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प्रभावितों को देना थी 220 दुकानें सर्वे सूची से बाहर 62 अन्य को दीं

3 वर्ष पहले
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नवीन बाजार में दुकानों के आवंटन में हुई धांधली की परतें उधड़ गई हैं। बाजार में प्रभावितों को 220 दुकानों में व्यवस्थापन देना था, लेकिन बाबू व अफसरों ने धांधली के चलते सर्वे सूची से बाहर 62 अन्य लोगों को दुकानें बांट दी थी, जिसके चलते व्यवस्थापन के लिए प्रभावित भटक रहे हैं। नगरीय प्रशासन रायपुर के ज्वाइंट डायरेक्टर श्रीकृष्ण दुबे ने रिपोर्ट में दुकानों के आवंटन में हुई धांधली का खुलासा किया है।

30 दिसंबर 2017 में ज्वाइंट डायरेक्टर श्री दुबे कवर्धा आए थे। उन्होंने दुकानों के व्यवस्थापन व नीलामी की जांच की। जांच में उन्होंने पाया कि नवीन बाजार में व्यवस्थापन की गई 220 में से 62 दुकानों का गलत आवंटन हुआ है। बता दें कि बाजार में 273 दुकानें बनी हैं। इनमें से 220 दुकानों में नजूल जांच सर्वे सूची 2006-07 में शामिल लोगों को व्यवस्थापना देना था, लेकिन सूची में छेड़छाड़ की गई।

जानिए, इन मामलों की हुई थी शिकायत, जांच में सही पाई गई

केस 1. चहेतों को लाभ: नगर पालिका में कार्यरत सहायक राजस्व निरीक्षक (एआरआई) शेखर गुप्ता ने चहेतों के लिए मनचाही जगह पर दुकानें दे दी। एआरआई के भाई को 14 नंबर दुकान आवंटित हुआ था। एआरआई ने कांट-छांटकर उसे 37 नंबर दुकान दे दी।

कवर्धा.नवीन बाजार की दुकानों के गलत आवंटन से प्रभावति परेशान हैं।

दुकानों के गलत आवंटन के लिए ये 3 जिम्मेदार

1. चंद्रशेखर गुप्ता, एआरआई: दुकानों के गलत आवंटन के मामले में एआरआई चंद्रशेखर गुप्ता को दोषी माना जा रहा है। दुकान आवंटन से जुड़ी सभी फाइल उसी के पास थी। कई दस्तावेजों में काट-छांट और ओवरराइटिंग कर गड़बड़ी करने प्रयास किए गए हैं।

3. अमिताभ शर्मा, तत्कालीन सीएमओ: इन तमाम गड़बड़ियों में तत्कालीन सीएमओ अमिताभ शर्मा को दोषी ठहराया है। इस बीच नगर पालिका में सीएमओ रहे गोपाल राव रणसिंह और सुदेश कुमार सिंह भी धांधली के इस कलंक से नहीं बच सके हैं।

केस 2. जिस नाम का कोई व्यक्ति नहीं, उन्हें भी दुकानें आवंटित: कृष्णा पिता मनोज और हामिद पिता भैयालाल इस नाम से नवीन बाजार में 2 दुकानें आवंटित की गई हैं। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि इस नाम के कोई व्यक्ति ही नहीं हैं। इसके बावजूद इन्हें दुकानें आवंटित कर दी गई।

2. महेश पाण्डेय, प्रभारी राजस्व निरीक्षक: दुकानों के गलत आवंटन में प्रभारी राजस्व निरीक्षक महेश पाण्डेय का भी नाम सामने आया है। क्योंकि चंद्रशेखर गुप्ता उन्हें रिपोर्टिंग करते थे और वे फाइल अपने उच्चाधिकारी यानि सीएमओ तक पहुंचते थे।

केस 3. महिला आरक्षण वाली दुकान पुरुष को: महिला आरक्षण वाली दुकान नंबर- 32 को प्रीति तंबोली ने नीलामी में खरीदी। बाद में उसने दुकान लेने से इंकार कर दिया था। जांच में सामने आया कि महिला आरक्षण वाली दुकान में सामान्य वर्ग पुरुष को व्यवस्थापन दे दिया गया है।

गजब :बिना इजाजत शराब दुकान आवंटित

नवीन बाजार में दुकानों के आवंटन में धांधली का एक और चौंकाने वाला सच सामने आया है। बाजार में जहां पुराना बीयर बार मौजूद है, उसके ठीक सामने नगर पालिका की 1300 वर्गफीट खाली जमीन है। इसे शराब दुकान में आने- जाने के लिए ठेकेदार मंजीत सिंह ने 999 में पालिका से किराए पर देने मांग की थी। पालिका के तत्कालीन नुमाइंदों ने परिषद की स्वीकृति के बिना ही इसे किराए पर देने इकरारनामा भी कर दिया। साल 2000 में तत्कालीन सीएमओ को जब इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने रजिस्ट्री शून्य कर दी। इसके बावजूद वर्ष 2002 को नगर पालिका में उसी जमीन किराए का नवीनीकरण हो गया। आज भी जमीन मंजीत सिंह के पास है। इतना ही नहीं, इसी जमीन के एवज में वर्ष 2016 में उसे सामने की 3 दुकानें भी आवंटित कर दी गई।

तत्कालीन सीएमओ दोषी

दुकानों के गलत आवंटन को लेकर ज्वाइंट डायरेक्टर ने जांच की थी। रिपोर्ट में धांधली के लिए एआरआई से लेकर तत्कालीन समय में जो सीएमओ रहे हैं, उन्हें दोषी माना गया है। रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से ही दोषियों पर कार्रवाई होगी। सुनील अग्रहरि, सीएमओ, नपा कवर्धा

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