पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • सवारी बोली भइया गाड़ी धीरे चलाओ नहीं माना, घाटी पर स्टेयरिंग बेकाबू

सवारी बोली-भइया गाड़ी धीरे चलाओ नहीं माना, घाटी पर स्टेयरिंग बेकाबू

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर न्यूज | कवर्धा/ बोड़ला

चिल्फीघाटी से 2 किमी दूर नेशनल हाइवे- 30 के मोड़ पर हुए दर्दनाक हादसे में मौत के लिए ड्राइवर की लापरवाही खुलकर सामने आई है। क्योंकि सवारी के मना करने के बाद भी ड्राइवर ने चिल्फी में रुककर शराब पी। फिर जल्दी गांव पहुंचने के चक्कर में तेज रफ्तार से मेटाडोर चलाई। सवारी कहते रहे भइया.. गाड़ी धीरे चलाओ, लेकिन वह नहीं माना।

आखिरकर घाटी में बरमदेव मंदिर के पास अंधा मोड़ आने पर भी ड्राइवर ने मेटाडोर की स्पीड कम नहीं की और स्टेयरिंग घुमा दी, जिससे गाड़ी पलट गई। उस वक्त मेटाडोर में 38 लोग सवार थे, जो हादसा होने पर सड़क किनारे इधर- उधर छिड़क गए। हादसे के बाद ड्राइवर फरार हो गया और लहूलुहान घायल मदद के लिए चीखने लगे। राह चलते कुछ लोगों ने चिल्फी थाने में इत्तला दी, तो पुलिस मौके पर पहुंच गई। सूचना मिलने पर बोड़ला अस्पताल से 2 डॉक्टर्स पहुंचे और प्राथमिक इलाज में जुट गए। लेकिन गंभीर घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिला। ऐसे में हाइवे पर जा रहे निजी गाड़ियों को रुकवाकर उसमें घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

परिजन का विलाप

घटनास्थल पर दर्द से कराहते घायल।

आठ में से 4 एंबुलेंस खराब, दो जगह सर्विसिंग के लिए खड़ी

इमरजेंसी में मरीजाें व घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए जिले में 8 संजीवनी एक्सप्रेस मौजूद है। इनमें से चार खराब पड़ी है। एक रायपुर और दूसरा बिलासपुर में सर्विसिंग के लिए भेजी गई है। दो अन्य एंबुलेंस पंडरिया और कवर्धा में खड़ी है। बोड़ला अस्पताल में एंबुलेंस नहीं है।

घायलों को देखने पहुंचे वनमंत्री

घटना की सूचना मिलने पर वनमंत्री महेश गागड़ा, विधायक अशोक साहू, कलेक्टर अवनीश शरण समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों का हाल जाना। उनके इलाज में किसी तरह कोताही न बरतने डॉक्टर्स को निर्देश दिए। इधर बोड़ला एसडीएम जीएल यादव ने मृतक के परिजन को तत्काल 25-25 हजार रुपए की सहायता राशि देकर राहत पहुंचाई।

संसाधन पर भारी जज्बा

दो स्ट्रेचर के सहारे घायलों को ओटी तक पहुंचाया।

2 स्ट्रेचर से घायलों को 1 घंटे लगे ओटी तक पहुंचने में

एंबुलेंस न मिलने पर निजी गाड़ियों में भरकर घायलों को दोपहर 12 बजे जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अव्यवस्था ऐसी कि घायलों को गेट से अंदर माइनर ओटी तक पहुंचाने में 1 घंटे से ज्यादा समय लग गया, क्योंकि उनके लिए सिर्फ 2 ही स्ट्रेचर था। वार्ड ब्वाॅय बारी- बारी से घायलों को अंदर ले जाते गए। स्पेशल- 26 के युवाओं ने इसमें मदद की।

हड्‌डीरोग विशेषज्ञ नहीं इसलिए रेफर करना पड़ा

जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर के 12 पद स्वीकृत हैं, इनमें से 8 पद खाली हैं। स्थिति यह है कि हड्‌डी रोग विशेषज्ञ भी नहीं हैं। चूंकि हादसे में गंभीर घायल 4 लोगों के हाथ व पैर की हडि्डयां टूट गई थी, जिसके चलते उन्हें इलाज रायपुर रेफर किया गया।

व्यवस्था की लापरवाही

हाइवे पर नवनिर्मित सड़क पर साइड सोल्डर नहीं।

हादसे के लिए ये जिम्मेदार

कारण 1. साइड सोल्डर फिलिंग नहीं: कवर्धा से धवईपानी (चिल्फी) तक एनएच- 30 पर टू- लेन सड़क बनाई जा रही है। निर्माणाधीन सड़क किनारे ठेकेदार ने मुरूम फिलिंग नहीं कराई है। सड़क और साइड सोल्डर के बीच 1 फीट गड्‌ढे हैं। इसलिए जैसे ही तेज रफ्तार मेटाडाेर का पहिया सड़क किनारे फिसली और पलट गई।

कारण 2. मालवाहनों में ढोई जा रही सवारी: मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मालवाहनों में सवारी ढोना अपराध है। वहीं इलाके में मालवाहनों में सवारी ढोना आम बात है। पुलिस इसे देखकर भी नजरअंदाज कर देती है, इसलिए लगातार हादसे हो रहे हैं।

चालक की तलाश की जा रही

लापरवाह चालक के खिलाफ अपराध दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है। डॉक्टर्स की सलाह पर गंभीर रूप से घायलों को इलाज के लिए रायपुर भेजा गया है। मामले की विवेचना की जा रही है। अनंत साहू, एएसपी, कबीरधाम

खबरें और भी हैं...