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अब पूर्व चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल

3 वर्ष पहले
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अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अब पूर्व चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन ने सवाल उठाए हैं। जस्टिस बालाकृष्णन ने कहा है कि एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मूलरूप से गलत था। उन्होंने कहा कि न्यायिक आदेश ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे लोगों के बीच हिंसा हो। 14 जनवरी 2007 से 12 मई 2010 तक देश के चीफ जस्टिस रहे बालाकृष्णन ने एक कार्यक्रम में कहा, “संभवत: पहली बार सुप्रीम कोर्ट के किसी फैसले को लेकर लोगों में हिंसा भड़की है। सामान्यतः: जब हिंसा होती है, तब सुप्रीम कोर्ट दखल देता है। लोग आदेश को मंजूर करते हैं। आज लोग देश के सबसे बड़े कोर्ट के आदेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। यह भयावह स्थिति है। सुप्रीम कोर्ट को इस तरह से फैसले देने चाहिए, जो अधिकांश लोगों को स्वीकार्य हो। यह समाज में हिंसा उकसाने वाला नहीं होना चाहिए।’

एससी/एसटी से जुड़े मामलों के लिए विशेष कोर्ट बनेंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में डॉ. अंबेडकर नेशनल मेमोरियल का शुक्रवार को उद्घाटन किया। इसके लिए उन्होंने ने दिल्ली मेट्रो की यात्रा की। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोगों के मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जा रहा है। सरकार ने पिछड़ी जातियों के उप-वर्गीकरण के लिए आयोग का गठन करने का भी निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, हमारी ही सरकार है जिसने 2015 में दलितों पर होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाया। हमने 22 अपराधों को 47 कर दिया। हम अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजातीय अधिनियम के कमजोर होने नहीं देंगे। मुद्रा योजना से 2 करोड़ से ज्यादा दलितों का फायदा हुआ है।

एससी/एसटी एक्ट पर अध्यादेश ला सकती है सरकार : पासवान
लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि सरकार एससी/एसटी एक्ट को कमजोर नहीं होने देगी और जरूरत पड़ने पर इसके लिए अध्यादेश लाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दलित हितैषी बताते हुए पासवान ने कहा कि मोदी सरकार के प्रयासों से ही इस कानून में कुछ संशोधन कर नए प्रावधानों को शामिल किया गया।

हिंदुओं में दलितों के साथ भेदभाव की कुरीति रही है : रविशंकर प्रसाद
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि दलित हिंदू, बौद्ध और सिखों को ही आरक्षण का संवैधानिक अधिकार है। अन्य धर्म के लोग यह मुद्दा उठाते हैं तो उन्हें बताना होगा कि उनके यहां भी भेदभाव होता रहा है। पटना में भाजपा मुख्यालय में शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रसाद ने कहा कि हिंदुओं में दलितों के साथ भेदभाव की कुरीति रही है, इसलिए उनके लिए संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया है। दलित-मुस्लिम की बात करने वालों को पता होना चाहिए कि दूसरे धर्माें के लोगों को आरक्षण का अधिकार नहीं है।

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