टौदी मेमोरियल लेक्चर में इस साल वक्ता कौन होगा, इसको लेकर बीसीसीआई और प्रशासकों की समिति (सीओए) में खींचतान चल रही है। यह खींचतान बिल्कुल भी अच्छी नहीं है। यह भारत के सबसे महान, बहादुर और करिश्माई क्रिकेटरों की यादों को कमतर कर रही है।
पटौदी न सिर्फ क्रिकेट बल्कि किसी भी खेल के बड़े हीरो में से एक थे। एक आंख गंवाने के बावजूद वे न सिर्फ खेले बल्कि अच्छा प्रदर्शन भी किया। 21 साल की उम्र में ही कप्तानी संभालने के बाद वे अपनी नेतृत्व क्षमता की बदौलत बड़ा नाम बनने में भी सफल रहे। ऐसे में उनके नाम पर होने वाले लेक्चर को लेकर बीसीसीआई और सीओए की उठापटक बिल्कुल भी अच्छी नहीं है। बीसीसीआई के जनरल मैनेजर (क्रिकेट ऑपरेशंस) सबा करीम ने इस लेक्चर के लिए चार नाम सुझाए थे। इनमें सौरव गांगुली, कुमार संगकारा, नासिर हुसैन और केविन पीटरसन के नाम शामिल थे। ये सभी बतौर क्रिकेटर काफी सम्मानित रहे हैं और कप्तान भी रहे हैं।
संगकारा और नासिर हुसैन व्यस्त थे। लिहाजा उनकी सहमति नहीं मिली। सौरव गांगुली अभी प्रशासक भी हैं इसलिए उनका नाम खारिज हो गया। पीटरसन इस लेक्चर के वक्ता बनने के लिए तैयार हो गए। माना जा रहा है कि पीटरसन के नाम को सीओए की सहमति भी है। लेकिन, बीसीसीआई के कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी को उनके नाम पर आपत्ति है। वे चाहते थे कि किसी भारतीय को इस लेक्चर में बुलाया जाता। हालांकि, जब पटौदी लेक्चर की शुरुआत की गई थी, तब यह नहीं कहा गया था कि इसमें सिर्फ भारतीय क्रिकेटर ही बोलेंगे। इसमें दुनिया भर से क्रिकेट के जानकारों को मौका दिए जाने की बात कही गई थी। कुल मिलाकर इस पर दोनों पक्षों की खींचतान बहुत अफसोसजनक है। पटौदी लेक्चर को ब्रैडमैन ऑरेशन या एमसीसी स्पिरिट ऑफ लेक्चर की तरह ऊंचा मुकाम देने की जगह ये आपसी रस्साकसी में लगे हैं। इससे भारतीय क्रिकेट की छवि ही धूमिल होगी।
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