जोधपुर | आठ करोड़ रु. के गेहूं घोटाला मामले में आखिर सीनियर आईएएस अफसर निर्मला मीणा ने बुधवार दोपहर एसीबी ऑफिस में सरेंडर कर दिया। मीणा ने खुद को बचाने के लिए कई जतन किए, लेकिन कोई काम नहीं आया। 17 अप्रैल को हाईकोर्ट और 10 मई को सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उनके सामने सरेंडर का ही एकमात्र रास्ता बचा। उनके पति पवन मित्तल भी घिरते नजर आ रहे हैं। दोनों के खिलाफ 12 मई को एसीबी ने आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया है।
29 में से 24 साल की नौकरी जोधपुर में की
निर्मला मीणा अपनी 29 साल की नौकरी में से 24 साल तो जोधपुर में ही रही हैं। वे छह बार जोधपुर की डीएसओ रहीं। मीणा इस केस में नहीं फंसती तो शायद इसी जिले की बड़ी अधिकारी होती, जो इतने लंबे समय तक एक जिले में रही। लेकिन अब वे जोधपुर सेंट्रल जेल में आने वाली पहली आईएएस अधिकारी बन सकती हैं। सरेंडर करते समय निर्मला मीणा ने पूरा चेहरा ढंका हुआ था। पूछताछ शुरू करने से पहले अफसरों ने पर्दा हटाने को कहा-लेकिन मना कर दिया।