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30 जवानों को ट्रेनिंग लेने भेजना है हैदराबाद, नहीं मिल रहे आरक्षक

3 वर्ष पहले
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जिला पुलिस के आरक्षक नक्सल ट्रेनिंग लेने से कतरा रहे हैं। इसके पीछे कारण है कि उन्हें नक्सलियों से लड़ने भेज न दिया जाए। यह परिस्थिति वर्तमान में कबीरधाम पुलिस के साथ निर्मित हो गई है। दरअसल पीएचक्यू यानि पुलिस हेडक्वार्टर रायपुर ने एक अादेश जारी कर कबीरधाम जिले से 30 आरक्षकों को नक्सल स्पेशल ट्रेनिंग लेने हैदाराबाद भेजने सूची मंगाई है।

इस ट्रेनिंग को ग्रे-हाउंड कहा जाता है। यह ट्रेनिंग नक्सलियों के साथ लड़ने को लेकर दी जाती है। पुलिस विभाग 30 आरक्षकों को चयन कर रह है। लेकिन आरक्षक ट्रेनिंग में जाना नहीं चाहते। अपने ट्रेनिंग रुकवाने के लिए वे एसपी कार्यालय व नेताओं का चक्कर लगा रहे हैं। कुछ आरक्षक अगब-गजब बहाने बनाकर अपने अधिकारियों के सामने पेश भी हो रहे हैं तो कई आरक्षक ड्यूटी से फरार हो गए हैं। इसके चलते विभाग को आरक्षक मिलने में परेशानी हो रही हैं। ग्रे-हाउंड की ट्रेनिंग के लिए पीएचक्यू ओर से आदेश जारी होता हैं। बालोद, राजनांदगांव व कबीरधाम जिले के लिए कुल 80 सीट है। इसमें 30-30 सीट राजनांदगांव व कबीरधाम, बालोद जिले के लिए 20 सीट तय हैं। वहीं ट्रेनिंग के लिए पीएचक्यू एक आरक्षक के पीछे 60 हजार रुपए खर्च भी करता है। यह ट्रेनिंग 60 दिनों की होती है। कम समय की ट्रेनिंग व 60 हजार खर्च करने के बाद भी जिले के अारक्षक ट्रेनिंग लेने को कतरा रहे हैं।

ट्रेनिंग न जाने अजब-गजब बना रहे बहाना, जिले में अब तक 50 ने ली है ट्रेनिंग

5 से अधिक आरक्षकों को किया था निलंबित

जिले में अब तक दो चरणों में ट्रेनिंग दी जा चुकी है। 2017 जनवरी में पहली टुकड़ी गई थी, इसमें 24 जवान ने ट्रेनिंग पूरा किया व 6 जवान मेडिकल अनफिट बता कर ट्रेनिंग छाेड़ कर वापस आ गए। अगस्त 2017 में 30 जवानों की सूची बनी। इसमे ं से 4 जवान ट्रेनिंग पूरा नहीं कर सके। दूसरी बार की ट्रेनिंग नहीं जाने को लेकर एसपी ने अारक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की थी। 5 से अधिक आरक्षकों को निलंबित किया गया।

कवर्धा. जिले में जवानों को अब तक दो चरणोें में ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

साधारण होती है ट्रेनिंग, प्रतिदिन 10 किलोमीटर की पैदल चाल करना होता है: जिले में 50 जवान ग्रे-हाउंड ट्रेनिंग ले चुके हैं। ट्रेनिंग लिए जवानों ने बताया कि ट्रेनिंग बेहद सामान्य होती हैं व शासन की ओर से हैदराबाद ट्रेनिंग सेंटर में अच्छा इंतजाम किया जाता है। 2 माह रहने से लेकर खाने पीने व कपड़े भी दिया जाता है। 2 माह की ट्रेनिंग आसानी से निकल जाती है। इसमें प्रतिदिन 10 किलोमीटर की पैदल चाल, दौड़ समेत अन्य प्रकार का इवेंट रहता है।

जानिए, क्या है ग्रे-हाउंड

ग्रे-हाउंड विशेषकर नक्सल ऑपरेशन के लिए बनाया गया हैं। इसकी शुरुआत आंध्रप्रदेश से किया गया था। इस ट्रेनिंग के कारण आंध्रप्रदेश पुलिस को नक्सल ऑपरेशन में कॉफी फायदा हुआ। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस ने नक्सल प्रभावित जिलों के जवानों को ट्रेनिंग लेने के लिए अनिवार्य कर दिया। इस ट्रेनिंग में 35 वर्ष से अधिक उम्र के पुलिसकर्मी को नहीं भेजा जाता हैं।

150 से अधिक जवानों की सूची बनी

वर्तमान में करीब 150 से अधिक जवानों की सूची तैयार की गई है। इसमें 80 से अधिक जवानों का मेडिकल कराया जा चुका है। इनमें 30 मेडिकल फीट जवानों को हैदराबाद भेजा जाएगा। पिछली बार ट्रेनिंग नहीं जाने वाले आरक्षकाें को निलंबित किया गया था। अनंत साहू, एएसपी कबीरधाम

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