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ड्राइविंग लाइसेंस के हर काम के लिए सिर्फ 1 फार्म, आधार को जन्म प्रमाण माना

3 वर्ष पहले
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अखिलेश कुमार|नई दिल्ली. देशभर में लर्निंग या पक्का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो या रिन्यू कराना हो या डुप्लीकेट चाहिए हो, तो इन सबके लिए अब सिर्फ एक फार्म (फार्म नंबर-दो) भरना होगा। फार्म में ही लिखा होगा कि कौन से कागजात पते का प्रमाण होंगे और कौन सा कागज आपके पते और जन्म दोनों का प्रूफ होगा। केंद्रीय सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। इसे लागू करने के लिए दिल्ली सरकार के अधिकारी नेशनल इंफोर्मेटिक सेंटर (एनआईसी) के साथ बैठकें कर रहे हैं।शेष|पेज 10



सोमवार को केंद्रीय मंत्रालय और दिल्ली सरकार के अधिकारियों की एक बैठक है। इसमें नाम में परिवर्तन की छूट को लेकर नियम में बदलाव और कुछ अन्य सवालों के जवाब सामने आएंगे।

ड्राइविंग लाइसेंस के नए फार्म में आधार नंबर या आधार नंबर नहीं है तो पंजीकरण नंबर, के कॉलम को अनिवार्य कॉलम में रखा गया है। आधार और वोटर आईडी को पता प्रमाण के साथ-साथ जन्म प्रमाणपत्र के तौर पर भी मान्यता दी गई है। अभी तक ये दोनों कागज सिर्फ पता प्रमाण के लिए मान्य थे। फार्म में मोबाइल नंबर देना भी अनिवार्य किया गया है जबकि लैंडलाइन नंबर और ई-मेल आईडी वैकल्पिक है। दिल्ली में सालाना लर्निंग, पक्के, रिन्यू, नाम-पता परिवर्तन, डुप्लीकेट को शामिल कर लें तो करीब 5 लाख लाइसेंस बनते हैं।





फार्म में यह भी पूछा जाएगा कि अंगदान करना चाहते हैं या नहीं :

ड्राइविंग लाइसेंस के नए फार्म में आपको यह भरना होगा कि आप मृत्यु की दशा में अंगदान करना चाहते हैं या नहीं? फार्म में आप जैसा लिखेंगे, उसे ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाने की तारीख के ठीक नीचे प्रिंट भी किया जाएगा। ताकि किसी सड़क हादसे या आपात मौत में लाइसेंस से मृतक की इच्छा का पता चल सके और अगर वो अंगदान की इच्छा रखता था तो उसका इस्तेमाल किया जा सके। इतना ही नहीं, आधार वेरिफाइड लाइसेंस किए जाने पर पुराने लाइसेंस पर भी अंगदान की इच्छा को जुड़वाने का विकल्प दिया जाएगा।



विदेशों में ड्राइविंग लाइसेंस पर लिखी होती है अंगदान की इच्छा :

वर्ष 2017 में सड़क हादसों में देश में 1.46 लाख और दिल्ली में 1584 मौतें हुईं। ज्यादातर मामलों में मृतक की इच्छा का पता नहीं चलने के कारण उनके अंगों का इस्तेमाल किसी जरूरतमंद के लिए नहीं हो पाता है। ट्रांसप्लांट पर काम करने वाले बताते हैं कि किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट की मांग के मुकाबले इनकी उपलब्धता एक फीसदी भी नहीं है। अभी तक जापान, न्यूजीलैंड, यूएस, यूके, ऑस्ट्रेलिया व स्पेन के ड्राइविंग लाइसेंस में अंगदान की इच्छा से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती है।



एक्सपर्ट बोले- एक ही व्यक्ति कई लाइसेंस नहीं बनवा सकेगा :

लाइसेंस को सीधे आधार वेरिफिकेशन से जोड़ा जाना अच्छा कदम है। अगर लाइसेंस आधार वेरिफाइड होता है तो एक ही व्यक्ति देश में कई लाइसेंस नहीं बनवा पाएगा। पता और आयु प्रमाण में भी आधार को मान्यता देना अच्छा है। एक समान सूचनाएं रहेंगी तो किसी भी तरह का डाटा जुटाना भी आसान होगा।

- अनिल चिकारा, परिवहन एक्सपर्ट

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