अधिक सवारी के कारण छोड़ना पड़ी। इंदौर कॉलेज जाने के लिए स्टैंड पहुंचे छात्र दीपेश व रणजीत ने बताया बसों की संख्या कम होने से कॉलेज नहीं जा पाए। घनश्याम ने बताया जरूरी काम से धार जाना है। बस नहीं मिलने से घंटों धूप में खड़े रहकर परेशान हो गया। अब चार पहिया वाहन से मजबूरी में गंतव्य तक जाना पड़ रहा है। यात्रियों ने कहा अक्षया तृतीया के एक दिन पहलें बसें अधिग्रहण करने की जानकारी प्रशासन व बस मालिकों को देना चाहिए थी।
बस आते ही यात्री सीट सुरक्षित करने दौड़ पड़े।
बसों के अधिग्रहण के बाद घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली सीट
बिस्टान | सीएम की भीकनगांव में आयोजित सभा के लिए बसें अधिग्रहण करने से मांगलिक कार्यों व जरूरी कामों से खरगोन व अन्य स्थानों पर आने-जाने वाले यात्री परेशान होते रहे। घंटों इंतजार के बाद बस आई तो सीट नहीं मिल पाई। खड़े-खड़े या लटककर लोगों को यात्रा करना पड़ी। बुधवार को अक्षया तृतीया के मुहूर्त में मांगलिक काम के लिए मंगलवार से ही लोगों का रिश्तेदारों के यहां आना-जाना लगा रहा। कृष्णाबाई राठौड़ ने बताया शादी समारोह में सनावद जाना है। लेकिन बसों में जगह नहीं है। मांगीलाल प्रजापत बिस्टान व गोकुल अजनारे सामरपाट ने बताया खरगोन जाना है, लेकिन 4 में से 1 ही बस स्टैंड पर आ रही है। ब्लॉक कांग्रेस भगवानपुरा अध्यक्ष गंगाराम सोलंकी ने कहा जनता को परेशानी में डालने वाले नेताओं व अफसरों को यात्री बसों का अधिग्रहण करने की बजाय अन्य वाहनों की व्यवस्था करना चाहिए थी।