नई दिल्ली | केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और यह भारतीय लोकतंत्र पर काला धब्बा है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री कुशवाहा ने उच्च न्यायपालिका में एससी, एसटी और दलित समुदाय के ज्यादा प्रतिनिधित्व की मांग उठाई। इसी मुद्दे पर अपने दल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएसएलपी) के अभियान की शुरुआत की।
करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियां लोकतांत्रिक तरीके से नहीं होतीं। इनमें काफी अस्पष्टता है। कॉलेजियम प्रणाली में भाई-भतीजावाद चलता है। लोग जज के बजाय सिर्फ उत्तराधिकारी चुनते हैं। उन्होंने कहा, “मौजूदा स्वरूप में कॉलेजियम प्रणाली लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है। यह अदालत पर ही निर्भर करता है कि वह सिस्टम की इस सड़ांध को रोककर पारदर्शिता और समावेश सुनिश्चित करे।’ उन्होंने कहा कि जज बनने के इच्छुक एससी, एसटी और दलित समुदाय के छात्रों के लिए दरवाजे बंद हैं। हम उनके लिए दरवाजे खोलना चाहते हैं।