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कुटनी बांध के डूब क्षेत्र में चली गई भूमि का नहीं मिला मुआवजा

3 वर्ष पहले
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कुटनी डैम के डूब क्षेत्र में आने वाली भूमियों का किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला है, जिसे लेकर किसान बेहद परेशान हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। ग्राम पाय के बालमुकुंद पटेल पिता कड़ोरे लाल पटेल ने अपने कागजाद दिखाते हुए भास्कर को बताया कि जब कुटनी डैम पूरी तरह भर गया तब हमारी आंखें खुलीं और पता चला कि हमारी जमीन तो डूब क्षेत्र में है, जबकि हमारी पूरी जमीन का मुआवजा ही नहीं मिला । हमने जो फसलें बोई, पेड़ लगाए, घर बनाया , मेड़ बंधान बनवाई, वह सब नष्ट हो गए। अब हम दर दर भटक रहे हैं, कोई राहत नहीं मिल रही। हमने जल संसाधन मंत्री रही उमा भारती को भी पत्र लिखा। उन्होंने हमारी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निराकरण के लिए जिला कलेक्टर छतरपुर को पिछले साल पत्र लिखा था। कलेक्टर ने सिंचाई विभाग को जांच के लिए पत्र दिया, लेकिन अभी तक सिंचाई विभाग ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

किसान बालमुकुंद ने बताया कि जल संसाधन विभाग ने कुटनी बांध के लिए मेरी जो भूमि अर्जित की गई उसके अलावा उसने 3 हेक्टेयर 98 आरे का मुआवजा दिए बिना अधिग्रहण कर लिया। इसकी जानकारी हमें उस समय हुई जब पिछले साल कुटनी डेम पूरी तरह से भर ने उसके चार अलग अलग खसरा नंबरों में दर्ज 4 रकवा क्रमश: 0.180 हेक्टेयर . 0.634 हे.1.000 हे. एवं 1.000 हे. डूब मे आने लगी। इसके चलते हम खेती करने से बंचित हो गए। यह जमीन ही हमारे परिवार के जीविकोपार्जन का एक साधन थी, वह भी चली गई। अब हम रोज अपने कागज लिए घूम रहे हैं लेकिन हमें अभी तक जमीन का मुआवजा नहीं मिला है।

इस संबंध में जल संसाधन एवं कुटनी पोशक जलाशय के एसडीओ पीके पांडे का कहना है कि उपरोक्त किसान की जमीन के डूब क्षेत्र मे आने संबंधित कागजादों की जांच करने संबंधी पत्र मिले हैं। जांच तेजी से चल रही है। जांच प्रक्रिया पूरी हाेने के बाद ही इस मामले में निर्णय लिया जाएगा।

पेटी पर कार्य कराने का भुगतान नहीं कर रही कंपनी : निवाड़ी। ग्रामीण पेयजल योजना के तहत गांव गांव में पाइप लाइनों को बिछाने का काम पूरा हो चुका है, लेकिन पेटी पर काम करने वाले छोटे ठेकेदारों, मजदूरों आदि का भुगतान न होने से वह कंपनी के पीछे घूम रहे है।

वहीं कंपनी के पदाधिकारी गायब है। नंदराम पुरोहित निवासी गिदखिनी ने एसडीएम पीएस चौहान को शिकायती पत्र दिया। जिसमें उल्लेख किया है कि उन्होंने केके आनंद कंपनी से गांवों में सीसी रोड कटिंग का कार्य पेटी पर लिया था तथा अनेकों गांवों में काम भी किया है। जिसका भुगतान एक लाख सत्तर हजार रुपए बकाया है। केके आनंद कंपनी के पदाधिकारी बिना भुगतान किए ही यहां से अपना कारोबार समेट कर चले गए हैं। अब उनकी जो देनदारियां शेष है वह लोग भटक रहे है। उन्होंने एसडीएम से मांग की है कि केके आनंद कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करें तथा बकाया राशि दिलाए।

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