हर संकट में सेवा देना स्वयंसेवक का कर्तव्य
प्रशिक्षण वर्ग के समापन पर खारकला में पथ संचलन निकाला गया।
भास्कर संवाददाता | खारकला
स्वयं सेवक का अर्थ होता है खुद सेवा में जुट जाना। जहां भी कोई संकट में दिखे, आपदा आए या और कोई संकट। ऐसे समय में सेवा देना और पीडितों की मदद करना ही स्वयं सेवक का मूल कर्तव्य है। संघ की स्थापना के समय से ही देश में आई कई विपदाओं के समय स्वयंसेवकों ने सेवा भावना का बखूबी पालन किया। कई स्वयं सेवकों ने तो अपनी जान भी दी है। स्वयं सेवक होना अपने आप में एक आंदोलन है। उसकी जीवन शैली और मर्यादाएं हैं।
ग्राम खारकला में 8 अप्रैल से चल रहे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्राथमिक वर्ग के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के बौद्धिक प्रमुख दिलीप सपकाले ने यह बात कही। उन्होंने कहा स्वयं सेवक वर्तमान में जैविक खेती, गौरक्षा, नशा मुक्ति व समरसता पर कार्य कर रहा है। संघ की स्थापना से लेकर वरिष्ठ स्वयंसेवकों द्वारा किए गए बड़े-बड़े कार्यों से विस्तार से अवगत कराया। वर्ग में आसपास के गांवों के 66 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। तड़के 4.30 बजे से रात 10 बजे तक विभिन्न कालखंड में अलग-अलग गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। इस मौके पर गांव के रामेश्वर मलगाया, राजेश राठौड़ सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे। अध्यक्षता श्रीराम सामड़िया ने की। आभार रवि दुसाने ने माना।