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ऐसी है देश की सबसे सुरक्षित जोधपुर जेल

3 वर्ष पहले
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रियासत कालीन 146 साल पुरानी अष्ट भुजाकार जोधपुर सेंट्रल जेल। यह एक बार फिर सुर्खियों में है। देश की अति सुरक्षित मानी जाने वाली इस जेल के वार्ड संख्या दो में बंद दुष्कर्म के आरोपी आसाराम को 25 अप्रैल को सजा का ऐलान होने वाला है। ये वार्ड और इसका बैरक नंबर दो हमेशा से सुर्खियों में रहा है। ऑपरेशन ब्लू स्टार के आतंकियों से लेकर बड़े फिल्मी सितारे तक को यहां रखा जा चुका है। हाल ही में दो दिन तक फिल्म अभिनेता सलमान को भी यहीं रखा गया। यहां स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पूर्व सीएम जयनारायण व्यास सहित कई फ्रीडम फाइटर भी बंद रह चुके हैं।

जेल का सुरक्षा घेरा ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय मजबूत किया गया था। जब 1983 में पंजाब में आतंकवाद चरम पर था, उस समय खालिस्तान के 365 अातंकियों को जोधपुर जेल में शिफ्ट किया गया। इसमें खालिस्तान के नेता गुरुचरण सिंह टोहरा और बीबी अमरजीत कौर भी शामिल थे। टोहरा को बाद में काजरी में नजरबंद किया गया। उस समय केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विशेष फंड जारी कर जेल के वार्ड दो में ही स्पेशल टाडा कोर्ट का निर्माण कराया, जो अब भी बरकरार है। यहीं पर आतंकियों की सुनवाई शुरू हुई। 1988 तक कोर्ट चलती रही। इसके बाद खालिस्तान के बंदियों को पंजाब भेजा गया। जोधपुर सेंट्रल जेल में चालीस साल तक जेलर रह चुके हिम्मत सिंह चौहान बताते हैं कि इसे अति सुरक्षित जेल बनाने के लिए जेल की दीवार बीस फीट ऊंची की गई है। इस पर कंटीले तार लगाकर करंट छोड़ना शुरू किया गया है। सात वॉच टावर बनाए गए हैं। जेल की डबल दीवार बनाई गई, जिसे पार करना संभव नहीं है। वहीं यहां जेल कर्मियों के साथ सीआरपीएफ की एक कंपनी तैनात की गई, अब आरएसी की कंपनी तैनात है। इससे जेल का सुरक्षा घेरा तीन स्तरीय हो गया है।

सुरक्षित होने के कारण ही 1988 में यहां कश्मीर से खूंखार 22 पाकिस्तानी व अफगानी आतंकियों को वार्ड दो के पीछे डेढ़ नंबर व दो नंबर बैरक में बंद किया गया था। इसके बाद 1992 में नगालैंड के नगा फ्रंट के कई उग्रवादियों को यहां बंद किया गया। हालांकि सुरक्षित जेल होने के बावजूद वर्ष 2010 में तेरी मेहरबानिया जैसी फिल्मों में बतौर जेलर की भूमिका निभा चुके जोधपुर जेल के जेलर भारत भूषण भट्‌ट की जेल में हत्या हो गई। उनकी हत्या एक विचाराधीन बंदी ने की थी। इस जेल पर 1965 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने बम गिराए थे। इससे 30 कैदी सहित 32 लोग मारे गए। बम से फांसी का तख्ता क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद से यहां पर फांसी देना बंद हो गया। अब भी जेल में ये टूटा हुआ तख्ता मौजूद हैं। चौहान बताते हैं कि चार बार सलमान को वार्ड संख्या दो में ही रखा गया तो आसाराम भी यहीं बंद है।

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