पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • आवास योजना का फायदा रोका, क्योंकि...

आवास योजना का फायदा रोका, क्योंकि...

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सरकारी सर्वेक्षण का महाझूठ लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

भास्कर संवाददाता | नागदा

गरीबों को सिर पर पक्की छत के लिए केंद्र सरकार ने 2016-17 में पीएम आवास योजना लागू की। विकासखंड में दो सालों में जनपद पंचायत के 2100 हितग्राहियों को लाभ दिया गया, लेकिन पीएम आवास योजना में विकासखंड की 13 पंचायतों की लगभग 20 हजार की आबादी में से एक भी हितग्राही इस योजना का लाभ लेने का हकदार नहीं है। सरकारी नुमांइदों का यह महाझूठ 2011 के आर्थिक-सामाजिक सर्वेक्षण को आधार बनाकर बोला जा रहा है। क्योंकि सर्वेक्षण करने वालों को सभी 13 पंचायतों में एक भी कच्चा मकान नहीं मिला। उन्होंने इस जानकारी को पोर्टल पर फीड भी कर दिया। अब परेशानी यह है कि पंचायतों में 100 प्रतिशत पक्के मकानों की एंट्री से ये गांव और यहां के ग्रामीण योजना की जद से ही बाहर है। भास्कर ने हकीकत परखी तो सभी गांवों में दर्जनों मकान कच्चे मिलें। ग्रामीणों ने हमसे मदद की उम्मीद भी बांधी। लेकिन हकीकत यह है कि जब तक दूसरी बार सर्वेक्षण नहीं किया जाएं तब तक तो योजना के असल हकदारों को पक्की छत का इंतजार करना ही होगा।

नागदा-खाचरौद ब्लॉक के 13 पंचायतों में एक भी कच्चा मकान नहीं, हकीकत... हर गांव में दर्जनों कच्चे मकान

सर्वे करने वालों की पंचायतों में बता दिए 100 फीसदी पक्के मकान

इन पंचायतों को नहीं मिला लाभ

जनपद पंचायत खाचरौद के तहत 130 पंचायत आती है। इसमें से ग्राम पंचायत पाड़सुत्या, पचलासी, डाबरी, बंजारी, चंदवासला, चावंड, रुनखेड़ा, नरेड़ीपाता, रतन्याखेड़ी, चंदोड़िया, बरखेड़ा जावरा, चंबल पाड़ल्या, रामाबालोदा को योजना का लाभ पिछले दो सालों से नहीं मिल रहा है। जबकि इन गांवों मं 50 से लेकर 150 तक हितग्राही कच्चे मकान में निवास कर रहे हैं, जो योजना का लाभ लेने के लिए पंचायत के चक्कर काटते रहते हैं। इसके अलावा झांझाखेड़ी पंचायत के गांव खजूरिया, रोहलकलां पंचायत के जलोदिया जागीर में भी आवास योजना का लाभ नहीं दिया गया है।

रतन्याखेड़ी को नहीं मिलता सीएम आवास का भी लाभ

रतन्याखेड़ी गांव शहर से 3 किमी दूर है। पीएम आवास योजना के अलावा यहां ग्रामीणों को मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना का लाभ भी नहीं मिलता है। वजह नियमानुसार मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए शहर से पंचायत की दूरी 8 किमी तय की गई है। ऐसे में रतन्याखेड़ी गांव के ग्रामीणों को किसी भी आवास योजना का लाभ ही नहीं मिल पा रहा है। जबकि पंचायत के तहत सर्वे में 155 हितग्राही योजना के लिए इंतजार कर रहे हैं। इस पर पूर्व सरपंच अर्जुनसिंह पंवार ने जिला पंचायत सदस्य के माध्यम से मांग भी उठाई है।

डाबड़ी गांव

सात साल पहले हुआ सर्वेक्षण

2011 में आर्थिक-सामाजिक सर्वेक्षण हुआ था। इसमें प्रत्येक परिवार की आर्थिक व सामाजिक स्थिति दर्ज की गई थी। आवास योजना में लाभ के लिए सरकार ने इसी सर्वेक्षण को आधार बनाया। सर्वेक्षण में लापरवाही का खामियाजा अब गरीबों को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि जिनके मकान कच्चे थे, उन्हें भी पक्का दर्शा दिया गया। इसका ही उदाहरण यह 13 पंचायत है, जहां सैकड़ों मकान कच्चे होने के बाद भी पक्के दर्शाए हुए है।

जिन्हें योजना का लाभ नहीं मिला, उन्हें दिलवाने का किया जा रहा प्रयास

योजना के तहत मिल रहे आवासों के लक्ष्य पंचायतों को दिए जा रहे हैं। जिन पंचायतों के हितग्राहियों काे लाभ नहीं मिला है। उनके सचिवों को सर्वे कर जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है, उन्हें भी लाभ दिलाने के लिए उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्य किया जा रहा है। -उदयप्रताप सिंह, सीईओ, जनपद पंचायत खाचरौद

झूठ की पोल खोलते तीन गांव के कच्चे मकान

रतन्याखेड़ी

सर्वे कराया पर उसे भी निरस्त किया

पंचायतों के सरपंच व सचिवों द्वारा मांग करने पर जनपद पंचायत ने लगभग 4 माह पहले सर्वे कराकर इसे ऑनलाइन दर्ज भी कराया था, लेकिन उसे भी निरस्त कर दिया गया है। अब पंचायत सचिवों को दोबारा सर्वे करने को कहा गया है। इसमें हितग्राही का फोटो उसके कच्चे मकान के साथ सर्वे फार्म में लगाना है। उसके बाद जनपद पंचायत के अधिकारियों की टीम द्वारा सर्वे कर इस सूची काे ऑनलाइन पोर्टल पर चढ़ाया जाएगा। संभवत: उसके बाद ही इन पंचायतों के हितग्राहियों को लाभ मिल सके।

बंजारी

खबरें और भी हैं...