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केंद्रीय टीम पहुंची थी फिर भी नहीं राहत

3 वर्ष पहले
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सितंबर 2017, ये वो दिन था, जब सहसपुर लोहारा तहसील के जमुनिया गांव में केंद्रीय टीम सूखे की हकीकत परखने पहुंची थी। फसलों की हालत देख टीम ने गांव के अलावा आसपास 5 अन्य गांवों को भी सूखा माना था। सर्वे बाद प्रभावित किसानों को बीमा क्लेम दिया जाना था।

दुर्भाग्य से जमुनिया गांव के 150 में से एक भी किसान को प्रधानमंत्री फसल बीमा का एक रुपया नहीं मिल सका, जबकि आसपास के ग्राम डोंगरिया, वीरेन्द्र नगर, डुमरिया, पटपर और सुईहा गांव के किसानों को 20 दिन पहले ही क्षतिपूर्ति राशि बंट भी गई। बीमा राशि नहीं मिलने से परेशान जमुनिया के 30 से अधिक किसान बुधवार को कलेक्टोरेट पहुंच गए। उन्हाेंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी व्यथा सुनाई। साथ ही शीघ्र ही खाते में फसल बीमा की राशि डलवाने मांग की गई है।

1200 एकड़ में की थी खेती, सूखे से सब बर्बाद: जमुनिया गांव में करीब 150 किसान हैं, जिन्होंने खरीफ सीजन 2017-18 में 1200 एकड़ कृषि भूमि पर धान की फसल बोई थी। कम बारिश और सिंचाई सुविधा नहीं होने के कारण फसल पूरी तरह से खराब हो गई थी। सूखा का जायजा लेने आए केंद्रीय टीम को जिला प्रशासन सबसे पहले इसी गांव में लेकर गए थे।

आसपास के 5 गांवों में प्रभावित किसानों को 20 दिन पहले बंट गई राशि

कवर्धा. फसल बीमा की राशि नहीं मिलने की कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीण।

गुमराह कर रहे प्रबंधक

कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीण संतोष शर्मा व अन्य लोगों ने बताया कि धान के अलावा सोयाबीन और चना फसल भी लगाई थी। सेवा सहकारी समिति रणवीरपुर में बाकायदा बीमा कराया था, जिसकी रसीद किसान अपने पास रखे हुए हैं, लेकिन समिति प्रबंधक विष्णु कौशिक उन्हें गुमराह कर रहा है।

बीमा कंपनी से बात करेंगे

जमुनिया के प्रभावित किसानों को फसल बीमा क्लेम मिलेगा। लेकिन अब तक उनके खाते में राशि क्यों नहीं आई, इस संबंध में इंश्योरेंस कंपनी से बात की जाएगी। मधु हर्ष देवांगन, तहसीलदार, सहसपुर लोहारा

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