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वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

3 वर्ष पहले
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जेईई और नीट साल में दो बार से क्या लाभ?

स्टूडेंट्स को ज्यादा मौके मिलेंगे। 12वीं के बाद स्टूडेंट्स जेईई मेन छह बार दे सकेंगे। अब तक तीन बार दे पाते थे। नीट के चांस भी बढ़ेंगे। पर उम्र सीमा 25 साल तय हो गई है। दो बार एग्जाम से स्टूडेंट्स की तैयारी बेहतर होगी। जनवरी-फरवरी में एग्जाम के बाद अनुमान लग जाएगा कि परफॉर्मेंस कैसी है। दूसरे एग्जाम के लिए तीन महीने का मौका मिलेगा। परीक्षा न दे पाने से स्टूडेंट का पूरा साल खराब नहीं होगा।

एग्जाम पैटर्न में तो कोई बदलाव नहीं होगा?

नहीं। दोनों में से जिसमें नंबर ज्यादा होंगे, उसे माना जाएगा। भाषा विकल्प, फीस वही रहेंगे।

बोर्ड के साथ एग्जाम से दिक्कत तो होगी...

हां, 12वीं के साथ एग्जाम देने वालों को मेन या नीट पर फोकस करने का वक्त कम मिलेगा। क्योंकि जनवरी-फरवरी के फौरन बाद 12वीं बोर्ड एग्जाम की तैयारी करनी होगी।

क्या छात्र परीक्षा की तारीख चुन सकेगा?

हां, छात्र तारीख चुन सकेंगे। उन्हें दोनों परीक्षा में बैठने की जरूरत भी नहीं होगी। जनवरी में परीक्षा नहीं दिया तो अप्रैल में दे सकते हैं।

परीक्षाओं के नतीजे कैसे और कब आएंगे?

हर परीक्षा के बाद नंबर घोषित किए जाएंगे। पर मेरिट दोनों परीक्षाओं के नतीजे के बाद कॉमन बनेगी। एडमिशन भी उसी आधार पर मिलेगा।

परीक्षा ऑनलाइन होगी या ऑफलाइन?

ऑनलाइन ही होगी। प्रैक्टिस घर पर या कंप्यूटर सेंटर कर सकते में। इसके लिए एनटीए के पोर्टल पर पेपर अपलोड किए जाएंगे।

ऑनलाइन एग्जाम से परेशानी तो नहीं होगी?

एनटीए की सबसे बड़ी चुनौती यही होगी। इसी साल पहली बार जेईई-एडवांस्ड ऑनलाइन हुआ और न्यूमेरिकल वैल्यू के प्रश्नों पर सवाल उठने लगेे। इसी मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट कॉमन काउंसलिंग पर रोक लगा चुका है। गांव-देहात के बच्चे ऑनलाइन एग्जाम में सहज नहीं हैं।

दावा है कि ऑनलाइन एग्जाम से पेपर लीक नहीं होंगे? पर एसएससी में तो हुए थे...

एसएससी एग्जाम में परीक्षा लेनी वाली एजेंसी और सेंटर बनाने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई थी। एसबीआई और आईबीपीएस की परीक्षा भी ऑनलाइन होती है। इनमें पेपर लीक होने या नकल जैसी शिकायतें नहीं आती हैं।

परीक्षा के लिए कितने सेंटर खोले जाएंगे?

केंद्रीय वि‌‌‌द्यालय या इंजीनियरिंग कॉलेजों में टाइम स्लॉट फिक्स कर सेंटर खोले जाएंगे। घर पर भी सुविधा देने की कोशिश की जा रही।


आनंद कुमार, सुपर 30 के संस्थापक श्यामा चोना, शिक्षाविद दिल्ली और कोटा में एक्सपर्ट्स से बातचीत के आधार पर

जेईई और नीट साल में दो बार से क्या लाभ?

स्टूडेंट्स को ज्यादा मौके मिलेंगे। 12वीं के बाद स्टूडेंट्स जेईई मेन छह बार दे सकेंगे। अब तक तीन बार दे पाते थे। नीट के चांस भी बढ़ेंगे। पर उम्र सीमा 25 साल तय हो गई है। दो बार एग्जाम से स्टूडेंट्स की तैयारी बेहतर होगी। जनवरी-फरवरी में एग्जाम के बाद अनुमान लग जाएगा कि परफॉर्मेंस कैसी है। दूसरे एग्जाम के लिए तीन महीने का मौका मिलेगा। परीक्षा न दे पाने से स्टूडेंट का पूरा साल खराब नहीं होगा।

एग्जाम पैटर्न में तो कोई बदलाव नहीं होगा?

नहीं। दोनों में से जिसमें नंबर ज्यादा होंगे, उसे माना जाएगा। भाषा विकल्प, फीस वही रहेंगे।

बोर्ड के साथ एग्जाम से दिक्कत तो होगी...

हां, 12वीं के साथ एग्जाम देने वालों को मेन या नीट पर फोकस करने का वक्त कम मिलेगा। क्योंकि जनवरी-फरवरी के फौरन बाद 12वीं बोर्ड एग्जाम की तैयारी करनी होगी।

क्या छात्र परीक्षा की तारीख चुन सकेगा?

हां, छात्र तारीख चुन सकेंगे। उन्हें दोनों परीक्षा में बैठने की जरूरत भी नहीं होगी। जनवरी में परीक्षा नहीं दिया तो अप्रैल में दे सकते हैं।

परीक्षाओं के नतीजे कैसे और कब आएंगे?

हर परीक्षा के बाद नंबर घोषित किए जाएंगे। पर मेरिट दोनों परीक्षाओं के नतीजे के बाद कॉमन बनेगी। एडमिशन भी उसी आधार पर मिलेगा।

परीक्षा ऑनलाइन होगी या ऑफलाइन?

ऑनलाइन ही होगी। प्रैक्टिस घर पर या कंप्यूटर सेंटर कर सकते में। इसके लिए एनटीए के पोर्टल पर पेपर अपलोड किए जाएंगे।

ऑनलाइन एग्जाम से परेशानी तो नहीं होगी?

एनटीए की सबसे बड़ी चुनौती यही होगी। इसी साल पहली बार जेईई-एडवांस्ड ऑनलाइन हुआ और न्यूमेरिकल वैल्यू के प्रश्नों पर सवाल उठने लगेे। इसी मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट कॉमन काउंसलिंग पर रोक लगा चुका है। गांव-देहात के बच्चे ऑनलाइन एग्जाम में सहज नहीं हैं।

दावा है कि ऑनलाइन एग्जाम से पेपर लीक नहीं होंगे? पर एसएससी में तो हुए थे...

एसएससी एग्जाम में परीक्षा लेनी वाली एजेंसी और सेंटर बनाने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई थी। एसबीआई और आईबीपीएस की परीक्षा भी ऑनलाइन होती है। इनमें पेपर लीक होने या नकल जैसी शिकायतें नहीं आती हैं।

परीक्षा के लिए कितने सेंटर खोले जाएंगे?

केंद्रीय वि‌‌‌द्यालय या इंजीनियरिंग कॉलेजों में टाइम स्लॉट फिक्स कर सेंटर खोले जाएंगे। घर पर भी सुविधा देने की कोशिश की जा रही।

जेईई और नीट साल में दो बार से क्या लाभ?

स्टूडेंट्स को ज्यादा मौके मिलेंगे। 12वीं के बाद स्टूडेंट्स जेईई मेन छह बार दे सकेंगे। अब तक तीन बार दे पाते थे। नीट के चांस भी बढ़ेंगे। पर उम्र सीमा 25 साल तय हो गई है। दो बार एग्जाम से स्टूडेंट्स की तैयारी बेहतर होगी। जनवरी-फरवरी में एग्जाम के बाद अनुमान लग जाएगा कि परफॉर्मेंस कैसी है। दूसरे एग्जाम के लिए तीन महीने का मौका मिलेगा। परीक्षा न दे पाने से स्टूडेंट का पूरा साल खराब नहीं होगा।

एग्जाम पैटर्न में तो कोई बदलाव नहीं होगा?

नहीं। दोनों में से जिसमें नंबर ज्यादा होंगे, उसे माना जाएगा। भाषा विकल्प, फीस वही रहेंगे।

बोर्ड के साथ एग्जाम से दिक्कत तो होगी...

हां, 12वीं के साथ एग्जाम देने वालों को मेन या नीट पर फोकस करने का वक्त कम मिलेगा। क्योंकि जनवरी-फरवरी के फौरन बाद 12वीं बोर्ड एग्जाम की तैयारी करनी होगी।

क्या छात्र परीक्षा की तारीख चुन सकेगा?

हां, छात्र तारीख चुन सकेंगे। उन्हें दोनों परीक्षा में बैठने की जरूरत भी नहीं होगी। जनवरी में परीक्षा नहीं दिया तो अप्रैल में दे सकते हैं।

परीक्षाओं के नतीजे कैसे और कब आएंगे?

हर परीक्षा के बाद नंबर घोषित किए जाएंगे। पर मेरिट दोनों परीक्षाओं के नतीजे के बाद कॉमन बनेगी। एडमिशन भी उसी आधार पर मिलेगा।

परीक्षा ऑनलाइन होगी या ऑफलाइन?

ऑनलाइन ही होगी। प्रैक्टिस घर पर या कंप्यूटर सेंटर कर सकते में। इसके लिए एनटीए के पोर्टल पर पेपर अपलोड किए जाएंगे।

ऑनलाइन एग्जाम से परेशानी तो नहीं होगी?

एनटीए की सबसे बड़ी चुनौती यही होगी। इसी साल पहली बार जेईई-एडवांस्ड ऑनलाइन हुआ और न्यूमेरिकल वैल्यू के प्रश्नों पर सवाल उठने लगेे। इसी मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट कॉमन काउंसलिंग पर रोक लगा चुका है। गांव-देहात के बच्चे ऑनलाइन एग्जाम में सहज नहीं हैं।

दावा है कि ऑनलाइन एग्जाम से पेपर लीक नहीं होंगे? पर एसएससी में तो हुए थे...

एसएससी एग्जाम में परीक्षा लेनी वाली एजेंसी और सेंटर बनाने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई थी। एसबीआई और आईबीपीएस की परीक्षा भी ऑनलाइन होती है। इनमें पेपर लीक होने या नकल जैसी शिकायतें नहीं आती हैं।

परीक्षा के लिए कितने सेंटर खोले जाएंगे?

केंद्रीय वि‌‌‌द्यालय या इंजीनियरिंग कॉलेजों में टाइम स्लॉट फिक्स कर सेंटर खोले जाएंगे। घर पर भी सुविधा देने की कोशिश की जा रही।

एनटीए क्या है और इसे क्यों बनाया गया है?
सीबीएसई पर परीक्षाओं का काफी दबाव बढ़ गया था। इसलिए शैक्षणिक योग्यता वाली परीक्षाओं का भार सीबीएसई नहीं ले पा रहा था। इसलिए एसएससी की तरह ही अलग शैक्षणिक योग्यता वाली परीक्षाओं को अलग कराने का फैसला किया गया। इस काम के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी, एनटीए बनाई गई है। इसे बनाने का जिम्मा आईआईटी कानपुर को सौंपा गया। सरकार का दावा है इससे परीक्षा का स्तर सुधरेगा और संस्थानों को अच्छे छात्र मिलेंगे।

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