पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • बाजार में मिला 50 पैसे किलो का भाव तो किसानों ने 15 क्विंटल टमाटर फेंका

बाजार में मिला 50 पैसे किलो का भाव तो किसानों ने 15 क्विंटल टमाटर फेंका

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
टमाटर का वाजिब दाम नहीं मिलने से रविवार को नाराज किसानों ने बाजार परिसर में ही करीब 15 क्विंटल टमाटर फेंक दिया। जगदलपुर शहर में यह नजारा पहली बार दिखा, जहां लाेग फेंके टमाटर को भी लूटने की होड़ में थे। थोक बाजार में आवक ज्यादा होने से व्यापारियों ने टमाटर का दाम पचास पैसे प्रति किलो कर दिया। ऐसे में किसानों ने इसे फेंक कर जाना ही उचित समझा। एक ओर कारोबारी किसानों से पचास पैसे के हिसाब से माल लेने पर अड़े हुए थे, वहीं दूसरी ओर चिल्हर बाजार में इन्हीं टमाटर को 5 से 7 रुपए किलो में बेच रहे थे।

5-7 रुपए प्रति किलो चल रही चिल्हर बाजार में टमाटर की कीमत

सब्जियों की न्यूनतम दर मिले इसका प्रावधान नहीं

5 एकड़ में 4 लाख हुए हैं खर्च

कोलचूर के किसान मनीष लहरे ने बताया कि पांच एकड़ के रकबे में टमाटर की फसल लगाई थी। इसमें सवा लाख रुपए दवा में, 40 हजार खाद में और 50 हजार रुपए बीज पर खर्च किया। इसके अलावा बिजली बिल और मजदूरी में एक लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च हो गई है। उन्होंने बताया टमाटर की खेती के लिए इस साल जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से 2 लाख रुपए कर्ज लिया है। इसे वे इस साल समय पर नहीं पटा पाएंगे। चोलनार के किसान पदम ने बताया कि चार एकड़ में टमाटर की खेती पर दो लाख रुपए खर्च हो चुका है।

लागत भी नहीं निकल पा रही है

किसानों के अनुसार बाजार में 50 और 60 पैसे किलो टमाटर का भाव मिल रहा है, ऐसे में उन्होंने जितनी लागत टमाटर की फसल पैदा करने लगाई, वह भी नहीं निकल पा रही है। आने वाले दिनों में कर्ज पटाने में भी परेशानी होगी। पिछले कुछ दिनों से टमाटर के दाम एक से दो रुपए किलो थे, लेकिन रविवार को ज्यादा मात्रा में टमाटर बाजार पहुंचा और रेट नीचे गिर गया। इधर उद्यानिकी विभाग के उप संचालक एमएस तोमर का कहना है कि किसानों को सब्जियों का न्यूनतम दर मिले, इसका कोई प्रावधान ही नहीं है।

कम से कम डेढ़ रुपए प्रति किलो की दर मांग रहे किसान

व्यापारी आवक को देखते हुए रेट लगा रहे हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों ने सोमवार से कम से कम 40 रुपए कैरेट (25 किलो) का दाम लगाने की बात कही है। इससे कम पर वे बेचने को तैयार नहीं हैं।

बाजार में फेंकने के बाद टमाटर बटोरने की होड़ लग गई थी।

जानिए क्यों बनी ऐसी स्थिति

पिछले साल टमाटर की खेती 700 हेक्टेयर में जबकि इस साल 1200 हेक्टेयर में बंपर पैदावार हुई।

टमाटर की पूरी खपत जिले में ही की जाती है, किसान बाहर नहीं भेज पा रहे हैं।

इस साल पैदावार काफी ज्यादा हुई, बाजार में यह एक साथ पहुंच गया।

दूसरी सब्जी की जगह अधिकतर किसानों ने दूसरे की देखा-देखी टमाटर की खेती की है।

सब्जी के रेट तय करने की कोई नीति नहीं, थोक व्यापारियों की मनमानी।

स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट का नहीं होना।

यह है इस समस्या का समाधान

फसल की बोआई ऐसे समय करें, ऐसे समय फसल तैयार हो जब मांग ज्यादा और आपूर्ति कम होती है।

जिन सब्जियों की खेती ज्यादा हो रही है, उस फसल की खेती करने से बचें।

थोक व्यापारियों से समय-समय पर चर्चा कर बाजार के उतार-चढ़ाव पर नजर रखें।

ऑफ सीजन में सब्जियों का उत्पादन, ऐसा समय चुनें।

खबरें और भी हैं...